Charchit Chehra: CJI सूर्यकांत के इस्तीफे तक क्यों नहीं जाना चाहते हैं राहुल गांधी? जानिए शानदार करियर के बावजूद कैसे आए विवादों में

रूपक प्रियदर्शी

• 12:10 PM • 14 Oct 2026

Charchit Chehra CJI Surya Kant: हरियाणा के गांव पेटवाड़ से देश के मुख्य न्यायाधीश बनने तक सूर्यकांत का सफर प्रेरक रहा है. 1984 में वकालत शुरू करने, जज रहते LLM में गोल्ड मेडल हासिल करने और अनुच्छेद 370 जैसे बड़े मामलों में भूमिका निभाने वाले CJI सूर्यकांत अब 'कॉकरोच' टिप्पणी और राहुल गांधी से जुड़े घटनाक्रम को लेकर चर्चा में हैं. जानिए पूरी कहानी.

Chief Justice Surya Kant Controversy
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देश की राजनीति में सरकार और विपक्ष के बीच आर-पार की लड़ाई पहली बार तो हो नहीं रही लेकिन इसकी चर्चा बहुत हो रही है. एक तरफ है शक्तिशाली सरकार तो दूसरी तरफ हैं घोषित रुप से कमजोर माने जाने वाले, बार-बार चुनाव हारने वाले राहुल गांधी जिनके कमबैक से लोग हैरान हैं. महीनों-सालों से राहुल-बीजेपी की जंग चल रही थी लेकिन इस जंग में कोई ऐसा स्पाइक नहीं था जिससे राजनीतिक भूकंप आ जाए. वो स्पाइक आया चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अदालत से. जैसा कि दावा किया जाता है कि उन्होंने ही भरी अदालत में बेरोजगारों को कॉकरोच बोला था. 

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चीफ जस्टिस ने कॉकरोच बोला लेकिन उसे पकड़ा राहुल गांधी या किसी विपक्षी नेता ने नहीं. उसे पकड़ा अमेरिका के बोस्टन में बैठे अभिजीत दिपके ने. सोशल मीडिया पर कॉकरोच मीम आंदोलन शुरू हुआ. देखते-देखते मीम भी पीछे छूट गया. एकदम प्योर राजनीतिक आंदोलन शुरू हुआ जिसने पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की बलि ली.आगे मामला मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तक पहुंचा और वहां से होते हुए वापस चीफ जस्टिस सूर्यकांत के सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा है. 

Law of Universal Gravitation कहता है कि पेड़ से टूटकर एपल जमीन पर गिरेगा लेकिन देश की राजनीति में Law of Universal Gravitation रिवर्स मोड में चल रहा है. जैसे एपल पेड़ से टूटा और जमीन से टकराकर वापस पेड़ पर लटक गया. वैसे ही चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अदालत से शुरू हुआ हंगामा लौटकर उनकी अदालत में पहुंच गया है. इसी से चर्चित चेहरा बने हैं चीफ जस्टिस सूर्यकांत. आइए विस्तार से जानते है पूरी कहानी.

कौन हैं CJI सूर्यकांत?

53 वें चीफ जस्टिस सूर्यकांत 24 नवंबर 2025 से 9 फरवरी 2027 तक यानी कुल 15 महीने अपने पद पर रहेंगे. आधे से ज्यादा कार्यकाल हो चुका. कोई नहीं जानता कि अगले तीन-चार महीने में उनके रिटायर होने तक देश की राजनीति में क्या कुछ होगा, जो होगा उसके छीटें उनके गिरेबां तक पहुंचेंगे या नहीं.  

सूर्यकांत विवादित हो रहे हैं लेकिन विवादित रहे नहीं. शानदार जर्नी रही है चीफ जस्टिस बनने तक. न किसी जज के घर पैदा हुए, न वकालत पारिवारिक विरासत में मिली. न विदेश जाकर बड़ी-बड़ी डिग्रियां हासिल की, न ऐशोआराम के साथ बचपन और जवानी निकाली. इंस्पायर करती है लाइफ जर्नी जो हरियाणा के हिसार जिले के मिडिल क्लास फैमिली से शुरू हुई. हरियाणा के हिसार जिले के गांव 'पेटवार' में जन्मे सूर्यकांत के पिता मदन गोपाल शर्मा  सरकारी स्कूल में संस्कृत के शिक्षक थे. उन्होंने रामायण का हरियाणवी में अनुवाद किया. जातिवाद को पीछे छोड़ने के लिए पिता ने अपने चारों बेटों ऋषिकांत, शिवकांत, देवकांत और सूर्यकांत के नाम के पीछे सरनेम की जगह 'कांत' लगाया ताकि उनकी पहचान जाति से परे हो.

