अडानी पावर और भूटान के बीच 770 मेगावाट के चमखारछू-1 हाइड्रो प्रोजेक्ट पर समझौता

आयुष मिश्रा

07 Oct 2026 (अपडेटेड: Oct 7 2026 2:34 PM)

अडानी पावर और भूटान की DGPC के बीच 770 MW के चमखारछू-1 हाइड्रो प्रोजेक्ट के लिए समझौता हुआ है. पढ़ें BOOT मॉडल पर आधारित इस प्रोजेक्ट और भारत-भूटान ऊर्जा साझेदारी की पूरी खबर.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

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अडानी पावर और भूटान की सरकारी कंपनी ड्रुक ग्रीन पावर कॉर्पोरेशन (डीजीपीसी) ने 770 मेगावाट क्षमता वाले चमखारछू-1 हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के निर्माण और संचालन के लिए शेयरहोल्डर्स एग्रीमेंट (SHA) पर हस्ताक्षर किए हैं.

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प्रोजेक्ट की रूपरेखा

यह परियोजना मध्य भूटान के झेमगांग जिले में चमखारछू नदी पर बनाई जाएगी.यह पीकिंग रन-ऑफ-रिवर प्रकार की पनबिजली परियोजना है.इसमें बड़े जलाशयों के बिना बहते पानी से बिजली पैदा की जाएगी.

इक्विटी अनुपात और BOOT मॉडल

दोनों कंपनियों के बीच इक्विटी अनुपात 49:51 रखा गया है.डीजीपीसी के पास 51 प्रतिशत और अडानी पावर के पास 49 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी.परियोजना BOOT (बिल्ड, ओन, ऑपरेट एंड ट्रांसफर) मॉडल पर आधारित है.दोनों पक्ष मिलकर इसे बनाएंगे, संचालित करेंगे और 30 साल की रियायत अवधि के बाद इसे भूटान सरकार को सौंप देंगे.

निर्माण की समयसीमा

निर्माण कार्य 2027 की पहली छमाही में शुरू होने की उम्मीद है.नींव रखने के बाद छह साल के अंदर परियोजना चालू करने का लक्ष्य है.यह दोनों पक्षों के बीच दूसरा बड़ा हाइड्रो सहयोग है.इससे पहले सितंबर 2025 में 570 मेगावाट की वांगछू परियोजना के लिए समझौता हुआ था.मई 2025 में अडानी ग्रुप और डीजीपीसी के बीच भूटान में कुल 5,000 मेगावाट जलविद्युत क्षमता विकसित करने का एमओयू भी साइन हुआ था.

अधिकारियों की प्रतिक्रिया

अडानी पावर के मैनेजिंग डायरेक्टर अनिल सरदाना ने कहा कि यह परियोजना ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने, कार्बन उत्सर्जन घटाने और सतत विकास के लक्ष्यों में मदद करेगी.गर्मियों में अतिरिक्त बिजली भारत को निर्यात की जा सकेगी.डीजीपीसी के मैनेजिंग डायरेक्टर दाशो छेवांग रिनजिन ने कहा कि यह प्रोजेक्ट भूटान की ऊर्जा सुरक्षा, खासकर सर्दियों में, सुनिश्चित करने में मददगार होगा.साथ ही भारत को अतिरिक्त स्वच्छ ऊर्जा निर्यात का मौका मिलेगा.

ऊर्जा आदान-प्रदान का महत्व

हिमालयी क्षेत्र में सर्दियों में नदियों का बहाव कम होने से भूटान को घरेलू बिजली की जरूरत पड़ती है, जबकि गर्मियों और मानसून में अतिरिक्त बिजली पैदा होती है.यह अतिरिक्त बिजली भारत में गर्मी के पीक सीजन में मांग पूरी करने में उपयोगी हो सकती है. समझौते के हस्ताक्षर समारोह में भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे भी मौजूद थे.

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