Charchit Chehra: राजघराने में पली बढ़ी भाग्यश्री के साथ ऐसा क्या हुआ कि अब बंद हो गए दरवाजे? जानिए उनकी पूरी कहानी

रूपक प्रियदर्शी

• 12:54 PM • 19 Sep 2026

Charchit Chehra Bhagyashree: बॉलीवुड की 'मैंने प्यार किया' फेम भाग्यश्री एक बार फिर चर्चा में हैं, लेकिन इस बार वजह उनका फिल्मी करियर नहीं बल्कि सांगली के पटवर्धन राजघराने से जुड़ा पारिवारिक विवाद है. गणेश चतुर्थी के दौरान भाग्यश्री ने सांगली के श्री गणपति पंचायतन संस्थान में आरती की, जिसके बाद उनके पिता विजयसिंहराजे पटवर्धन ने इस पर आपत्ति जताई और अपने गोद लिए बेटे आदित्यराजे पटवर्धन को परिवार का एकमात्र उत्तराधिकारी बताया.

Bhagyashree Sangli Royal Family Controversy
Bhagyashree Sangli Royal Family Controversy
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1989 में रिलीज हुई 'मैंने प्यार किया' फिल्म ऐसी कल्ट फिल्म बन गई जिसके गाने आज भी हिट हैं. सलमान खान तो बहुत आगे निकल गए लेकिन हमेशा-हमेशा के लिए भाग्यश्री उसी फिल्म की पहचान बन गईं. करीब 35 साल से जिसे बॉलीवुड की एक्ट्रेस भाग्यश्री के रूप में जानते हैं उनकी रियल लाइफ स्टोरी किसी ज्यादा फिल्मी और राजसी है. सांगली के पटवर्धन राजवंश की वो राजकुमारी है, जिसके कदम कभी मखमली कालीनों पर पड़ते थे. लेकिन वक्त का खेल ऐसा कि आज उसी राजकुमारी के लिए राजपरिवार के दरवाजे बंद हो गए हैं. कहने तो राजकुमारी भाग्यश्री हैं लेकिन उनके पास कुछ बचा नहीं है. सांगली के पटवर्धन राज परिवार में जो कुछ हुआ है उसी से चर्चित चेहरा बन गईं हैं भाग्यश्री. 

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भाग्यश्री की कहानी में इतने मोड़ हैं जिसके बारे में बहुत ज्यादा चर्चा नहीं रही है. एक्ट्रेस के करियर की शुरुआत हुई, तो पहली ही फिल्म मैंने प्यार किया से टॉप पर पहुंच गईं, लेकिन रियल लाइफ में उन्होंने जिससे जितना प्यार किया उसने उनका बहुत कुछ छीन लिया. प्यार के लिए उन्होंने उस चमकते स्टारडम को पल भर में छोड़ दिया. सालों बाद स्थिति ये हो गई कि जिस राजमहल में उनका जन्म हुआ, उसी परिवार में अब भाग्यश्री के लिए कोई जगह नहीं बची है. पिता का गुस्सा ऐसा फूटा है कि सगी बेटियों को दरकिनार कर, एक गोद लिए बेटे को रियासत का वारिस बना दिया गया है. आइए विस्तार से जानते हैं पूरी कहानी.

क्या है वो विवाद जिससे चर्चा में आई भाग्यश्री?

पटवर्धन परिवार में भाग्यश्री को लेकर विवाद की शुरुआत में गणेश चतुर्थी के मौके पर हुई. करीब 4 साल बाद सांगली लौटीं एक्ट्रेस भाग्यश्री अचानक परिवार के ऐतिहासिक श्रीमंत गणपति पंचायतन मंदिर में बप्पा की महापूजा और आरती करने पहुंचीं. भाग्यश्री का कहना था कि उनके पिता विजयसिंहराजे पटवर्धन की तबीयत ठीक नहीं रहती, इसलिए परंपरा को निभाने के लिए बेटियों में से किसी एक को आगे आना ही था.

जैसे ही भाग्यश्री ने गर्भगृह में जाकर आरती की, मंदिर के मैनेजर जयदीप अभ्यंकर के साथ उनकी तीखी बहस हो गई. यह बहस महज एक मंदिर की रस्म तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने राजघराने के भीतर सालों से सुलग रहे उत्तराधिकार के विवाद को सरेआम उजागर कर दिया. पिता की गैर-मौजूदगी में की गई इस आरती ने राजघराने के भीतर सालों से सुलग रहे उत्तराधिकार के विवाद को सरेआम उजागर कर दिया.

