अयोध्य में राम मंदिर के चढ़ावा चोरी का जो मामला है वो अब बेहद गंभीर हो चुका है. इस पूरे विवाद के बीच सोमवार यानी 6 जुलाई की दोपहर 3 बजे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की एक बेहद अहम और आपातकालीन बैठक होने जा रही है. माना जा रहा है कि इस बैठक में न सिर्फ चंदा चोरी के आरोपों पर बड़ा मंथन होगा, बल्कि ट्रस्ट के पूरे सिस्टम को बदलने के लिए कुछ बहुत बड़े और कड़े फैसले लिए जा सकते हैं. पूरे देश की निगाहें आज होने वाली इस बैठक पर टिकी हैं.
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कैसे शुरू हुआ चढ़ावा चोरी का पूरा विवाद?
इस पूरे मामले की शुरुआत 7 जून को हुई थी जब समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने राम मंदिर में चढ़ावा चोरी होने का मुद्दा उठाकर सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी थी. शुरुआत में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने इन आरोपों को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि मंदिर का इंटरनल ऑडिट चल रहा है और अभी तक चोरी की कोई पुष्टि नहीं हुई है. लेकिन मामला तब और गरमा गया जब बीजेपी नेता डॉ. रजनीश सिंह ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर इस पूरे प्रकरण की जांच किसी केंद्रीय एजेंसी से कराने की मांग की.
मुख्यमंत्री योगी का एक्शन और एसआईटी की एंट्री
विवाद को बढ़ता देख उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया. एसआईटी की शुरुआती जांच रिपोर्ट आते ही पुलिस ने एक्शन लिया और मामले में 8 आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उन्हें सलाखों के पीछे भेज दिया. इस बड़ी कार्रवाई के तुरंत बाद, नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया. इसी बैकग्राउंड के बीच आज राम मंदिर परिसर में यह हाई-प्रोफाइल बैठक बुलाई गई है.
इस्तीफे की मंजूरी और नया सिस्टम
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS), विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व की तरफ से साफ निर्देश हैं कि चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफों को तुरंत स्वीकार कर लिया जाए, क्योंकि इस विवाद से ट्रस्ट की साख को काफी नुकसान पहुंचा है. मंदिर के चढ़ावे और प्रबंधन की सीधी जिम्मेदारी इन्हीं दोनों के पास थी, इसलिए ये शुरुआत से ही सवालों के घेरे में थे.
इसके अलावा बैठक में इन मुद्दों पर भी चर्चा होगी
SIT रिपोर्ट की समीक्षा: पुलिस और एसआईटी की जांच रिपोर्ट को सभी सदस्यों के सामने रखा जाएगा. बता दें कि चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव से भी पूछताछ कर बयान दर्ज किए जा चुके हैं, हालांकि इनके खिलाफ कोई एफआईआर नहीं है.
सीईओ (CEO) की नियुक्ति: मंदिर के कामकाज को पूरी तरह पारदर्शी और पेशेवर बनाने के लिए एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (Chief Executive Officer) की नियुक्ति पर मुहर लग सकती है.
बैलेंस शीट को मंजूरी: वित्तीय वर्ष 2025-26 के बिना ऑडिट वाले आय-खर्च के ब्योरे और बैलेंस शीट को मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा.
बैठक में कौन-कौन होगा शामिल?
ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी की तरफ से सभी 14 नियमित ट्रस्टियों को औपचारिक न्योता भेजा गया है. महंत नृत्य गोपाल दास खराब सेहत की वजह से वे अपने आवास से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के जरिए बैठक की अध्यक्षता करेंगे. इसके अलावा कई सरकारी अधिकारी भारत सरकार के सचिव प्रशांत लोखंडे और यूपी सरकार के प्रमुख सचिव (गृह) संजय प्रसाद भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़ेंगे. इसके अलावा मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा, शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती, युगपुरुष परमानंद जी महाराज, सदस्य कृष्ण मोहन, दिनेंद्र दास और उडुपी पीठाधीश्वर विश्व तीर्थ प्रपन्नाचार्य जी महाराज इस बैठक में सीधे तौर पर मौजूद रहेंगे.
बदलाव की जरूरत क्यों?
ट्रस्ट में फिलहाल 11 नियमित सदस्य बचे हैं. बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्रा के निधन के बाद से उपाध्यक्ष का पद पहले से खाली है. अब चंपत राय और अनिल मिश्रा के जाने के बाद मंदिर की व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए एक नए और मजबूत मैनेजमेंट सिस्टम का आना तय माना जा रही है.
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