आम आदमी पार्टी (AAP) में हाल ही में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है. राज्यसभा में पार्टी के डिप्टी लीडर रहे राघव चड्ढा (Raghav Chadha) की जगह अब अशोक मित्तल (Ashok Mittal) को यह जिम्मेदारी दी गई है. इस फैसले के बाद सियासी गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं. इस बदलाव के बाद अशोक मित्तल सुर्खियों में आ गए हैं और लोगों के मन में सवाल उठने लगा है कि आखिर कौन हैं ये शख्स? आइए विस्तार से जानते हैं कौन हैं अशोक मित्तल, क्या है उनका बैकग्राउंड, एजुकेशन समेत उनसे जुड़ी रोचक बातें.
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कौन हैं अशोक मित्तल?
अगर आप यह सोच रहें है कि राघव चड्ढा को रिप्लेस करने वाले अशोक मित्तल महज एक नेता है तो आप गलत है. अशोक मित्तल सिर्फ नेता ही नहीं, बल्कि एक सफल कारोबारी और शिक्षाविद भी हैं. अशोक मित्तल पंजाब से आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद हैं. वे देश की बड़ी यूनिवर्सिटी लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (Lovely Professional University-LPU) के फाउंडर चांसलर हैं और प्रोफेशन से चार्टर्ड अकाउंटेंट भी रह चुके हैं. यानी उनका अनुभव राजनीति के साथ-साथ एजुकेशन और बिजनेस, दोनों फील्ड में मजबूत रहा है.
अशोक मित्तल का संबंध पंजाब के जालंधर से है. राघव चड्ढा की तरह ही अशोक मित्तल की शिक्षा भी काफी मजबूत मानी जाती है. उन्होंने गुरु नानक देव विश्वविद्यालय से कानून (Law) की पढ़ाई की है. साथ ही उन्हें अटल बिहारी वाजपेई विश्वविद्यालय से मानद डॉक्टरेट (Honoris Causa) भी मिल चुकी है.
अशोक मित्तल को मिल चुके हैं कई सम्मान!
अशोक मित्तल को शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में कई सम्मान मिल चुके हैं. उन्हें इंडियन रेड क्रॉस अवॉर्ड, पंजाब गौरव अवॉर्ड, शिक्षा रत्न अवॉर्ड, नेशनल एजुकेशन एक्सीलेंस अवॉर्ड मिल चुके हैं. इन सब वजहों से उनकी पहचान सिर्फ एक नेता के रूप में नहीं, बल्कि एक शिक्षाविद और समाजसेवी के तौर पर भी बनी है.
कब से राजनीति में एक्टिव?
शिक्षाविद से राजनेता बने अशोक कुमार मित्तल ने 2022 में सक्रिय राजनीति में एंट्री ली. वे अप्रैल 2022 में उच्च सदन के लिए निर्वाचित हुए थे और तब से रक्षा समिति, वित्त समिति और फरवरी 2026 में गठित समिति सहित कई संसदीय समितियों के मेंबर रहे हैं. उन्हें भारत-अमेरिका संसदीय मैत्री समूह का सदस्य भी बनाया गया था. पिछले साल पहलगाम आतंकी हमले के बाद डीएमके सांसद कनिमोझी के नेतृत्व में रूस, लातविया, स्लोवेनिया, ग्रीस और स्पेन का दौरा करने वाले सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल में भी वे शामिल थे.
अशोक कुमार मित्तल ने परिवर्तन को लेकर क्या कहा?
इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए अशोक कुमार मित्तल ने कहा है कि, 'पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन एक निरंतर प्रक्रिया है. पहले एनडी गुप्ता जी उपनेता थे, फिर राघव जी ने पदभार संभाला और अब मुझे यह जिम्मेदारी दी गई है. कल किसी और को यह मौका मिल सकता है. पार्टी चाहती है कि हर सांसद और नेता विभिन्न भूमिकाओं में सीखे और अनुभव प्राप्त करें और मुझे प्रशासनिक और राजनीतिक कौशल विकसित करने के लिए यह जिम्मेदारी दी गई है.'