विजयसिंहराजे पटवर्धन का भड़का गुस्सा, किया बड़ा ऐलान!

बेटी भाग्यश्री के इस कदम पर सांगली के मौजूदा प्रमुख राजा विजयसिंहराजे पटवर्धन का गुस्सा भड़क उठा. उन्होंने मीडिया के सामने आकर भाग्यश्री के दावों को खारिज करते हुए कहा कि वो पूरी तरह ठीक हैं. भाग्यश्री को आरती नहीं करनी थी. किसी को भी यह रवैया नहीं अपनाना चाहिए कि मैं बेटी हूं, तो कुछ भी कर सकती हूं. परंपराएं तोड़ी नहीं जा सकतीं. राजा विजयसिंहराजे ने ऐलान कर दिया कि 16 साल आदित्यराजे पटवर्धन ही इस घराने के युवराज और सांगली की गद्दी के इकलौते वारिस हैं. राजा का कहना है कि तीनों बेटियों को परिवार में हमेशा पूरा मान-सम्मान दिया जाता है, लेकिन शादी के बाद वो दूसरे परिवारों का हिस्सा हैं. परंपरा के मुताबिक, गद्दी का अधिकार सिर्फ उनके दत्तक पुत्र आदित्यराजे का है और बेटियों को इस फैसले को स्वीकार करना चाहिए.

सारे विवाद की जड़ में एक फैक्टर ये भी है कि राजा विजयसिंहराजे और रानी राजलक्ष्मी पटवर्धन की कुल तीन बेटियां हुईं, कोई बेटा नहीं हुआ. तीन बहनों में भाग्यश्री सबसे बड़ी हैं. भाग्यश्री की छोटी बहनें हैं, मधुवंती पटवर्धन और पूर्णिमा पटवर्धन. भाग्यश्री की तरह दोनों बहनों ने भी फिल्मी दुनिया में खुद को आजमाया. बहन मधुवंती ने गोविंदा के अपोजिट फिल्म 'दो आंखें बारह हाथ' से बतौर एक्ट्रेस कदम रखा था, जबकि उनकी दूसरी बहन पूर्णिमा सिंगर बनीं. हालांकि जैसे भाग्यश्री बॉलीवुड में आकर लौट गईं उनकी बहनों का भी कोई बड़ा करियर बना नहीं. 

कौन हैं आदित्यराजे, जिन्हें लिया गया गोद?

आखिर सगे खून के रिश्तों के बीच  गोद लिया बेटा कैसे इस राजपरिवार का इकलौता राजा बन गया? चूंकि राजा विजयसिंहराजे का कोई सगा बेटा नहीं था, इसलिए उन्होंने सांगली राजवंश में सदियों से चली आ रही 'केवल बेटे को ही उत्तराधिकारी बनाने' की शाही परंपरा को जारी रखने का फैसला किया. इसी परंपरा के तहत, साल 2024 में उन्होंने 16 साल के आदित्यराजे को कानूनी तौर पर गोद ले लिया. आदित्यराजे कोई बाहरी नहीं, बल्कि रिश्ते में राजा-रानी के नाती यानी रानी राजलक्ष्मी के भाई के सगे पोते हैं और उनके पिता जयदीप अभ्यंकर मंदिर ट्रस्ट के मैनेजर हैं.

राजा का यह कदम परंपरा के लिहाज से तो सही था, लेकिन इसने परिवार के भीतर पिता और बेटियों के बीच नफरत की चिंगारी सुलगा दी है. तीन सगी बेटियों को यह फैसला नागवार गुजरा कि उनके जीवित रहते, एक गोद लिए बेटे को पूरी रियासत की चाबी सौंप दी गई. यही वजह है कि 4 साल बाद जब भाग्यश्री सांगली लौटीं, तो उन्होंने इसी फैसले और व्यवस्था को चुनौती देने के लिए मंदिर के गर्भगृह में कदम रखा, जिससे यह पारिवारिक शीतयुद्ध अब खुले संग्राम में बदल चुका है.

भाग्यश्री की लाइफ जर्नी!

