इथियोपिया को मिले रूसी Su-35 लड़ाकू विमान, जल्द आएगा S-400 एयर डिफेंस सिस्टम

आयुष मिश्रा

• 05:07 PM • 29 Oct 2026

इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद ने रूसी Su-35 लड़ाकू विमानों की डिलीवरी का ऐलान किया है. देश को चार S-400 एयर डिफेंस सिस्टम भी मिलने हैं. जानिए ऑपरेशन सिंदूर, रूस की रणनीति और हॉर्न ऑफ अफ्रीका पर इसका असर.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

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इथियोपिया को मिले रूसी Su-35 लड़ाकू विमान

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ऑपरेशन सिंदूर में S-400 की भूमिका ने खींचा दुनिया का ध्यान

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इथियोपिया को आधुनिक हथियारों की जरूरत

रूस ने अफ्रीका में अपनी सैन्य साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद ने 28 अक्टूबर 2026 को घोषणा की कि उनके देश को रूस से 12 Su-35 लड़ाकू विमानों की डिलीवरी मिली है. इसके अलावा इथियोपिया को चार S-400 एयर डिफेंस सिस्टम भी मिलने हैं. प्रधानमंत्री के मुताबिक, लड़ाकू विमानों की डिलीवरी तय समय से एक साल पहले हुई है. हालांकि, S-400 सिस्टम की डिलीवरी की तारीख और इस रक्षा समझौते की कुल लागत का खुलासा नहीं किया गया है.  इस घटनाक्रम ने हॉर्न ऑफ अफ्रीका में सुरक्षा और सैन्य संतुलन को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है. खास बात यह है कि भारत के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान S-400 की भूमिका को लेकर भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह के बयान के बाद इस रूसी एयर डिफेंस सिस्टम की चर्चा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हुई थी. 

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ऑपरेशन सिंदूर में S-400 की भूमिका ने खींचा दुनिया का ध्यान

मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य टकराव के दौरान भारतीय वायुसेना ने ऑपरेशन सिंदूर चलाया था. इस कार्रवाई के बाद भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने 9 अगस्त 2025 को बताया कि भारतीय वायु रक्षा प्रणालियों ने पाकिस्तान के कम से कम पांच लड़ाकू विमानों और एक बड़े विमान को निशाना बनाया था. एयर चीफ मार्शल ने S-400 की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए इसे गेम चेंजर करार दिया था. उनके मुताबिक, एक बड़े विमान को लगभग 300 किलोमीटर की दूरी पर निशाना बनाया गया था. इस बयान के बाद S-400 की लंबी दूरी तक निगरानी और हवाई खतरों को रोकने की क्षमता पर विशेष ध्यान गया. हालांकि, इस सैन्य कार्रवाई से जुड़े सभी विवरणों को एक ही हथियार प्रणाली के खाते में डालना सही नहीं होगा, क्योंकि आधुनिक हवाई रक्षा में रडार, कमांड नेटवर्क, अन्य मिसाइल प्रणालियों और खुफिया सूचनाओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है. S-400 रूस की लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली है. इसे लड़ाकू विमानों, क्रूज मिसाइलों और अन्य हवाई खतरों का मुकाबला करने के लिए विकसित किया गया है. इसकी वास्तविक प्रभावशीलता लक्ष्य के प्रकार, दूरी, तैनाती, रडार कवरेज और विरोधी की रणनीति पर निर्भर करती है.

इथियोपिया को रूस से Su-35 लड़ाकू विमान मिलने का ऐलान

इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद ने मॉस्को यात्रा के दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का आभार जताते हुए लड़ाकू विमानों की डिलीवरी की घोषणा की. यह घोषणा रूस-अफ्रीका शिखर सम्मेलन के दौरान सामने आई. प्रधानमंत्री के अनुसार, समझौते के तहत इथियोपिया को 12 Su-35 लड़ाकू विमान मिलने हैं और चार S-400 एयर डिफेंस बैटरियां भी उपलब्ध कराई जाएंगी. उन्होंने विमान तय समय से एक साल पहले मिलने की बात कही. हालांकि, डिलीवरी के विवरण पर कुछ स्पष्टता अभी बाकी है. रॉयटर्स की रिपोर्ट में रूसी हथियार निर्यातक रोसोबोरोनएक्सपोर्ट के हवाले से पहली खेप में दो Su-35 विमानों की डिलीवरी का उल्लेख भी किया गया है. इसलिए कुल 12 विमानों के समझौते और उनकी चरणबद्ध डिलीवरी के बीच अंतर समझना जरूरी है. यह सौदा इथियोपिया की सैन्य क्षमताओं को आधुनिक बनाने की व्यापक कोशिश का हिस्सा माना जा रहा है. Su-35 एक बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान है, जिसे हवा से हवा और हवा से जमीन पर हमला करने के लिए तैयार किया गया है.

क्या हैं Su-35 फाइटर जेट की खासियतें?

Su-35 रूस के सबसे उन्नत परिचालन लड़ाकू विमानों में शामिल है. इसे अक्सर 4++ पीढ़ी का विमान कहा जाता है.

