मध्य प्रदेश में शुरू होगी 'सरस्वती योजना', जानें बेटियों को कैसे मिलेगा इसका फायदा?

CM Mohan Yadav New Scheme for Girls: मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार बालिकाओं के लिए 'सरस्वती योजना' शुरू करने जा रही है. इस योजना का मुख्य उद्देश्य उन बेटियों को दोबारा शिक्षा से जोड़ना है, जिन्होंने किसी कारणवश अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी थी. सरकार अब इन छात्राओं को 8वीं, 10वीं और 12वीं की परीक्षा पास करने में पूरी मदद करेगी.

MP Saraswati Yojana 2026
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MP Saraswati Yojana 2026: मध्य प्रदेश में लाड़ली लक्ष्मी और लाड़ली बहना योजना की के बाद अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव राज्य की बेटियों के लिए एक और बड़ी सौगात लेकर आ रहे हैं. प्रदेश सरकार जल्द ही 'सरस्वती योजना' (Saraswati Yojana) शुरू करने जा रही है. यह योजना उन बालिकाओं के लिए होगी जिन्होंने आर्थिक, सामाजिक या पारिवारिक मजबूरियों के चलते अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी थी.

क्या है सरस्वती योजना और इसका उद्देश्य?

जानकारी के अनुसार, सरस्वती योजना का सीधा मकसद उन बेटियों को मुख्यधारा की शिक्षा से दोबारा जोड़ना है जो 'ड्रॉपआउट' हो चुकी हैं. अक्सर देखा जाता है कि ग्रामीण और गरीब परिवारों की लड़कियां घरेलू जिम्मेदारियों या पैसों की तंगी की वजह से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी नहीं कर पातीं. मोहन यादव सरकार अब ऐसी बालिकाओं की पहचान करेगी और उन्हें राज्य ओपन स्कूल (State Open School) के माध्यम से 8वीं, 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं दिलाने में मदद करेगी.

सरकार कैसे करेगी बेटियों की मदद?

इस अभियान के तहत सरकार केवल परीक्षा फॉर्म भरवाने तक ही सीमित नहीं रहेगी, बल्कि छात्राओं को पढ़ाई के लिए हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी. 

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1. सर्वेक्षण और पहचान: सरकार सबसे पहले उन लड़कियों का सर्वे कराएगी जिन्होंने स्कूल छोड़ दिया है.
2. अध्ययन सामग्री: छात्राओं को परीक्षा की तैयारी के लिए जरूरी किताबें और अन्य अध्ययन सामग्री मुफ्त उपलब्ध कराई जाएगी.
3. परामर्श और मार्गदर्शन: छात्राओं को नियमित रूप से शैक्षणिक परामर्श दिया जाएगा ताकि वे बेहतर तरीके से पढ़ाई कर सकें.
4. उच्च शिक्षा का मार्ग: 12वीं पास करने के बाद इन छात्राओं को अच्छे कॉलेजों में एडमिशन दिलाने के लिए भी मार्गदर्शन दिया जाएगा.

कब होगी योजना की शुरूआत?

सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इसी महीने इस महत्वाकांक्षी अभियान की शुरुआत कर सकते हैं. यह पूरा प्रोजेक्ट मध्य प्रदेश के 'महिला एवं बाल विकास विभाग' के अंतर्गत संचालित किया जाएगा. इसे 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' अभियान के एक बड़े विस्तार के रूप में देखा जा रहा है. सरकार का मानना है कि इस कदम से न केवल साक्षरता दर बढ़ेगी, बल्कि बेटियों का आत्मविश्वास और आत्मसम्मान भी जागृत होगा.

महिला सशक्तिकरण की ओर एक और कदम

मध्य प्रदेश पहले से ही लाड़ली लक्ष्मी जैसी योजनाओं के माध्यम से बेटियों के भविष्य को सुरक्षित करने में अग्रणी रहा है. अब सरस्वती योजना के जरिए शिक्षा के क्षेत्र में भी बालिकाओं को सशक्त बनाने की कोशिश की जा रही है. जानकारों का मानना है कि यह योजना आने वाले समय में प्रदेश की सामाजिक संरचना में बड़ा बदलाव लाएगी और ड्रॉपआउट दर को कम करने में मील का पत्थर साबित होगी.

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