जिसे भाग्यश्री के नाम से सारा देश जानता है उनका पूरा नाम श्रीमंत राजकुमारी भाग्यश्री राजे पटवर्धन है. 23 फरवरी 1969 को सांगली के पटवर्धन परिवार में भाग्यश्री का जन्म हुआ. राजसी परिवार में जन्म हुआ तो बचपन महलों के ऐशो आराम के बीच बीता. लेकिन डेस्टनी कुछ और थी. भाग्यश्री को एक्टिंग की दुनिया में जाना था. भाग्यश्री ने अपने करियर की शुरुआत अमोल पालेकर के टीवी सीरियल 'कच्ची धूप'(1987) से की थी, तब उनके पिता ने इसकी इजाजत दी थी क्योंकि अमोल पालेकर उनके पारिवारिक मित्र थे. परिवार सख्त और अनुशासित जरूर था, लेकिन एक्टिंग में जाने के खिलाफ नहीं था. चीजें तब खराब हुईं जब उन्होंने करियर के पीक पर परिवार की मर्जी के खिलाफ जाकर शादी की.

पहली फिल्म मिली सूरज बड़जात्या जैसे प्रोड्यूसर की. हीरो मिले सलमान खान जो तब इतने बड़े स्टार नहीं थे. फिल्म थी 1989 में रिलीज हुई 'मैंने प्यार किया'. फिल्म सुपर डुपर हिट रही. सलमान खान के अपोजिट सामान्य परिवार की लड़की सुमन के रोल से भाग्यश्री रातों-रात देश की धड़कन बन गईं. पहली ही फिल्म के लिए बेस्ट डेब्यू स्टार का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिल गया. कायदे से भाग्यश्री का करियर रॉकेट की रफ्तार से भागना चाहिए था लेकिन वहां भी डेस्टनी कुछ और थी. 

परिवार के खिलाफ जाकर की थी शादी, फिर स्टारडम को कहा अलविदा!

जब भाग्यश्री का करियर सातवें आसमान पर था, तभी उनकी जिंदगी में एक और बड़ा मोड़ आया. उन्होंने अपने बचपन के प्यार हिमालय दसानी से शादी करने का फैसला किया. भाग्यश्री का राजपरिवार उस शादी के भी सख्त खिलाफ था. परिवार की दो आपत्तियां थी, एक तो भाग्यश्री की उम्र कम थी और दूसरा उन्होंने जिस हिमालय दसानी को चुना वो किसी शाही परिवार से नहीं थे. फिर भी विद्रोह की राह चुनते हुए भाग्यश्री ने अपना घर छोड़ दिया और एक मंदिर में साधारण तरीके से शादी कर ली, जिसमें उनके माता-पिता शामिल नहीं हुए. भाग्यश्री इंतजार करती रहीं लेकिन वो नहीं आए. आए तो केवल सलमान खान. 

शादी के बाद भाग्यश्री ने प्रोड्यूसर्स के सामने शर्त रख दी कि आगे वो केवल अपने पति के साथ ही फिल्मों में काम करेंगी. उन्होंने पति के साथ कैद में है बुलबुल और 'पायल' जैसी कुछ फिल्में कीं, लेकिन वो सब फ्लॉप रहीं. हिमालय हीरो बन नहीं सके और भाग्यश्री हीरोइन बनी नहीं रह सकीं. भाग्यश्री की डिमांड नहीं रही. उन्होंने अपने परिवार, बेटे अभिमन्यु और बेटी अवंतिका की परवरिश के लिए बॉलीवुड के चमकते स्टारडम को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया.

सिंधी कारोबारी परिवार से ताल्लुक रखने वाले हिमालय दसानी, भाग्यश्री के स्कूल के दिनों के प्यार हैं. पति हिमालय के साथ भाग्यश्री की लाइफ में बहुत कुछ हुआ. शादी को लेकर परिवार से लड़ाई हुई. शादी के बाद ससुराल की प्रॉपर्टी हड़पने के आरोप लगे. पत्नी ने स्टार बनाने की कोशिश की लेकिन वो कोशिशें भी नाकाम रहीं. उस चक्कर में भाग्यश्री के करियर का भाग्य डूब गया. हिमालय दसानी 2019 में बड़े कांड में फंसे जब मुंबई पुलिस ने उन्हें हाई-प्रोफाइल जुआ और सट्टेबाजी रैकेट चलाने के आरोप में गिरफ्तार किया था. 

जब पिघला था विजयसिंहराजे का दिल!