इसकी प्रमुख विशेषताएं हैं:

  • थ्रस्ट-वेक्टरिंग तकनीक: विशेष इंजन नियंत्रण की मदद से विमान को कठिन परिस्थितियों में तेजी से दिशा बदलने और उच्च गतिशीलता बनाए रखने में मदद मिलती है.
  • उन्नत रडार: इसका इरबिस-ई रडार लंबी दूरी पर हवाई लक्ष्यों का पता लगाने और उन्हें ट्रैक करने के लिए बनाया गया है. वास्तविक पहचान दूरी लक्ष्य के आकार और परिस्थितियों के अनुसार बदल सकती है.
  • हवा से हवा में मुकाबला: Su-35 विभिन्न प्रकार की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों का इस्तेमाल कर सकता है.
  • हवा से जमीन पर हमला: उपयुक्त हथियारों के साथ यह जमीन पर मौजूद सैन्य ठिकानों और अन्य लक्ष्यों पर भी हमला कर सकता है.

इन क्षमताओं के कारण Su-35 इथियोपिया की वायुसेना के लिए महत्वपूर्ण बढ़ोतरी हो सकता है. लेकिन किसी भी लड़ाकू विमान का वास्तविक प्रदर्शन पायलटों के प्रशिक्षण, हथियारों की उपलब्धता, रखरखाव और अन्य सैन्य प्रणालियों के साथ उसके तालमेल पर भी निर्भर करता है.

S-400 सिस्टम मिलने से इथियोपिया की हवाई सुरक्षा कितनी मजबूत होगी?

इथियोपिया की घोषणा का दूसरा महत्वपूर्ण हिस्सा S-400 एयर डिफेंस सिस्टम है. लड़ाकू विमान हवाई मुकाबले में भूमिका निभाते हैं, जबकि जमीन पर तैनात वायु रक्षा प्रणालियां दुश्मन के विमानों और अन्य हवाई खतरों का पता लगाने तथा उन्हें रोकने के लिए इस्तेमाल होती हैं. S-400 में अलग-अलग दूरी के लक्ष्यों को रोकने के लिए विभिन्न प्रकार की मिसाइलों का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसकी क्षमता केवल मिसाइलों की मारक दूरी से तय नहीं होती, बल्कि रडार, कमांड सिस्टम, लक्ष्य की गति और ऊंचाई तथा तैनाती की परिस्थितियों पर भी निर्भर करती है. अगर इथियोपिया को घोषित चार S-400 बैटरियां मिलती हैं और उन्हें प्रभावी तरीके से तैनात किया जाता है, तो उसकी हवाई रक्षा क्षमता में महत्वपूर्ण वृद्धि हो सकती है. इससे संवेदनशील सैन्य ठिकानों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा मजबूत करने में मदद मिल सकती है. हालांकि, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि इन प्रणालियों के आने से इथियोपिया का हवाई क्षेत्र पूरी तरह अभेद्य हो जाएगा. कोई भी एयर डिफेंस सिस्टम हर प्रकार के हमले को रोकने की गारंटी नहीं देता.

क्या S-400 और Su-35 का संयोजन बदलेगा अफ्रीका का सैन्य संतुलन?

Su-35 और S-400 अलग-अलग भूमिकाएं निभाते हैं. पहला एक बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान है, जबकि दूसरा जमीन से संचालित लंबी दूरी की वायु रक्षा प्रणाली है. दोनों का प्रभावी तालमेल किसी देश की हवाई सुरक्षा और सैन्य प्रतिक्रिया क्षमता बढ़ा सकता है. इथियोपिया के लिए यह संयोजन उसकी रक्षा क्षमताओं को आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है. लेकिन इससे क्षेत्रीय शक्ति संतुलन कितना बदलेगा, यह कई कारकों पर निर्भर करेगा. इनमें विमानों की वास्तविक संख्या और उपलब्धता, पायलटों का प्रशिक्षण, मिसाइलों और अन्य हथियारों की आपूर्ति, रखरखाव, रडार नेटवर्क तथा पड़ोसी देशों की सैन्य तैयारियां शामिल हैं. भारत के ऑपरेशन सिंदूर ने भी यह दिखाया कि आधुनिक युद्ध में केवल हथियारों की मौजूदगी पर्याप्त नहीं होती. खुफिया जानकारी, सटीक लक्ष्य निर्धारण, सैन्य समन्वय और विभिन्न प्रणालियों का एकीकृत इस्तेमाल भी उतना ही महत्वपूर्ण है. इथियोपिया के लिए भी यही चुनौती होगी कि वह नए हथियारों को अपनी मौजूदा सैन्य संरचना में किस तरह शामिल करता है.

इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद द्वारा रूसी Su-35 लड़ाकू विमानों की डिलीवरी और चार S-400 एयर डिफेंस बैटरियों की योजना की घोषणा अफ्रीका की रक्षा राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है. भारत के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान S-400 की भूमिका पर भारतीय वायुसेना प्रमुख के बयान ने इस प्रणाली की क्षमताओं को लेकर वैश्विक चर्चा को बढ़ाया था. अब इथियोपिया की नई सैन्य खरीद यह संकेत देती है कि क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों के बीच आधुनिक हवाई रक्षा और लड़ाकू विमानों को लेकर देशों की दिलचस्पी बनी हुई है. हालांकि, इस सौदे की कुल लागत, S-400 की डिलीवरी की तारीख और विमानों की वास्तविक तैनाती जैसी जानकारियां अभी स्पष्ट नहीं हैं. इसलिए इसके दीर्घकालीन रणनीतिक प्रभाव का आकलन आने वाले समय में ही बेहतर तरीके से किया जा सकेगा.

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