2 हजार के ऊपर के मर्चेंट यूपीआई ट्रांजैक्शंस पर लगने वाला 0.4% MDR चार्ज रहेगा या जाएगा? सरकार फैसले को बदलेगी या अड़ी रहेगी, इसकी अभी कोई गारंटी नहीं लेकिन इस पूरे विवाद में कूदकर भारतपे के को-फाउंडर रहे अशनीर ग्रोवर ने अपनी सरकार विरोधी शार्क वाली ब्रैंडिंग जरूर कर ली है. यूपीआई ट्रांजैक्शंस पर चार्ज को लेकर अशनीर ग्रोवर ने सरकार को इतना कुछ सुना दिया जितना तो राहुल गांधी ने भी नहीं सुनाया.
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अशनीर ग्रोवर इंडियन स्टार्टअप के ऐसे फेस हैं जो सरकार की डिजिटल नीतियों का पोस्टर बॉय हुआ करता था, आज अचानक उसी सरकार के खिलाफ बगावती सुर अलाप रहे हैं. कल तक जो अशनीर सरकार की यूपीआई के कसीदे पढ़ते थे, आज वो अचानक राहुल गांधी की पॉलिटिकल लाइन पर आकर खड़े हो गए हैं. उन्होंने सीधे-सीधे बिजनेसमैन सुभाष चंद्रा के कर्ज और सरकार के टैक्स सिस्टम को जोड़कर बड़ा पॉलिटिकल बारूद सुलगा दिया कि चंद्रा साहब के 22,000 करोड़ माफ नहीं करते, तो इंडिया में यूपीआई अगले 20 साल तक फ्री चल जाता.
अशनीर ग्रोवर का यह नया अवतार बेहद दिलचस्प है. जो व्यक्ति कभी खुलकर किसी पॉलिटिकल पार्टी के साथ नहीं दिखा, आज डिजिटल इंडिया के सबसे बड़े टूल यानी यूपीआई के मुद्दे पर वो पूरी तरह से सरकार के सामने सीना ताने खड़ा है. क्या यह एक बिजनेसमैन की डिजिटल क्रांति को बचाने की जायज चिंता है, या कोई नया पॉलिटिकल स्टैंड? क्या देश के व्यापारियों की फिक्र करने वाले अशनीर का यह गुस्सा वाकई जायज है, या फिर यह उनकी अपनी बनाई कंपनी 'भारतपे' से हुई बेइज्जत विदाई और उनकी पत्नी माधुरी जैन पर लगे 81 करोड़ के गबन के आरोपों का कोई पुराना फ्रस्ट्रेशन है? यूपीआई विवाद गरमाते ही चर्चित चेहरा बन गए हैं अशनीर ग्रोवर. विस्तार से जानिए पूरी कहानी.
अशनीर ग्रोवर की कहानी
अशनीर ग्रोवर की कहानी एक कॉमन मैन के राइज एंड ग्रो की क्लासिक स्टोरी है. 1982 को दिल्ली में जन्मे अशनीर के पिता अशोक ग्रोवर चार्टर्ड अकाउंटेंट थे, जबकि मां नीरजा ग्रोवर सरकारी स्कूल में टीचर थीं. अशनीर का नाम माता-पिता के नाम को मिलाकर बना है. पिता के नाम अशोक और मां के नाम नीरू से जोड़कर नाम बना अशनीर, जो आगे चलकर देश का रोल मॉडल बना.
दिल्ली के मशहूर एपीजे स्कूल, साकेत से स्कूलिंग करने के बाद इंजीनियर बनने के लिए अशनीर ने आईआईटी की सबसे कठिन परीक्षा पास की. IIT दिल्ली से सिविल इंजीनियरिंग करने के बाद भी वो नहीं रूके. कॉर्पोरेट वर्ल्ड में जाने के लिए IIM अहमदाबाद से फाइनेंस में MBA किया. उसी दौरान उनकी लाइफ में दस्तक दी दिल्ली की लड़की माधुरी जैन ने.
अशनीर और माधुरी की लव-स्टोरी!
