Karnataka Congress Bhavan Dispute: देश के बड़े हिस्से में कांग्रेस अपनी राजनीतिक जमीन गंवा चुकी है लेकिन कर्नाटक ऐसा राज्य है जहां कांग्रेस ने मेहनत से खोई जमीन वापस पाई. जब जमीन वापस पाई तो बड़ा प्लान बना कि कर्नाटक में चप्पे-चप्पे पर कांग्रेस के भवन बनेंगे. संगठन को लेकर राहुल गांधी के विजन, डीके शिवकुमार के मास्टर स्ट्रोक से कर्नाटक में 100 कांग्रेस भवन बनाने के प्लान पर तेजी से काम चल रहा है. हो सकता है अगले महीने से आधारशिला रखने का काम शुरू हो जाए.
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कहानी शुरू होती है एक विजन से. राहुल गांधी चाहते हैं कि देश के हर जिले में कांग्रेस का अपना एक 'वैचारिक किला' हो. कर्नाटक के 'किंगमेकर' डीके शिवकुमार ने इस सपने को हकीकत में बदलने के लिए 'मिशन 100' का आगाज किया. लक्ष्य है कर्नाटक के हर कोने में 100 भव्य 'कांग्रेस भवन'. ये सिर्फ दफ्तर नहीं, बल्कि डिजिटल लाइब्रेरी, ट्रेनिंग सेंटर और हाई-टेक वॉर रूम होंगे. मकसद है 2028 के चुनाव से पहले बीजेपी के कैडर को टक्कर देना.
'लैंड अलॉटमेंट' को लेकर बड़ा सियासी तूफान
इस तैयारी के बीच कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर 'लैंड अलॉटमेंट' को लेकर बड़ा सियासी तूफान खड़ा हो गया है. मुडा (MUDA) घोटाले की आंच अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि अब 'कांग्रेस भवनों' के लिए दी गई जमीनों पर सवाल उठे हैं. बीजेपी का आरोप है कि सीएम सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार की जोड़ी ने पार्टी के लिए सरकारी खजाने को करोड़ों का चूना लगाया.
बीजेपी और विधान परिषद में विपक्ष के नेता चलवादी नारायणस्वामी ने आरोप लगाया कि कर्नाटक सरकार ने 31 जिलों में में कांग्रेस भवन बनाने के लिए सरकारी जमीनों की रेवड़ी बांटी है. वो जमीनें दी गई जहां सिविक एमेनिटी यानी जनता की सुविधाओं के लिए पार्क, अस्पताल बनने थे. बीजेपी का दावा है कि कांग्रेस भवन बनाने के लिए 40 करोड़ की जमीन केवल 2 करोड़ में कांग्रेस भवन ट्रस्ट को दी गई. नियमों के मुताबिक, ऐसी जमीनें बाजार भाव पर दी जानी चाहिए, लेकिन कांग्रेस के लिए 95% की छूट दी गई.
पावर का इस्तेमाल कर फाइलों को क्लियर करवाने का आरोप
इस पूरी कहानी के केंद्र में डीके शिवकुमार हैं, जो न केवल कर्नाटक के डिप्टी सीएम हैं बल्कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भी हैं. नारायणस्वामी ने आरोप लगाया कि शिवकुमार ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर फाइलों को क्लियर करवाया. आरोपों पर डीके शिवकुमार चुप नहीं रहे. डंके की चोट पर बीजेपी पर पलट वार किया कि कहा कि अगर बीजेपी अपने भव्य दफ्तर बना सकती है, तो कांग्रेस क्यों नहीं? शिवकुमार ने माना कि कांग्रेस भवनों के लिए 5,000 से 10,000 sq. ft. की सरकारी जमीन दी गई है. बीजेपी के समय में बेंगलुरु में अलग-अलग ट्रस्टों को रियायती दरों पर जमीन दी गई थी. अगर BJP सरकार ने जमीन नहीं दी थी, तो आरएसएस ऑफिस कैसे बना. जेडीएस (JDS) और बीजेपी के कई दफ्तर उन्हीं सीए साइट्स पर बने हैं जो सरकार ने दी थी.
