पंजाब में 2027 में विधानसभा चुनाव होने है लेकिन उससे ठीक पहले कोठी, किरदार और कैरेक्टर को लेकर ऐसा घमासान छिड़ा है, जिसने चंडीगढ़ से लेकर दिल्ली तक राजनीति पारा मानों सौ के पार पहुंचा दिया है. इस पूरे बवंडर के सेंटर में है, गायत्री बिश्नोई. राजस्थान से निकलकर पंजाब की राजनीतिक गलियारों में तूफान लाने वाली 23 साल की इस Gen-Z महिला नेता ने वो खलबली मचाई कि विपक्ष के बड़े-बड़े धुरंधर भी हिल गए हैं. कांग्रेस के तेज तर्रार विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने जब गायत्री बिश्नोई का नाम दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया के साथ जोड़ा, तो पंजाब में मानहानि, पुलिस और महिला आयोग की ऐसी त्रिकोणीय एंट्री हुई कि ये मामला अब देश की सबसे बड़ी हेडलाइन बन चुका है. कौन हैं गायत्री बिश्नोई, जो इतनी कम उम्र में बनी हैं चर्चित चेहरा.
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कौन हैं गायत्री बिश्नोई?
गायत्री बिश्नोई राजस्थान के बाड़मेर जिले के भलेसर गांव की रहने वाली हैं. फौजी परिवार में जन्मी गायत्री के पिता बीराराम बिश्नोई 2006 में सूबेदार मेजर से रिटायर हुए. गांव से निकलकर कुछ बनने के लिए गायत्री जयपुर आईं. शायद ये गायत्री बिश्नोई की कुंडली में ही था कि गैर-राजनीति बैकग्राउंड से निकली लड़की जिसकी जिद्द थी माइक वाली पत्रकार बनने की लेकिन डेस्टनी ने माइक पर दहाड़ने वाली नेता बना दिया. जयपुर के महारानी कॉलेज से पढ़ाई और पत्रकारिता में डिप्लोमा करने के बाद गायत्री मुंबई चली गई. फिल्म प्रोडक्शन और नामी मीडिया शोज जैसे एमटीवी रोडीज में काम किया. लेकिन टीवी की चकाचौंध के बीच उनका मन हमेशा जमीन से जुड़ा रहा.
कैसे हुई थी आप में एंट्री?
जयपुर में पढ़ते हुए किसी एनजीओ के जरिए सामाजिक कामों में जुटी थीं. समाज सेवा के दौरान जब उन्होंने पंजाब और दिल्ली में आम आदमी पार्टी के शिक्षा और स्वास्थ्य मॉडल को देखा. अरविंद केजरीवाल के भाषणों को सुना, तो इतनी प्रभावित हुईं कि उन्होंने कैमरे वाली दुनिया छोड़कर सीधे राजनीति में उतरने का फैसला कर लिया. केजरीवाल की पढ़े-लिखे युवाओं को आगे लाने की नीति से प्रभावित होकर गायत्री 2022 के करीब आप में शामिल हुईं. आप में तरक्की तेज हुई. महज एक-डेढ़ साल के भीतर बेहद कम उम्र में गायत्री आम आदमी पार्टी की राजस्थान महिला मोर्चा की अध्यक्ष बनीं. उनके तेवरों ने केजरीवाल का ध्यान खींचा. अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान ने उन्हें पंजाब का सह-प्रभारी बना दिया. लेकिन किसे पता था कि पंजाब आते ही गायत्री की जिंदगी इस तरह बदल जाएगी.
आम आदमी पार्टी की नेता होने के नाते गायत्री बिश्नोई के निशाने पर हमेशा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र की बीजेपी सरकार रही है, जिन पर वे सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक चौतरफा हमले बोलती आई हैं. गायत्री अपने भाषणों में अक्सर यह दावा करती रही हैं कि राहुल गांधी और उनकी पार्टी जनता का भरोसा पूरी तरह खो चुकी है, और वे सिर्फ 'आप' के बढ़ते कद से डरे हुए हैं.
अचानक क्यों चर्चा में आई गायत्री बिश्नोई?
