मुख्य चुनाव आयुक्त यानी CEC ज्ञानेश कुमार को सस्पेंड करने की मांग पर दाखिल याचिकाओं में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई है. मामले में बहस के बाद सुप्रीम कोर्ट(SC) ने CEC के सस्पेंड करने की मांग को खारिज कर दिया है. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि संवैधानिक संस्था कानून के मुताबिक काम करेगी. साथ ही चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. मामले में चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस बागची और जस्टिस वीं मोहना की पीठ में मामले की सुनवाई हुई है.
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राकेश सिंह और शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने दाखिल की याचिका
CEC ज्ञानेश कुमार के निलंबन के खिलाफ सामाजिक कार्यकर्ता राकेश कुमार सिंह और वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने याचिका दाखिल की है. उन्होंने याचिका में आरोप लगाया है कि, SIR, फॉर्म-6 में बदलाव और चुनाव आयोग के कई दूसरे फैसले कानून में निर्धारित प्रक्रिया को तोड़ते हुए(उल्लंघन) करते हुए लिए गए. साथ ही यह भी कहा गया है कि चुनाव आयोग से जुड़े कानून के मुताबिक फैसले सर्वसम्मति या बहुमत से लिए जाने चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ है. आज कोर्ट में राकेश कुमार सिंह का पक्ष रखने के लिए वरिष्ठ वकील विकास सिंह पेश हुए.
'नए कानून ने CEC को बनाया और शक्तिशाली'
सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान वकील विकास सिंह ने दलील पेश करते हुए कहा कि, नए कानून ने मुख्य चुनाव आयुक्त(CEC) को और शक्तिशाली बना दिया है. CEC को रिटायरमेंट के बाद भी जांच से संरक्षण दिया गया है. सिंह ने आगे कहा कि, 'प्रधानमंत्री तक को ऐसी इम्युनिटी नहीं है, यहां तक की जजों को भी ऐसा संरक्षण नहीं मिला है.'
इस पर जस्टिस बागची ने कहा है कि पद पर रहते हुए संरक्षण का कानून पहले भी था. इसपर सिंह ने कहा कि कानून रिटायरमेंट के बाद भी सुरक्षा देता है. CJI ने कहा कि संबंधित कानून को चुनौती देने का मामला फिलहाल लंबित है. विकास सिंह ने कहा कि इस मामले में कानून को चुनौती नहीं दे रहे हैं.
'CEC एकतरफा फैसला ले रहे हैं'
याचिकाकर्ताओं की ओर ज्ञानेश कुमार को CEC के पद से सस्पेंड करने की मांग की गई है. विकास सिंह ने सुनवाई के दौरान कहा कि, इनके अलावा दोनों चुनाव आयुक्तों को ही चुनाव आयोग चलाने दिया जाए. इसके लिए उन्होंने अनूप बरनवाल मामले वाली व्यवस्था बहाल करने की मांग भी की, जिसमें नियुक्ति समिति में CJI भी शामिल थे.
सिंह ने आरोप लगाते हुए कहा कि, CEC एकतरफा फैसले ले रहे हैं, जबकि कानून के मुताबिक चुनाव आयोग के जो फैसले जहां तक संभव हो सारे फैसले सर्वसम्मति से होने चाहिए और ऐसा नहीं होने पर बहुमत से फैसला होना चाहिए.
'समाचार रिपोर्ट के आधार पर आदेश पारित नहीं कर सकते'
सुनवाई के दौरान CJI ने कहा कि याचिकाकर्ता एक समाचार रिपोर्ट को आधार बनाकर अपनी बात रख रहे हैं. लेकिन समाचार रिपोर्ट के आधार पर केवल अदालत आदेश पारित नहीं सकती है. पहले चुनाव आयोग का जवाब आना चाहिए. इस पर विकास सिंह ने कहा है कि चुनाव आयोग ने अपनी प्रेस रिलीज भी जारी की है, जिसने संबंधित समाचार रिपोर्ट का खंडन नहीं किया है. उन्होंने आगे कहा कि चुनाव आयोग वैधानिक व्यवस्था का उल्लंघन नहीं कर सकता है.
इस पर CJI ने कहा, पहले उन्हें जवाब देने दीजिए. हमें उम्मीद है कि उन्होंने कानून का पालन किया होगा. अगर कानून का उल्लंघन हुआ है तो हम फैसले को पलट सकते हैं. CJI की इस टिप्पणी पर विकास सिंह ने सवाल उठाया कि जब चुनाव हो चुके हों और सरकार भी बन चुकी हो, तब चुनाव परिणाम को कैसे पलटा जा सकता है. उन्होंने अदालत से अंतरिम कदम उठाने की मांग की और कहा कि मौजूदा स्थिति में चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं.
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