अशनीर ग्रोवर और माधुरी जैन की लव स्टोरी दिल्ली के कोचिंग सेंटर करियर लॉन्चर से शुरू हुई. अशनीर ग्रोवर IIT दिल्ली में सिविल इंजीनियरिंग कर रहे थे. हरियाणा की पानीपत की माधुरी जैन NIFT दिल्ली में फैशन डिजाइनिंग कर रही थी. अलग-अलग स्ट्रीम के ये दो लोग एक ही कोचिंग में मिले क्योंकि दोनों का कॉमन गोल था एमबीए वाला CAT यानी Common Admission Test की तैयारी. अशनीर को इंजीनियरिंग के बाद, माधुरी को फैशन डिजाइनिंग के बाद MBA की फील्ड में जाना था.
CAT प्रिपेरेशन के लिए दोनों ने दिल्ली के मशहूर कोचिंग इंस्टीट्यूट करियर लॉन्चर के साकेत सेंटर में एडमिशन लिया. दोनों की स्ट्रीम अलग थीं, लेकिन मंजिल एक थी- IIM यानी इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट. हालांकि, तकदीर को कुछ और ही मंजूर था. अशनीर का सिलेक्शन IIM अहमदाबाद में हो गया, लेकिन माधुरी IIM नहीं पहुंच सकीं.
हालांकि एक-दूसरे को पसंद करने के बाद भी दोनों की शादी आसान नहीं था. माधुरी के बिजनेसमैन पिता को अशनीर पसंद नहीं थे क्योंकि सैटल नहीं थे. IIM अहमदाबाद से निकलते ही अशनीर ग्रोवर को कोटक इन्वेस्टमेंट बैंकिंग में वाइस प्रेसिडेंट की बड़ी जिम्मेदारी मिली, तब जाकर रिश्ता मंजूर हुआ. जुलाई 2006 में दोनों की शादी हो गई. आगे चलकर अशनीर और माधुरी ने फिनटेक की दुनिया बदल दी.
नौकरी छोड़ एंटरप्रेन्योरशिप की दुनिया में की एंट्री!
कोटक इन्वेस्टमेंट में करीब 7 साल रहते हुए उन्होंने बैंकिंग सिस्टम का सारा जूस समझ लिया. 2013 में इंटरनेशनल बैंकिंग समझने का मौका मिला जब अमेरिकन एक्सप्रेस में डायरेक्टर बने. इंजीनियरिंग, एमबीए करने वाले अशनीर को करियर में सब कुछ मिल चुका था. बस नहीं मिला था चैन. अशनीर का दिल नौकरी में नहीं, कुछ बड़ा करने में था जिसकी संभावना स्टार्टअप की दुनिया में थी. 2015 में सीएफओ बनकर स्टार्टअप ग्रोफर्स से जुड़े. वहां भी मामला कुछ खास जमा नहीं. माधुरी जैन ने शादी के बाद सत्य पॉल जैसे बड़े ब्रांड्स के साथ बतौर सीनियर डिजाइनर काम किया और बाद में खुद का बुटीक और एक्सपोर्ट बिजनेस भी चलाया.
अशनीर ग्रोवर की टर्न अराउंड वाली नौकरी साबित हुई जूलरी ब्रैंड पीसी ज्वैलर्स में. गहनों के कारोबार में अशनीर का काम था, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन लाना. करीब 12 साल तक कॉर्पोरेट की इस घिसी-पिटी नौकरी और एक-दूसरे से दूर भागती जिंदगी से परेशान होकर 2018 में दोनों ने बड़ा फैसला लिया. अशनीर ने पीसी ज्वैलर की नौकरी छोड़ी और माधुरी ने अपना काम समेटा, और दोनों ने मिलकर नौकरी के इस सुरक्षित पिंजरे को तोड़कर एंटरप्रेन्योरशिप की उस अनजान दुनिया में छलांग लगा दी, जिसका नाम आगे चलकर भारत पे बना.
अशनीर ने समझा था दर्द!
