यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) के नए नियमों को लेकर मचा बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है. रविवार, 8 मार्च को ग्वालियर हाई कोर्ट के वरिष्ठ वकील अनिल मिश्रा के नेतृत्व में सैकड़ों प्रदर्शनकारी दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने पहुंचे. हालांकि, प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही दिल्ली पुलिस ने अनिल मिश्रा और उनके समर्थकों को हिरासत में ले लिया. इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़प भी देखने को मिली. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि केंद्र की मोदी सरकार द्वारा लाए गए यूजीसी के नए नियम सामान्य वर्ग (सवर्ण) के छात्रों के साथ भेदभाव करते हैं. विस्तार से जानिए पूरी कहानी.
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क्या है पूरा विवाद?
दरअसल, यूजीसी ने साल 2026 में उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए नए नियम बनाए हैं, जिसे 'प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशन 2026' नाम दिया गया है. सरकार का दावा है कि ये नियम कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए हैं. इन नियमों के तहत हर संस्थान में एक 'इक्विटी कमेटी' बनाना अनिवार्य होगा, जो एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों की शिकायतों का निपटारा करेगी.
सवर्ण समाज का विरोध और 'भेदभाव' का आरोप
वरिष्ठ वकील अनिल मिश्रा और कई सवर्ण संगठनों का आरोप है कि ये नियम एकतरफा हैं. उनका तर्क है कि:
- इन नियमों में केवल एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों के खिलाफ भेदभाव की बात की गई है, जबकि सामान्य वर्ग के छात्रों को इसमें शामिल नहीं किया गया है.
- सवर्ण समाज को डर है कि इन नियमों का दुरुपयोग कर सामान्य वर्ग के छात्रों के खिलाफ झूठी शिकायतें दर्ज कराई जा सकती हैं.
- प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह नियम समानता के अधिकार के खिलाफ है और इससे समाज में भेदभाव कम होने के बजाय बढ़ेगा.
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और वर्तमान स्थिति
इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर की गई है. शीर्ष अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए प्रथम दृष्टया माना कि नियमों की भाषा में स्पष्टता की कमी है और इसका दुरुपयोग होने की संभावना है. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इन रेगुलेशंस को दोबारा बनाने (Redraft) का निर्देश दिया है. कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जब तक नए नियम स्पष्ट नहीं हो जाते, तब तक 2012 वाले पुराने नियम ही प्रभावी रहेंगे.
जंतर-मंतर पर हाई वोल्टेज ड्रामा
8 मार्च को देश भर के विभिन्न संगठनों ने दिल्ली में बड़े विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया था. अनिल मिश्रा के समर्थकों ने दावा किया कि कई नेताओं को हाउस अरेस्ट (नजरबंद) भी किया गया, लेकिन इसके बावजूद हजारों की संख्या में लोग दिल्ली पहुंचे. जंतर-मंतर की ओर कूच करते समय पुलिस ने घेराबंदी कर उन्हें रोक लिया और बसों में भरकर अज्ञात स्थान पर ले गई. इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने मोदी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. मामले की अगली सुनवाई अब 19 मार्च को होनी तय है.
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