उफनती नदी, टूटा स्टॉप डैम और स्कूल जाते बच्चे... विदिशा का वीडियो देखकर हर कोई हैरान! आखिर जिम्मेदार कौन?

MP School Students Viral Video: मध्य प्रदेश के विदिशा में स्कूली बच्चों की जिंदगी से जुड़ा एक हैरान कर देने वाला वीडियो सामने आया है. उफनती बेतवा नदी और जर्जर स्टॉप डैम पार कर बच्चे रोज स्कूल पहुंच रहे हैं. वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन हरकत में आया है. जानिए पूरा मामला और अधिकारियों ने क्या कहा.

शिवराज के संसदीय क्षेत्र से आया चौंकाने वाला वीडियो
शिवराज के संसदीय क्षेत्र से आया चौंकाने वाला वीडियो
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Vidisha Betwa River Viral Video: केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के संसदीय क्षेत्र विदिशा से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है. यहां ग्राम पंचायत जीवाजीपुर के पल्हई गांव स्थित शासकीय हाई स्कूल में पढ़ाई करने जाने वाले मासूम बच्चे रोजाना अपनी जिंदगी को दांव पर लगा रहे हैं. सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें स्कूली छात्र उफनती बेतवा नदी और उस पर बने जर्जर स्टॉप डैम से खतरनाक छलांग लगाकर दूसरी तरफ जाते दिख रहे हैं. वीडियो में दिख रहा है कि जरा सी भी चूक इन बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है.

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10 किलोमीटर का चक्कर और 4 महीने पढ़ाई ठप

मिली जानकारी के मुताबिक, ककरुआ गांव के बच्चे पल्हई स्थित हाई स्कूल में दाखिला लेकर पढ़ाई करते हैं. सड़क मार्ग से गांव से स्कूल तक की दूरी लगभग 8 से 10 किलोमीटर पड़ती है. इस लंबे और थकाऊ रास्ते से बचने के लिए छात्र बेतवा नदी पर बने स्टॉप डैम का इस्तेमाल करते हैं, जो बेहद खतरनाक और कई जगहों से टूटा हुआ भी है. स्थानीय छात्रों के अनुसार, मानसून के महीनों में नदी का जलस्तर बढ़ने पर रास्ता पूरी तरह बंद हो जाता है, जिससे चार महीनों तक पढ़ाई ठप पड़ जाती है और उनका पूरा शैक्षणिक सत्र प्रभावित होता है.

वीडियो वायरल होने पर जागा प्रशासनिक अमला

इस वीडियो के सार्वजनिक होते ही प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है. आनन-फानन में शिक्षा विभाग, जिला पंचायत और लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों ने मौके का मुआयना किया. अधिकारियों का कहना है कि स्टॉप डैम से आवागमन को सुरक्षित करने के साथ ही निकटवर्ती गांव बंधेरा में स्थित स्कूल को हाई स्कूल में अपग्रेड करने का प्रस्ताव शासन को भेजा जा रहा है, ताकि बच्चों को लंबी दूरी तय न करनी पड़े. हालांकि, सवाल यही बना हुआ है कि बीते कई वर्षों से जान जोखिम में डालकर स्कूल जा रहे इन बच्चों की सुरक्षा पर प्रशासन की नजर अब जाकर क्यों पड़ी.

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