पीसी ज्वैलर की नौकरी के दौरान ही अशनीर ग्रोवर के दिमाग में फिनटेक का वो क्रांतिकारी आइडिया कौंधा, जिसने आगे चलकर भारतीय पेमेंट सिस्टम की दिशा बदल दी. डिजिटल पेमेंट सिस्टम तो शुरू हो गया था लेकिन अशनीर ने समस्या देखी कि पेटीएम, फोनपे, मोबिक्विक जैसी कंपनियों के अलग-अलग क्यूआर कोड हर दुकान पर लगे होते थे. अगर ग्राहक पेटीएम से पे करना चाहता था, तो दुकानदार को पेटीएम का क्यूआर ढूंढना पड़ता था. तब कंपनियां दुकानदारों से हर ट्रांजैक्शन पर 1.5% से 2% तक का एमडीआर चार्जेस वसूलती थीं. एक छोटे दुकानदार के लिए अपना मुनाफा बैंकों और इन कंपनियों को देना एक बड़ा दर्द था. अशनीर ने इसी दर्द को अपना सबसे बड़ा बिजनेस बनाया.
सिंगल क्यूआर और अशनीर का साथ
भारत पे का टेक इंफ्रास्ट्रक्चर और सिंगल क्यूआर कोड का आइडिया सबसे पहले गुजरात के भाविक कोलाडिया और शाश्वत नकरानी ने बनाया था. भाविक कोलाडिया और शाश्वत नकरानी 2017 में इस पर काम कर रहे थे. कंपनी का नाम भारत पे रजिस्टर भी करा लिया था, लेकिन उनके पास क्रांतिकारी आइडिया को बड़े बिजनेस में बदलने का न तो अनुभव था और न ही बड़े निवेशकों से फंड जुटाने की कला.
उसी तलाश के दौरान भाविक कोलाडिया और शाश्वत नकरानी की 2018 में मुलाकात अशनीर ग्रोवर से हुई. भाविक और शाश्वत का सिंगल क्यूआर कोड का प्रोटोटाइप देखते ही फाइनेंस के इस जादूगर को आइडिया क्लिक हुआ कि ये तो फाड़ू आइडिया है. भाविक और शाश्वत के पास टेक और प्रोडक्ट की ताकत थी, तो अशनीर के पास कॉर्पोरेट का अनुभव, निवेशकों से करोड़ों रुपये खींच लाने की काबिलियत. अशनीर ग्रोवर कंपनी में बतौर को-फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) शामिल हुए. दिल्ली के रेस्टोरेंट में बैठकर इन तीन अलग-अलग हुनरमंदों ने उस पार्टनरशिप को हरी झंडी दी, जिसने देश के पूरे डिजिटल पेमेंट मार्केट की तस्वीर बदलकर रख दी. तीनों के अलायंस से निकला देश का पहला 'इंटरऑपरेबल सिंगल QR कोड'.
ऐसा क्यूआर कोड जिससे किसी भी ऐप चाहे वो गूगल पे हो, फोनपे या पेटीएम से पैसे लिए जा सकते थे, और वो भी लाइफटाइम 0% चार्ज पर. जब पूरी दुनिया दुकानदारों से पैसे वसूलने में लगी थी, तब अशनीर ने मुफ्त का ऐसा जाल फेंका जिसने रातों-रात लाखों व्यापारियों को उनके प्लेटफॉर्म पर ला खड़ा किया. अशनीर जानते थे कि भारतीय दुकानदार पेमेंट करने के लिए कभी पैसे नहीं देगा, लेकिन अगर उसे धंधा बढ़ाने के लिए बिना किसी कागजी कार्रवाई के आसान लोन मिले, तो वो ब्याज देने से कभी पीछे नहीं हटेगा और इसी एक कड़क सोच ने 'भारत पे' के रूप में एक अरबों डॉलर के साम्राज्य को जन्म दे दिया.
अशनीर ने कैसे जमा किए हजार करोड़ का नेटवर्थ?