कर्नाटक में क्यों बन रहे हैं कांग्रेस भवन
समझिए कि कर्नाटक में क्यों बन रहे हैं कांग्रेस भवन? राहुल गांधी का विजन है कि कांग्रेस के भवन भवन सिर्फ दफ्तर न हों, बल्कि 'संविधान पाठशाला' और स्थानीय कार्यकर्ताओं के ट्रेनिंग सेंटर बनें. बीजेपी उसी विजन में करप्शन का आरोप लगाया है. कर्नाटक चुनाव जीतने के बाद 'ट्रबलशूटर' डीके शिवकुमार ने कसम खाई थी कि वह राज्य के हर कोने में कांग्रेस का झंडा और पक्का दफ्तर गाड़ देंगे. कर्नाटक के 31 जिलों में करीब 100 भवनों पर करीब 150 से 200 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है.
डीके शिवकुमार का इरादा है कि भवन बनाने में लगने वाला खर्च पार्टी फंड, मंत्रियों और विधायकों के कॉन्ट्रीब्यूशन और चंदे से बनेगा. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चिक्काबल्लापुर और बादामी में जमीनें पहले ही आवंटित की जा चुकी हैं. बेंगलुरु समेत जिलों में पुराने कांग्रेस कार्यालयों को मॉर्डन बनाया जा रहा है. पुत्तूर और बेलगावी ग्रामीण जैसे इलाकों में आधारशिला रखी जा चुकी है. एक-एक भवन करीब 5,000 से 10,000 वर्ग फुट की जमीन पर बनना है. टारगेट है कि मार्च महीने से अगले महीने तक इन भवनों की आधारशिला रखी जाए. 10 मार्च को डीके प्रदेश अध्यक्ष के रूप में अपने 6 साल पूरे कर लेंगे.
कांग्रेस के पास अच्छी खासी प्रॉपर्टी है
कर्नाटक के ये 100 भवन कांग्रेस के उस विशाल साम्राज्य का हिस्सा हैं जो कन्याकुमारी से कश्मीर तक फैला है. कुछ महीने पहले दिल्ली के कोटला रोड पर करोड़ों का नया मुख्यालय बनकर तैयार हुआ. चुनाव आयोग को दी गई और ADR Association for Democratic Reforms की रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस ने 2022-23 में करीब 928 करोड़ रुपये की कुल संपत्ति घोषित की थी. दिल्ली के 24 अकबर रोड, कोटला रोड पर बन रहे नए आलीशान मुख्यालय 'इंदिरा गांधी भवन के अलावा भी कांग्रेस के पास अच्छी खासी प्रॉपर्टी है. कर्नाटक ऐसा राज्य है जहां कांग्रेस ने आर्गनाइज तरीके से अपने भवन बनाने पर काम शुरू किया. पिछले साल कांग्रेस ने प्रॉपर्टी की देखरेख के लिए अलग विभाग बनाया जिसका हेड विजय इंदर सिंगला को बनाया है.
तो क्या कर्नाटक के ये 'कांग्रेस भवन' पार्टी के पुनरुद्धार की नींव बनेंगे? या फिर 'मुडा घोटाले' के बाद यह जमीन आवंटन विवाद सिद्धारमैया सरकार के लिए नया सिरदर्द बनेगा? बीजेपी अब इस मामले को लोकायुक्त और कोर्ट ले जाने की तैयारी में है. मामला कानूनी कार्यवाही और औपचारिक शिकायतों के चक्रव्यूह में फंस चुका है. चलवादी नारायणस्वामी ने लोकायुक्त में शिकायत दर्ज कराई है. अगर लोकायुक्त ने अपनी जांच में नियमों का कोई उल्लंघन पाया तो ये बड़ा कोर्ट केस और राजनीतिक विवाद बनेगा. बीजेपी ने चेतावनी दी है कि यदि राज्य सरकार इन विवादित आवंटनों को तुरंत रद्द नहीं करती है तो कर्नाटक हाईकोर्ट में शिकायत की जाएगी. 100 कांग्रेस भवन बनने से पहले मामला 'राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप' से निकलकर जांच एजेंसियों के पास पहुंच गया है.
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