बिहार सहित इन 4 राज्यों के आदमियों को नौकरी नहीं देगी ये कंपनी, CEO के बयान से मचा बवाल

न्यूज तक डेस्क

24 Sep 2026 (अपडेटेड: Sep 24 2026 12:32 PM)

बेंगलुरु की एक कंपनी के सीईओ ने एक पूर्व कर्मचारी के गलत व्यवहार का हवाला देते हुए उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश के पुरुषों को नौकरी न देने का ऐलान किया है.

इस कंपनी के कारण मच गया सोशल मीडिया पर बवाल
इस कंपनी के कारण मच गया सोशल मीडिया पर बवाल
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आजकल किसी कंपनी में नौकरी पाने के लिए अच्छी पढ़ाई, अनुभव, हुनर और इंटरव्यू पास करना जरूरी होता है, लेकिन बेंगलुरु की एक स्टार्टअप कंपनी ने हायरिंग का एक ऐसा नियम बनाया है, जिसने इंटरनेट पर तहलका मचा दिया है. कंपनी के सीईओ ने ऐलान किया है कि उनकी कंपनी अब उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश के पुरुष उम्मीदवारों को काम पर नहीं रखेगी. इस अजीबोगरीब फैसले के पीछे क्या वजह है और सोशल मीडिया पर लोग इसे लेकर क्या कह रहे हैं, आइए पूरी बात आसान शब्दों में समझते हैं.

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अचानक क्यों लिया गया ये फैसला?

ये पूरा मामला तब शुरू हुआ जब 'एवन स्पोर्ट्स वर्ल्ड' (A1 Sports World) नाम की कंपनी के फाउंडर और सीईओ कार्तिक एसजी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट शेयर की. उन्होंने बताया कि कंपनी में काफी सोच-विचार और बहस के बाद यह तय किया गया है कि इन चार राज्यों (UP, बिहार, राजस्थान और MP) से आने वाले पुरुषों को अब जॉब नहीं दी जाएगी. उन्होंने यह भी जोड़ा कि उनकी कंपनी में राजस्थान की एक महिला कर्मचारी पहले से काम कर रही हैं और उन्होंने भी इस फैसले पर सहमति जताई है.

एक पुरानी घटना बनी वजह

जैसे ही ये खबर फैली लोगों ने सीईओ की क्लास लगानी शुरू कर दी. विवाद बढ़ता देख कार्तिक एसजी ने एक और पोस्ट डालकर सफाई दी और बताया कि उन्हें यह कड़ा कदम क्यों उठाना पड़ा.

सीईओ के अनुसार लगभग दो हफ्ते पहले उन्होंने इन्हीं राज्यों में से एक के रहने वाले पुरुष कर्मचारी को नौकरी से निकाल दिया था. दरअसल, एमबीए पास इस कर्मचारी का रिज्यूमे और बैकग्राउंड भर्ती के समय एकदम साफ था, लेकिन काम शुरू करने के करीब दो महीने बाद उसका असली व्यवहार सामने आया. उस पर महिला सहकर्मियों के साथ अभद्रता करने के आरोप थे और सुधरने के लिए दो बार चेतावनी दिए जाने के बावजूद उसकी हरकतों में कोई सुधार नहीं आया. बात तब और बिगड़ गई जब उसने एक महिला सहकर्मी के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की, जिसके बाद कंपनी को उसे बर्खास्त करने का कड़ा कदम उठाना पड़ा.

कार्तिक ने कहा कि उनकी कंपनी में काफी कम उम्र के युवा काम करते हैं . उनके लिए बिजनेस चलाने से ज्यादा अपनी टीम और खासकर महिला कर्मचारियों की सुरक्षा मायने रखती है .

कंपनी में कितने लोग काम करते हैं?

कंपनी के आंकड़ों का हवाला देते हुए सीईओ ने अपने फैसले को सही ठहराया और बताया कि उनकी 32 कर्मचारियों वाली कंपनी में 14 महिलाएं शामिल हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि कंपनी में 20 कर्मचारी दूसरे राज्यों से हैं, जिनमें से 12 लोग उत्तर भारत या गैर-दक्षिण भारतीय क्षेत्रों से आते हैं. इसके साथ ही सीईओ ने जोर देकर कहा कि उनकी कंपनी विविधता (Diversity) में पूरा विश्वास रखती है और वहां अलग-अलग धर्मों व क्षेत्रों के लोग एक साथ मिलकर काम करते हैं .

इंटरनेट पर छिड़ी जंग

वहीं इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है और लोग दो गुटों में बंट गए हैं. अधिकतर लोगों का मानना है कि किसी एक व्यक्ति की गलती की सजा पूरे राज्य या वहां के सभी पुरुषों को नहीं दी जा सकती . किसी के व्यवहार या मानसिकता का उसके राज्य से कोई लेना-देना नहीं होता. ऐसे फैसले भेदभाव को बढ़ावा देते हैं .

वहीं कुछ लोगों ने सीईओ के फैसले को सही ठहराया है. उनका कहना है कि कार्यस्थल (Workplace) पर महिलाओं की सुरक्षा सबसे पहले आती है और अगर कोई बॉस अपनी टीम को सुरक्षित रखने के लिए कड़े कदम उठा रहा है, तो इसमें कुछ गलत नहीं है. फिलहाल, इस मामले ने नौकरी में रीजनल बायस (क्षेत्रीय भेदभाव), वर्कप्लेस सेफ्टी और हायरिंग के तरीकों पर एक नई बहस छेड़ दी है.

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