भाई से किया वादा किया पूरा!

एक बेहद साधारण, ग्रामीण परिवेश से निकलकर, जहां खुली हवा, खेत और किताबों से उनका नाता था. हल चलाना, फसलों की देखभाल करना और मिट्टी से जुड़े रहकर मेहनत करना सीखा. उन्होंने बिना किसी गॉडफादर के देश के सबसे बड़े कोर्ट के हेड तक का सफर तय किया. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक जिस लड़के का नाम घरेलू नाम सूर्या था उसके घर में बिजली की किल्लत थी. शाम के बाद पढ़ने के लिए लालटेन ही आखिरी सहारा था. गांव के जिस सरकारी स्कूल से जस्टिस सूर्यकांत ने मैट्रिक किया, वहां बच्चों के बैठने के लिए कोई टेबल, कुर्सी या बेंच नहीं हुआ करती थी. 

कभी किसी दिन खेत में पसीने से लथपथ होकर अपने बड़े भाई ऋषिकांत से वादा किया कि एक दिन अपनी और परिवार की जिंदगी बदल दूंगा. सचमुच उन्होंने एक दिन ऐसा किया. परिवार के पहले लॉ ग्रेजुएट बने. जनवरी में चीफ जस्टिस बनने के बाद पहली बार अपने गांव पहुंचे तो पेटवाड़ रत्न अमर रहे और गांव का बेटा, देश का प्रधान न्यायाधीश के नारों से गूंज उठा.

पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट से CJI तक का सफर

सूर्यकांत ने हिसार के सरकारी स्कूल-कॉलेजों से ग्रेजुएशन तक पढ़ाई की. लॉ की डिग्री लेने महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी (MDU), रोहतक गए. वकालत की शुरुआत 1984 में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट से की. कुछ तो था नौजवान वकील सूर्यकांत में कि कानून पर मजबूत पकड़ बनाते गए. सन 2000 में महज 38 साल की उम्र में हरियाणा के सबसे युवा एडवोकेट जनरल बने. 2001 में सीनियर एडवोकेट का दर्जा मिला और फिर 2004 में केवल 42 साल में इस लायक माने गए कि बार से पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट के जज नियुक्त हुए. और प्रमोशन मिला तो हिमाचल हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने. मई 2019 में सुप्रीम कोर्ट के जज प्रमोट हुए और नवंबर 2025 को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया बन गए. 

2019 के बाद सुप्रीम कोर्ट के उन जजों में शामिल रहे जो देश की तकदीर बदलने वाले लगभग हर बड़े फैसले की संवैधानिक पीठ का हिस्सा रहे हैं, चाहे आर्टिकल 370 को हटाना हो, इलेक्टोरल बॉन्ड को असंवैधानिक घोषित करना हो या फिर राजद्रोह कानून पर रोक लगाना हो.

जज रहते हुए की LLM की पढ़ाई

जब 2004 में हाई कोर्ट जज बन चुके थे, तब भी उनके भीतर का छात्र मरा नहीं था. जज के पद पर रहते हुए और काम के भारी दबाव के बीच, उन्होंने आगे की पढ़ाई जारी रखने का फैसला किया. उन्होंने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के Distance Education से मास्टर ऑफ लॉ (LLM) में दाखिला लिया. 2011 में जब नतीजा आया, तो एक सिटिंग हाई कोर्ट जज ने पूरी यूनिवर्सिटी में फर्स्ट क्लास हासिल कर गोल्ड मेडल जीता.

केरल कांग्रेस ने ऐसा क्या किया पोस्ट?