गायत्री बिश्नोई को फेमस, विवादित बनाया भुलत्थ सीट से कांग्रेस विधायक सुखपाल खैरा ने जो आप में भी रह चुके हैं. हालांकि गायत्री पर खैरा की नजर सीधे नहीं पड़ी. सुखपाल सिंह खैरा की नजर काफी समय से आप की टॉप लीडरशिप पर थी जो अरसे से दिल्ली छोड़कर पंजाब में टिके थे. अगला सवाल दौड़ा कि जब पंजाब में टिके तो रह कहां रहे थे. तब नजर में आया पंजाब के सरकारी बंगलों का अलॉटमेंट. खैरा इस बात की टोह ले रहे थे कि क्या पंजाब की जनता के पैसों से चलने वाली सरकारी कोठियों में दिल्ली या अन्य राज्यों के नेता बिना किसी संवैधानिक पद के रह रहे हैं?
इसी जांच-पड़ताल या कहें इनसाइड रेकी के दौरान खैरा को पता चला चंडीगढ़ के पॉश इलाके सेक्टर-39A की सरकारी कोठी नंबर 960 का जो पंजाब के मंत्री डॉ. रवजोत सिंह के नाम आवंटित है. खैरा ने अपनी इन्वेस्टिगेशन से पता लगाया कि मंत्री डॉ. रवजोत सिंह की कोठी में तो मनीष सिसोदिया रह रहे हैं जो दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम, केजरीवाल के करीबी और आप के नंबर 2 नेता हैं. और आगे इन्वेस्टिगेशन से पता चला कि 960 नंबर की कोठी में सिसोदिया ही नहीं, गायत्री बिश्नोई भी रह रही हैं अपने पिता के साथ. वहीं से सारा हंगामा खड़ा हुआ जिससे पंजाब में बड़े कोठी घोटाले का भी पर्दाफाश हुआ.
खैरा ने ऐसा क्या सवाल किया जिससे मचा बवाल?
इस पूरी कहानी का सबसे विवादित, सबसे तीखा और सनसनीखेज हिस्सा यही है, जहां राजनीति की लड़ाई 'कैरेक्टर' और 'निजी संबंधों' के कीचड़ में जा गिरी. कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने सिर्फ सरकारी बंगले पर अवैध कब्जे का आरोप नहीं लगाया, बल्कि उन्होंने सीधे सोशल मीडिया पर लिखा कि मनीष सिसोदिया के अवैध संबंधों और सरकारी आवास के गैर-कानूनी इस्तेमाल ने आप के बदलाव के दावों की पोल खोल दी है.
खैरा ने सवाल दाग दिया कि एक तरफ मनीष सिसोदिया की पत्नी दिल्ली में हैं, तो फिर वह चंडीगढ़ की कोठी नंबर 960 में इस 'दूसरी महिला के साथ क्यों और किस हैसियत से रह रहे हैं?' खैरा ने जो तस्वीरें सार्वजनिक की उसका इरादा मनीष सिसोदिया और गायत्री बिश्नोई के बीच कथित 'अवैध और नाजायज' रिश्ते होने की ओर इशारा करना ही रहा होगा. बात निकली तो ऐसे सबूत भी मिल गए कि गायत्री को राजस्थान में पंजाब पुलिस पुलिस प्रोटेक्शन दे रही थी.
गायत्री का पलटवार, दर्ज कराया मुकदमा
खैरा का आरोप थोड़ा बिलो द बेल्ट साबित हुआ. सुखपाल खैरा के इस निजी हमले पर गायत्री बिश्नोई ने जो पलटवार किया, उसने सोशल मीडिया पर आग लगा दी. यही वो अवैध संबंधों वाला एंगल था जिसने गायत्री बिश्नोई के सब्र का बांध तोड़ दिया और उन्होंने रोते-चिल्लाते हुए खैरा को "बेशर्म इंसान" कहा. उन्होंने साफ किया कि राजनीतिक दुश्मनी निकालने के लिए एक 23 साल की अविवाहित लड़की के चरित्र पर लांछन लगाना और उसे किसी की 'दूसरी औरत या तीसरी औरत' बताना राजनीति का सबसे निचला स्तर है.
गायत्री ने इसी 'अवैध संबंध' वाले अमर्यादित बयान को आधार बनाकर खैरा के खिलाफ महिला की अस्मिता और गरिमा को ठेस पहुंचाने के तहत क्रिमिनल केस और मानहानि का मुकदमा दर्ज करवाया .। गायत्री ने ऑन-कैमरा साबित किया कि वह कोठी नंबर 960 में नहीं, बल्कि बगल की कोठी नंबर 961 में रहती हैं, जो स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलवीर सिंह की है और उनके पिता के हार्ट के इलाज के चलते उन्हें वहां मानवीय आधार पर रुकने की जगह मिली है.