अशनीर ग्रोवर की नेटवर्थ हजार करोड़ के बीच मानी जाती है. अक्सर मन में सवाल उठने वाला है कि जब यूपीआई ट्रांजैक्शन फ्री है, तो अशनीर ग्रोवर ने इससे पैसे कैसे बनाए? अशनीर ने सीधे यूपीआई ट्रांजैक्शन से पैसा नहीं कमाया. फ्री क्यूआर कोड देकर उन्होंने लाखों छोटे दुकानदारों और व्यापारियों का डेटा इकट्ठा किया. भारत पे ने दुकानदारों को ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड के आधार पर आसानी से करोड़ों का लोन देना शुरू किया. इस लोन पर मिलने वाले ब्याज और कंपनी की बढ़ती वैल्यूएशन के दम पर अशनीर की संपत्ति आसमान छूने लगी. इतने कमा लिए कि आगे शार्क टैंक में आने वाले नए बिजनेसमैन के बिजनेस में इन्वेस्ट करने लगे.
2022 का भूचाल और भारत पे से जुदाई
सफलता के आसमान पर उड़ रहे भारत पे के इस साम्राज्य में 2022 ऐसा भूचाल आया, जिसने अशनीर और उनके परिवार को कटघरे में खड़ा कर दिया. कंपनी में फाइनेंस की जिम्मेदारी संभाल रहीं अशनीर की पत्नी माधुरी जैन ग्रोवर पर फोरेंसिक ऑडिट में गबन के आरोप लगे. आरोप लगे कि उन्होंने कंपनी के पैसों का इस्तेमाल अपने पर्सनल ब्यूटी ट्रीटमेंट, इलेक्ट्रॉनिक्स और दुबई-यूएस की फैमिली ट्रिप्स के लिए किया. फजीहत के बाद फरवरी 2022 में बोर्ड ने माधुरी जैन को नौकरी से बर्खास्त कर दिया.
पत्नी के खिलाफ हुए इस एक्शन और बोर्ड के साथ बढ़ते भयंकर टकराव के बीच, मार्च 2022 में अशनीर ग्रोवर ने भी भारी मन से भारत पे के एमडी पद से इस्तीफा दे दिया. आगे कंपनी और ग्रोवर परिवार के बीच करीब 81 करोड़ के कथित फ्रॉड को लेकर लंबी कानूनी जंग चली. सितंबर 2024 में दोनों पक्षों के बीच फाइनल लीगल सेटलमेंट हुआ. केस खत्म हुआ और रिश्ता भी. नवंबर 2024 में दिल्ली हाई कोर्ट ने EOW की FIR और लुकआउट नोटिस को रद्द कर दिया.
अशनीर कैसे हुए फेमस?
अशनीर ग्रोवर बड़े आदमी बन गए थे लेकिन घर-घर में पहचान मिली टीवी पर आने से. 2021 में जब सोनी टीवी ने सबसे बड़े बिजनेस रियलिटी शो शार्क टैंक इंडिया का पहला सीजन ला रहा था, तब शुरुआती दौर में जजों के लिए करीब 300 आंत्रप्रेन्योर्स में से चुने गए अशनीर ग्रोवर. शो पर आते ही अशनीर फेमस होने लगे. शार्क टैंक से अलग-अलग बिजनेस में उन्होंने इन्वेस्ट तो करीब 3 करोड़ ही किए लेकिन शो में उनके वन-लाइनर्स की खूब चर्चा होने लगी. सोशल मीडिया पर उनके चेहरों के एक्सप्रेशन और डायलॉग्स पर लाखों वायरल मीम्स(Memes) बनने लगे, जो आज भी इंटरनेट पर हर छोटी-बड़ी सिचुएशन में इस्तेमाल किए जाते हैं.
शार्क टैंक का यह मंच अशनीर के लिए महज एक शो नहीं रहा, बल्कि उन्हें ब्रैंड बना दिया. आरोप लगे कि शार्क टैंक इंडिया के जज सिर्फ कैमरे के सामने बड़ी-बड़ी डील्स करने का दिखावा करते हैं, लेकिन असल जिंदगी में उनका पैसा स्टार्टअप्स तक नहीं पहुंचता. सोशल मीडिया पर अशनीर ग्रोवर पर भी यही आरोप मढ़े गए, तब उन्होंने कागज पत्तर के साथ सबूत दिए कि नमिता थापर के बाद पूरे पहले सीजन के 'दूसरे सबसे बड़े इन्वेस्टर' रहे, जिन्होंने अपनी जेब से सबसे ज्यादा वादे निभाए.
यहां देखें वीडियो
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