DK Shivakumar: ED जब बना था तब न तो इतना पावरफुल था, न इतना टेरर था. यूपीए के समय टेरर सीबीआई का होता था. 2014 में मोदी सरकार आई तो ईडी को इतना पावरफुल बना दिया कि बड़े से बड़े राजनीतिक विरोधी ईडी की चपेट में आने लगे. सोनिया गांधी, राहुल गांधी तक नहीं बचे. सीटिंग सीएम अरविंद केजरीवाल, हेमंत सोरेन को जेल जाना पड़ गया. मोदी सरकार ने बहुत सारे अधिकारों के साथ ईडी के हाथ में पकड़ा था पीएमएलए कानून और 120बी यानी आपराधिक साजिश नाम का चाबुक जिसके दम पर ईडी करप्शन, टैक्स चोरी से लेकर जंगल के बने कानून तक-किसी भी केस में घुस रही थी. अब वही चाबुक छिन गई तो ईडी को उठाना पड़ा बड़ा कदम.
ADVERTISEMENT
ED डायरेक्टर ने दिए दिशा-निर्देश
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक ईडी डायरेक्टर राहुल नवीन ने अफसरों से कहा है कि पीएमएलए केसों में केवल साजिश के आधार पर ईडी केस आगे नहीं बढ़ाएगी. ईडी मनी लॉन्ड्रिंग के केस दर्ज करने के लिए केवल आपराधिक साजिश पर निर्भर नहीं रहेगी. पक्का करेगी कि अपराध पीएमएलए में आता हो.
अरसे से ईडी कुछ ऐसे हाई-प्रोफाइल केस की जांच तूफानी तरीके से बढ़ा रही था जहां 120बी को छोड़कर कोई और अपराध नहीं था. कोर्ट में ताबड़तोड़ झटके खाने के बाद ईडी की आत्मा जागी. अब रियलाइज किया कि कोर्ट में बेइज्जती और नाकामी का सामना करने का कोई मतलब नहीं है। ईडी सरकार के कहे पर चलती है लेकिन कोर्ट के आगे न ईडी की चल सकती है, न सरकार की. ईडी वाले डायरेक्टर ने ईडी अफसरों को डायरेक्शन दे दिया कि किसी की एफआईआर के आधार पर ईडी केस में न कूदे.
जिक्र हो रहा है predicate offence यानी सांकेतिक अपराध का. सांकेतिक अपराध में केस दर्ज ऐसे होता था कि किसी अन्य एजेंसी जैसे राज्य पुलिस या सीबीआई की एफआईआर में आपराधिक साजिश का एंगल लगाकर ईडी खुद केस दर्ज करके जांच शुरू कर देती थी. पूछताछ होती. गिरफ्तारी होती. चार्जशीट तैयार होती. फिर कोर्ट में केस धड़ाम से गिर जाता.
ये भी पढ़ें- कौन हैं महमूद प्राचा? उन्होंने EC से क्या मांग लिया कि चुनाव आयोग ने रूल्स बदल दिए
डीके शिवकुमार ने किया केस
कर्नाटक के डिप्टी सीएम और कांग्रेस नेता डीके शिव कुमार का केस ईडी को बदलने वाला साबित हुआ. ईडी की तूफानी जांच की लपेट में बरसों तक फंसे रहे. 2018 में ईडी ने डीके पर टैक्स चोरी के आरोप में मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया. जांच में इतनी फुर्ती दिखाई कि गिरफ्तार करके 2019 में गिरफ्तार करके जेल में भी डाल दिया. करीब 5 साल के स्ट्रगल के बाद डीके को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली.
मार्च में सुप्रीम कोर्ट ने डीके शिवकुमार के खिलाफ ईडी का केस खारिज करते हुए कहा था कि यदि आपराधिक साजिश अनुसूचित अपराध से संबंधित नहीं है तो PMLA कानून आईपीसी की धारा 120बी का उपयोग करके लागू नहीं किया जा सकता. एक और मामला छत्तीसगढ़ के पूर्व रिटायर्ड आईएएस अनिल टुटेजा को लेकर था जो कथित शराब घोटाले में ईडी के हत्थे चढ़े थे.
बैकफुट पर ED
ईडी ने जांच की आड़ लेकर बड़े-बड़ों पर हाथ डाले. दिल्ली के सीएम रहे अरविंद केजरीवाल, दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया, झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन तक फंसे लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सबको जमानत पर रिहा कर दिया. ईडी की जांच में झोल था जिसे कोर्ट ने पकड़कर झटका दिया. ईडी के पास बैकफुट पर जाने के सिवा कोई और चारा था नहीं.
ईडी ने शोर तो बहुत मचाया. बड़े-बड़े नेताओं की नींद ईडी की जांच से हराम हुई. या तो ईडी को जांच को अंतिम मुकाम तक ले जाना नहीं था या ईडी की जांच कमजोर बुनियादों पर टिकी थी, ईडी के केस अदालतों में गिरने लगे. लाख विरोध, आलोचनाओं के बाद भी सरकार ने तो कुछ नहीं किया लेकिन कोर्ट से एक-एक करके ईडी के हाथ से तलवार, चाबुक छीने जा रहे हैं. आपराधिक साजिश यानी 120बी नाम का चाबुक भी इसी की भेंट चढ़ गया है. आपराधिक साजिश के लिए कानून 120बी आईपीसी में हुआ करता था. भारतीय न्याय संहिता में 120वी सेक्शन 61 बन गया है.
ये भी पढ़ें- महाकाल मंदिर में दर्शन के नाम पर हो रही थी करोड़ों की हेराफेरी, सामने आया चौंकाने वाला बड़ा घोटाला
सीनियर एडवोकेट ने की थी शिकायत
पिछले साल नवंबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने ईडी के पर कतरे थे. लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी और कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट से शिकायत की थी कि ईडी टैक्स चोरी के केस में भी पीएमएलए लागू कर रहा है। जस्टिस संजय किशन कौल, जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की बेंच ने रूलिंग देकर ईडी को बड़ा झटका दिया था. रूलिंग थी कि जब साजिश मूल अपराध से संबंधित न हो तो ईडी आईपीसी की धारा 120बी का उपयोग करके पीएमएलए लागू नहीं कर सकती. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आईपीसी की धारा 120बी को पीएमएलए के तहत स्टैंडअलोन सांकेतिक अपराध नहीं माना जा सकता. 120बी एकमात्र घातक अपराध नहीं है.
ADVERTISEMENT