कॉकरोच जनता पार्टी, राहुल गांधी, इंडिया ब्लॉक-ये सब मिलाकर ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा तो नहीं करा पाए लेकिन इस बीच कांग्रेस शासित केरल के ऑफिशियल पार्टी हैंडल से डिमांड उठ गई कि Dear Suryakant भी इस्तीफा दें क्योंकि उन्होंने कहा था कि Law and order not my domain. ये एकदम राहुल गांधी की पॉलिटिक्स से आउट ऑफ सिलेबस डिमांड थी. जैसे ही डिमांड उठी, कांग्रेस ने कुचल दिया. मंशा साफ है कि एक साथ इतने फ्रंट नहीं खोलना. ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लड़ाई चल रही है. सुप्रीम कोर्ट से विपक्ष को हजार शिकायतें हो सकती हैं लेकिन राहुल गांधी बहुत सावधान हैं कि इसे चीफ जस्टिस सूर्यकांत के इस्तीफे तक नहीं ले जाना.

वैसे राहुल गांधी ने ये मेडन रिकॉर्ड तो बना दिया कि देश के इतिहास में कोई पॉलिटिकल मार्च निकला जिसका गंतव्य सुप्रीम कोर्ट था. इस मार्च का ग्रैविटास राहुल के पीएम के घर धरना, आकाशवाणी भवन वाले धरना, जंतर मंतर प्रोटेस्ट से कहीं ज्यादा माना जा रहा है. बीजेपी की कृपा दृष्टि से राहुल गांधी पर इस समय ढेर सारे मुकदमे चल रहे हैं. पहली बार राहुल गांधी ने कोई केस फाइल किया सुप्रीम कोर्ट में जिसे राहुल गांधी वर्सेज यूनियन ऑफ इंडिया के नाम से जाना जाएगा.

CJI ने राहुल से कैसे टाली मुलाकात?

राहुल गांधी को ज्ञानेश कुमार से भी शिकायत नहीं. अगर सलाह माने तो अप्रूवल बनकर छूट जाएंगे ज्ञानेश कुमार. राहुल गांधी ने लड़ाई छेड़ी है बीजेपी, पीएम मोदी-अमित शाह से है. कोई चौखट नहीं छोड़ रहे जाकर शिकायत दर्ज कराने का. हालांकि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अलावा आज तक किसी ने उन्हें मिलने के लिए सम्मान से नहीं बुलाया. रार तो चीफ जस्टिस सूर्यकांत से भी पर्सनली मिलने की थी लेकिन संविधान में एक्सप्लेन सेपरेशन ऑफ पावर का हथियार इस्तेमाल करके किसी तरह शांति, अमन से राहुल गांधी से मुलाकात टाली. कहा कि सुप्रीम कोर्ट जंतर-मंतर नहीं है, यहां केवल न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही सुनवाई हो सकती है, हालांकि अदालत के दरवाजे हर नागरिक के लिए खुले हैं. 

विवादित चीफ बनते जा रहें CJI सूर्यकांत?

देश कुछ ऐसे मोड में है कि जैसे एक्सीडेंटली ज्ञानेश कुमार सबसे विवादित चीफ इलेक्शन कमिश्नर बने. वैसे ही न चाहते हुए चीफ जस्टिस सूर्यकांत सबसे विवादित चीफ जस्टिस बनते जा रहे हैं. कॉकरोच से मिली प्रसिद्धि, सुप्रीम कोर्ट से इंसाफ की खाली कटोरी लौटे विपक्ष कुछ न नहीं बोलकर चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अदालत के लिए बहुत कुछ बोल रहा है. देश के दिग्गज वकील और विपक्षी कैंप के नेता कपिल सिब्बल के मुंह से ऐसे नहीं निकला कि सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा नहीं रहा. सुप्रीम कोर्ट जा-जाकर थक गए हैं. 

नलसार के वो छात्र जिन्होंने डिग्री लेने के बाद किसी दिन चीफ जस्टिस के सामने वकील बनकर केस जीतने के लिए खड़ा होना है वो खुलेआम विरोध कर देते हैं कि चीफ जस्टिस सूर्यकांत से लॉ की डिग्री नहीं लेंगे. ऐसा नहीं कि उन्होंने रौब दिखाया कि चीफ जस्टिस हूं तो जो बोल दिया वो बोल दिया. कॉकरोच विवाद पर उन्होंने सफाई दी लेकिन सच कहा जाए तो उसे सुना नहीं गया. जब नलसार छात्रों को सबक सिखाने के लिए बार काउंसिल के चेयरमैन मनन मिश्रा ने चेताया कि उन्होंने उल्टे मनन मिश्रा को चेता दिया कि ये मामला मेरे और छात्रों के बीच का संवाद है, इसमें बीच में पड़ने का अधिकार BCI को किसने दिया?

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