साल 2011 में अन्ना हजारे के एक आह्वान पर देश के बड़े-बड़े कॉर्पोरेट और आईआईटी से पढ़े नौजवान अपनी लाखों-करोड़ों की नौकरियां छोड़कर जंतर-मंतर और रामलीला मैदान पहुंच गए थे. इतिहास ने एक बार फिर खुद को दोहराया और दिल्ली का जंतर-मंतर एक अभूतपूर्व छात्र आंदोलन का गवाह बना. NEET पेपर लीक विवाद को लेकर सड़कों पर उतरी 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) ने सरकार की मानिए नींद उड़ा दी. इस आंदोलन में सोनम वांगचुक और अभिजीत दीपके जैसे बड़े चेहरों के साथ-साथ एक ऐसा पढ़ा-लिखा चेहरा पर्दे के पीछे और सामने मजबूती से खड़ा रहा, जिसने देश के युवाओं की आवाज बनने के लिए करोड़ों के कॉर्पोरेट पैकेज और आरामदायक जिंदगी को लात मार दी. यह कहानी है आशुतोष रांका की, जो CJP के इस पूरे छात्र आंदोलन के मुख्य रणनीतिकार और थिंक टैंक बने.
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जयपुर से IIT कानपुर और LSE तक का सफर
जयपुर के रहने वाले आशुतोष रांका बचपन से ही पढ़ाई में अव्वल रहे हैं. उन्होंने आईआईटी कानपुर से मटेरियल साइंस एंड इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री हासिल की, जहां वे स्टूडेंट जिमखाना के प्रेसिडेंट भी चुने गए थे. इसके बाद उन्हें दुनिया की सबसे बड़ी कंसल्टिंग फर्म 'मैकिन्से एंड कंपनी' (McKinsey & Company) में एक शानदार नौकरी मिली.
हालांकि, देश बदलने के जज्बे के कारण उन्होंने अपने कॉर्पोरेट करियर पर ब्रेक लगा दिया और आम आदमी पार्टी से जुड़ गए. आगे की पढ़ाई के लिए वह दुनिया की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी 'लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स' (LSE) चले गए, जहां से उन्होंने पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में मास्टर्स की डिग्री ली. इसके बाद अमेरिका में काम करने के दौरान भी वे सामाजिक कार्यों से जुड़े रहे और बाद में भारत लौट आए.
राजनीतिक पृष्ठभूमि और कॉकरोच जनता पार्टी में एंट्री
आशुतोष रांका साल 2018-19 के दौरान आम आदमी पार्टी की नेशनल मीडिया और सोशल मीडिया टीम का हिस्सा रहे थे. यहीं उनकी मुलाकात अभिजीत दीपके से हुई थी. जहां अभिजीत सोशल मीडिया पर नैरेटिव सेट करते थे, वहीं आशुतोष पर्दे के पीछे रहकर डेटा और कम्युनिकेशन की रणनीतियां बनाते थे.
दिसंबर 2025 में उन्हें राजस्थान में आम आदमी पार्टी के इंटेलेक्चुअल विंग का सचिव बनाया गया था. जब जून 2026 में NEET पेपर लीक का मुद्दा गरमाया, तो अभिजीत दीपके की सोशल मीडिया पैरोडी पेज 'कॉकरोच जनता पार्टी' को एक जमीनी आंदोलन में बदलने का फैसला किया गया. इस आंदोलन के दौरान अभिजीत दीपके ने आशुतोष रांका को अपनी पार्टी का आधिकारिक राष्ट्रीय प्रवक्ता और इंटेलेक्चुअल विंग का सेक्रेटरी नियुक्त किया.
सरकार से बातचीत और 'गांधीगिरी' की अनोखी रणनीति
जब जंतर-मंतर से उठ रही आवाजों के दबाव में सरकार के रुख में नरमी आई, तो केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा को बातचीत के लिए आगे किया गया. छात्रों की ओर से टेबल टॉक के लिए पहुंचे प्रतिनिधियों में सौरभ दास के साथ आशुतोष रांका ही सबसे बड़ा दिमाग बनकर बातचीत के लिए सामने बैठे. इस आंदोलन की सबसे अनोखी बात इसका शांतिपूर्ण और बौद्धिक तरीका रहा. उग्र प्रदर्शनों, पथराव या आगजनी के बजाय जंतर-मंतर पर पहुंचे छात्र चेहरों पर कॉकरोच के मुखौटे पहने, हाथों में तिरंगा, पढ़ाई की पुस्तकें और दिल्ली पुलिस के लिए गुलाब के फूल लेकर पहुंचे. इस 'गांधीगिरी' के पीछे आशुतोष रांका का ही दिमाग माना जा रहा है, ताकि आंदोलन पर अराजकता का कोई आरोप न लग सके.
सोनम वांगचुक का सुरक्षा कवच और सादा जीवन
आंदोलन में बड़ा मोड़ तब आया जब पर्यावरण एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक छात्रों के समर्थन में भूख हड़ताल पर बैठ गए. जब पुलिसिया कार्रवाई के बीच वांगचुक की तबीयत बिगड़ने लगी और उनका वजन 11 किलो तक घट गया, तब आशुतोष रांका और उनकी टीम ने सोनम वांगचुक के चारों तरफ युवाओं का एक ऐसा मानवीय सुरक्षा कवच तैयार किया कि पुलिस उन्हें जबरन हटा नहीं सकी. आशुतोष ने लगातार मीडिया ब्रीफिंग के जरिए देश के सामने आंदोलन की अपडेट्स दिया.
करोड़ों की नौकरी छोड़ने वाले आशुतोष आज भी बेहद सादगी भरा और लो-प्रोफाइल जीवन जीते हैं. उनका परिवार जयपुर में रहता है और उनके इस फैसले के साथ मजबूती से खड़ा है. शादी और पर्सनल लाइफ से ऊपर उठकर आशुतोष ने फिलहाल देश के युवाओं के भविष्य और उनके अधिकारों को ही अपनी प्राथमिकता बना लिया है.
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