कानूनी पचड़े में फंस गए खैरा
गायत्री बिश्नोई ने केवल सफाई नहीं दी बल्कि सुखपाल खैरा के लिए अपने आरोपों के सबूत देने में असंभव कर दिया. पंजाब में आप की सरकार होना भी सुखपाल खैरा के लिए भारी पड़ा. पंजाब महिला आयोग की चेयरपर्सन राज लाली गिल ने Suo Motu लेते हुए पंजाब पुलिस के डीजीपी को खैरा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दे दिए. गायत्री बिश्नोई की लिखित शिकायत के बाद पुलिस खैरा पर आईटी एक्ट, महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली कड़ी धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज करने की तैयारी में है. ये वो धाराएं हैं जिनमें खैरा को कोर्ट से आसानी से जमानत भी नहीं मिलेगी. एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए गए आरोपों ने खैरा की मुश्किलें इतनी बढ़ा दी हैं कि उन पर गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है. कानूनी चक्रव्यूह में बुरी तरह फंस गए हैं. आज कल में गिरफ्तारी भी हो जाए तो किसी को हैरानी नहीं होगी.
गायत्री से खाली करवाया गया कोठी नंबर 961
दिल्ली में केजरीवाल के शीशमहल पर सरकार गंवाने वाली आप बेहद फूंक-फूंककर चल रही है. खैरा दहाड़ रहे हैं और उनका जवाब गायत्री ही दे रही है. अरविंद केजरीवाल और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने रणनीतिक चुप्पी साध रखी है. आप प्रवक्ताओं ने मीडिया बाइट देने में कतई लाइन नहीं लगाई है. पॉलिसी है कुछ बोलो ही मत. दिल्ली के शीशमहल विवाद की तरह पंजाब के सरकारी बंगलों पर भी कोई परमानेंट नैरेटिव सेट हो. सुखपाल खैरा खुद भले फंस गए हों लेकिन उनके आरोपों का असर ये हुआ कि पंजाब सरकार ने डैमेज कंट्रोल करते हुए कोठी नंबर 961 गायत्री बिश्नोई से खाली करवा लिया है. हालांकि खैरा ने बगल वाली 960 नंबर की कोठी में सिसोदिया के साथ रहने का आरोप लगाया था.
कांग्रेस क्यों है चुपचाप?
कांग्रेस अलग परेशान हुई. सिसोदिया-गायत्री पर छींटें की कहानी कुछ इस तरह पलटी मारकर महिला के सम्मान की ओर घूम गई है. कांग्रेस ने भी खैरा से थोड़ा डिस्टेंस मेनटेन किया है ताकि अगर मामला महिला अस्मिता से जुड़ा तो पार्टी को बैकफुट पर आना पड़ेगा. सुखपाल खैरा गायत्री बिश्नोई के चक्रव्यूह से फंस गए हैं. सवाल ये है कि क्या 23 साल की गायत्री बिश्नोई पंजाब की राजनीति के इस 'पुराने मगरमच्छ' का शिकार कर ले जाएंगी. पंजाब चुनाव से ठीक पहले यह 'कोठी और कैरेक्टर' का विवाद कई बड़े नेताओं का राजनीतिक करियर दांव पर लगा चुका है.
गायत्री बिश्नोई ने अपने वीडियो में सिर्फ अपना बचाव नहीं किया, बल्कि सुखपाल सिंह खैरा को ही दागी घोषित कर दिया. गायत्री ने दहाड़ते हुए कहा, 'खैरा, तेरा खुद का कैरेक्टर पूरा पंजाब जानता है, तू जेल की हवा खाकर आया है.' दरअसल, गायत्री का इशारा खैरा के साल 2015 के इंटरनेशनल ड्रग स्मगलिंग और मनी लॉन्ड्रिंग केस की तरफ था, जिसमें ईडी (ED) और पंजाब पुलिस ने खैरा को गिरफ्तार कर जेल भेजा था. गायत्री ने सीधे खैरा के इसी 'दागी' अतीत को ढाल बनाकर उन्हें पंजाब का सबसे बड़ा महिला-विरोधी चेहरा घोषित कर रही हैं. आप के डैमेज कंट्रोल से पहले डबल अटैक शुरू हो चुका है. विपक्षी शिरोमणि अकाली दल और बीजेपी को बैठे-बिठाए बड़ा मुद्दा मिल गया है.
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