क्या पार्टी छोड़ देंगे राघव चड्ढा?
राघव चड्ढा के पार्टी छोड़ने की अटकलों पर भी अशोक मित्तल ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि ये महज अफवाहें हैं और ऐसी बातें फैलती रहती हैं और इन्हें महत्व नहीं देना चाहिए. बता दें कि आम आदमी पार्टी (AAP) ने राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर राघव चड्ढा को उच्च सदन में पार्टी के उपनेता पद से हटाने की मांग की है. अपने पत्र में पार्टी ने यह भी आग्रह किया है कि राघव चड्ढा को अब आप के कोटे से सदन में बोलने का समय आवंटित न किया जाए.
मिठाई की दुकान से यूनिवर्सिटी तक का सफर
अशोक मित्तल का जन्म पंजाब के जालंधर में हुआ था. उनके पिता ने 'लवली स्वीट्स' नाम से छोटा सा मिठाई का कारोबार शुरू किया था. अशोक मित्तल ने अपने भाइयों के साथ इस काम में हाथ बंटाया. लेकिन उनका सपना कुछ बड़ा करने का था. धीरे-धीरे उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में कदम रखा और 2005 में लवली प्रोफेशनल युनिवर्सिटी की स्थापना की, जो आज देश की सबसे बड़ी निजी यूनिवर्सिटीज में गिनी जाती है.
उन्होंने कानून की पढ़ाई गुरु नानक देव विश्वविद्यालय से की. इसके बाद शिक्षा क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने एक ऐसा संस्थान खड़ा किया जहां हजारों छात्र पढ़ाई कर रहे हैं. उनकी सोच हमेशा यही रही कि शिक्षा के जरिए समाज को कुछ लौटाया जाए. यही वजह है कि LPU आज राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बना चुका है. अशोक मित्तल का सफर सिर्फ बिजनेस या शिक्षा तक सीमित नहीं रहा. उन्होंने अपने काम के जरिए लाखों युवाओं को रोजगार और बेहतर अवसर दिलाने में मदद की. उनकी यूनिवर्सिटी में अलग-अलग क्षेत्रों की पढ़ाई होती है और यहां से पढ़े छात्र देश-विदेश में काम कर रहे हैं. इस तरह उन्होंने शिक्षा को रोजगार से जोड़ने का काम किया.
क्यों अशोक मित्तल को मिली जिम्मेदारी?
राजनीति में आने के बाद भी उनका फोकस वही रहा शिक्षा, रोजगार और विकास. AAP से जुड़कर उन्होंने पंजाब में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई. 2022 में वे राज्यसभा पहुंचे और संसद में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी बात रखी. उनकी छवि एक शांत, व्यावहारिक और विकास पर ध्यान देने वाले नेता की रही है. अब जब AAP ने उन्हें राज्यसभा में अहम जिम्मेदारी दी है, तो उम्मीद की जा रही है कि वे शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों को और मजबूती से उठाएंगे. उनकी पृष्ठभूमि उन्हें इन विषयों पर गहराई से काम करने का अनुभव देती है.
साल 2024 में केजरीवाल ने जब जेल से लौटने के बाद दिल्ली के सीएम पद से इस्तीफा दिया था, तब अशोक मित्तल ने ही अपना बंगला उन्हें रहने के लिए ऑफर किया था. उस वक्त अशोक मित्तल ने कहा था, केजरीवाल द्वारा CM आवास छोड़ने के बाद मैंने उन्हें खुद के साथ रहने का निमंत्रण दिया. उन्होंने कहा कि आप के अन्य नेताओं ने भी साथ रहने का निमंत्रण दिया था, लेकिन उन्होंने मेरे साथ रहने का फैसला लिया. चुनावी लेखा-जोखा रखने वाली संस्था एडीआर यानी एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) के अनुसार अशोक मित्तल 91 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति के मालिक हैं.
यहां देखें वीडियो
राज्यसभा में राघव चड्ढा का पद मिलने के बाद AAP सांसद अशोक मित्तल का हुआ पहला भाषण
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