दावा है कि परिवार में लड़ाई प्रॉपर्टी, अधिकारों को लेकर जंग शुरू हुई. राजा विजयसिंहराजे अपनी बेटी की शादी के खिलाफ थे लेकिन एक दिन ऐसा जब आया जब दामाद हिमालय दसानी को सांगली एस्टेट और शाही संपत्तियों के मैनेजमेंट का बड़ा काम मिल गया. दरअसल, इस फैसले के पीछे पारिवारिक रिश्तों को सुधारने की एक भावुक और मजबूर कोशिश छिपी थी. शादी के कई सालों बाद तक माता-पिता और भाग्यश्री के बीच बातचीत पूरी तरह बंद थी. लेकिन समय के साथ, जब भाग्यश्री के दो बच्चे हुए, तो बुजुर्ग माता-पिता का दिल अपनी इकलौती नाती और नवासे के लिए पिघलने लगा. धीरे-धीरे परिवार में बातचीत शुरू हुई और इस रिश्ते पर जमी बर्फ पिघली.

क्यों छिन लिया गया था हिमालय दसानी का अधिकार?

चूंकि राजा का अपना कोई बेटा नहीं था, इसलिए उन्होंने अपनी सबसे बड़ी बेटी के पति यानी हिमालय दसानी पर भरोसा जताने का फैसला किया. साल 2013 में, एक दामाद को बेटा मानकर और परिवार का हिस्सा स्वीकार करते हुए राजा ने उन्हें सांगली एस्टेट और मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय कामों की कमान सौंप दी. लेकिन राजा की यह भावुकता उनके जीवन की सबसे बड़ी भूल साबित हुई.

2013 से 2016 के बीच भाग्यश्री और उनके पति हिमालय दसानी सांगली एस्टेट का काम देख रहे थे. लेकिन बाद में पैसों और जमीनों के लेन-देन में कथित अनियमितताओं और विवाद के कारण राजा ने दामाद हिमालय दसानी से सारे अधिकार वापस छीन लिए और उन्हें दूर कर दिया. राजा ने आरोप लगाया हुआ है कि भाग्यश्री और उनके पति जमीन और प्रॉपर्टी हड़पने की कोशिश कर रहे हैं. पिता के आरोपों पर भाग्यश्री का पक्ष रहा कि वो केवल पारिवारिक जिम्मेदारी और परंपरा का निर्वाह कर रही हैं. 

भाग्यश्री ने फिर किया कमबैक!

फिल्मों से दूरी बनाने के बाद, भाग्यश्री ने खुद को पूरी तरह से एक होममेकर और फिटनेस इन्फ्लुएंसर के रूप में ढाल लिया. उन्होंने न्यूट्रिशन और क्लीनिकल डायटेटिक्स की पढ़ाई की और सोशल मीडिया पर वेलनेस और हेल्थ टिप्स साझा कर लाखों फैंस का दिल जीता. लेकिन एंटरटेनमेंट की दुनिया से नाता कभी पूरी तरह नहीं टूटा. बच्चों के बड़े होने के बाद उन्होंने धीरे-धीरे एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में वापसी की. उन्होंने 'स्मार्ट जोड़ी' जैसे कई पॉपुलर टीवी शोज और रियलिटी प्रोग्राम्स में हिस्सा लिया. आज भाग्यश्री न सिर्फ डिजिटल स्पेस में एक कामयाब लाइफस्टाइल और न्यूट्रिशन एक्सपर्ट के तौर पर सक्रिय हैं, बल्कि वे कंगना रनौत की 'थलाइवी' और प्रभास की 'राधे श्याम' जैसी कई बड़ी फिल्मों में भी दमदार कैरेक्टर रोल्स निभाकर बड़े पर्दे पर अपनी दूसरी पारी खेल रही हैं.

सालों बाद फिल्मों में दोबारा सक्रिय हुईं भाग्यश्री आज एक पॉपुलर सेलिब्रिटी और फिटनेस इन्फ्लुएंसर हैं. लेकिन अतीत में अपनी मर्जी से शादी करने के लिए जिस राजपरिवार से उन्होंने दूरी बनाई थी, आज उसी परिवार की विरासत, संपत्ति और मंदिर की परंपराओं के केंद्र में वह दोबारा खड़ी हैं. पिता द्वारा गोद लिए बेटे को ही एकमात्र उत्तराधिकारी घोषित किए जाने के बाद, अब देखना यह होगा कि बॉलीवुड की यह 'राजकुमारी' अपने कानूनी अधिकारों के लिए कोर्ट का रुख करती है या यह शाही घमासान यहीं थम जाता है.

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