Narwar Fort Cannon Stolen: मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में स्थित ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा व्यवस्था को धता बताते हुए बदमाशों ने एक बड़ी वारदात को अंजाम दिया है. यहां के प्रसिद्ध नरवर किले से सिंधिया राजवंश के समय की एक बेहद कीमती और ऐतिहासिक तोप चोरी हो गई है. बताया जा रहा है कि 15 और 16 जुलाई की दरमियानी रात हथियारबंद डकैतों का एक पूरा गिरोह किले में दाखिल हुआ और इस बेशकीमती धरोहर को गायब कर दिया.
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इंटरनेशनल मार्केट में 2 से 5 करोड़ की कीमत
चोरी गई यह ऐतिहासिक तोप करीब 400 साल पुरानी बताई जा रही है, जो पीतल, तांबे, कांसे और अष्टधातु के विशेष मिश्रण से तैयार की गई थी. इस तोप पर एक खास राजचिह्न अंकित होने के साथ-साथ फारसी और देवनागरी लिपियां भी लिखी हुई हैं. अंतरराष्ट्रीय ब्लैक मार्केट (एंटीक तस्करी बाजार) में इस अमूल्य तोप की कीमत करीब 2 से 5 करोड़ रुपये आंकी जा रही है. पुलिस को आशंका है कि इस बड़ी वारदात के पीछे किसी अंतरराष्ट्रीय एंटीक तस्कर गिरोह का हाथ हो सकता है.
दुर्गम रास्ते से लोडिंग गाड़ियां लेकर आए थे डकैत
घटनाक्रम के मुताबिक, 30 से अधिक की संख्या में आए हथियारबंद बदमाश किले के पिछले हिस्से में मौजूद बेहद दुर्गम रास्ते से लोडिंग गाड़ियां लेकर अंदर दाखिल हुए थे. किले की ओपन कचहरी में कुल 14 ऐतिहासिक तोपें रखी हुई थीं, जिनमें से बदमाशों ने इसी अष्टधातु की तोप को निशाना बनाया.
सुरक्षा व्यवस्था की खुली पोल:गार्ड्स के पास न बंदूक, न टॉर्च
इस सनसनीखेज चोरी ने पुरातत्व विभाग और स्थानीय प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. किले के शासकीय चौकीदार रमेश कोहली के अनुसार, जब रात में अचानक हथियारों से लैस बदमाश वहां पहुंचे, तो ड्यूटी पर तैनात गार्ड्स के पास सुरक्षा के नाम पर सिर्फ एक डंडा था. उनके पास रात के अंधेरे में देखने के लिए एक टॉर्च तक उपलब्ध नहीं थी. बदमाशों ने तैनात सुरक्षाकर्मियों को सीधे जान से मारने की धमकी दी और उन्हें वहां से भगा दिया. इसके बाद वे आसानी से तोप को गाड़ी में लादकर रफूचक्कर हो गए.
प्रशासन की भारी लापरवाही आई सामने
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि बदमाशों ने इस चोरी को अंजाम देने से पहले 5 जुलाई को भी एक प्रयास किया था. उस दिन बदमाशों ने किले की रेकी की थी और तोप को उसके मुख्य स्टैंड से नीचे गिरा दिया था. हालांकि, अत्यधिक वजन होने के कारण वे उस दिन इसे ले जाने में नाकाम रहे थे.
चौकीदार ने इसकी जानकारी और फोटो संबंधित अधिकारियों को भी भेजी थी, लेकिन प्रशासन ने इसे एक सामान्य घटना मानकर नजरअंदाज कर दिया और सुरक्षा में कोई इजाफा नहीं किया. अगर उसी वक्त जरूरी कदम उठाए जाते, तो इस ऐतिहासिक नुकसान को रोका जा सकता था. फिलहाल, पुलिस ने अज्ञात चोरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर पूरे इलाके में नाकाबंदी कर दी है और मामले की विवेचना की जा रही है.
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