Charchit Chehra: 'फेल्ड, स्टुपिड, भूखे-नंगे' बोल कंगना रनौत ने अब किसे ललकारा? जानिए उनके बॉलुवीड क्वीन से सांसद बनने तक की पूरी कहानी

रूपक प्रियदर्शी

• 12:17 PM • 26 Aug 2026

Charchit Chehra Kangana Ranaut: कंगना रनौत ने 'फेल्ड, स्टुपिड, भूखे-नंगे' कहकर नए विवाद को जन्म दिया है. जानिए हिमाचल के छोटे से शहर से बॉलीवुड की क्वीन बनने और फिर मंडी से सांसद बनने तक का उनका सफर, परिवार, एक्टिंग करियर, नेशनल अवॉर्ड, बीजेपी में एंट्री और विवादों की पूरी कहानी.

Kangana Ranaut
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कंगना रनौत देश की ऐसी एक सेलिब्रिटी हैं जो स्टारडम के बैकग्राउंड से राजनीति में आईं और संसद से सड़क तक छा गईं. कोई कंगना को पसंद करें या नापसंद लेकिन उनकी कहानी किसी बनी-बनाई लीक पर चलने की नहीं, बल्कि अपने लिए एक नई राह खुद बनाने की जिद है. कंगना फेमस एक्ट्रेस बनीं अपनी एक्टिंग के दम पर लेकिन एक्टिंग से पॉलिटिकल ट्रांसफॉर्मेशन किया बोल-बोलकर. जो पसंद नहीं आया उसे कंगना ने छोड़ा नहीं. उद्धव ठाकरे से लड़ीं अपने दफ्तर के लिए, राहुल गांधी से भिड़ीं मोदी भक्ति के लिए. कंगना रनौत ने जिस मुकाम को पाया वो सबके बस का नहीं. ऐसा इसलिए भी कि उन्होंने अपनी यूएसपी ही ये बनाई कि कभी डिफेंसिव नहीं होना. कंगना आज भी डिफेंसिव नहीं हैं. 

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जिस Gen Z को लेकर पार्टी पूरी एहतियात बरतती रही उसे कंगना ने गटर जनरेशन बोलकर धमाका कर दिया. जंतर मंतर प्रोटेस्ट कब का खत्म हो गया लेकिन गटर जेनरेशन बोलने के कारण आज तक कंगना को गालियां पड़ रही हैं. पिछले हफ्ते-दस दिन में ही बाबा रामदेव, सोनू सूद, आशुतोष राणा,राखी सावंत, तापसी पन्नू जैसे सेलिब्रिटी से कंगना की नई लड़ाइयां छिड़ी हैं. चर्चित चेहरा के इस एपिसोड में जानेंगे कंगना रनौत की पूरी कहानी.

गटर जेनरेशन वाला बयान और शुरू हुआ विवाद!

कंगना ने Gen Z को गटर जेनरेशन कहा तो बहुतों को नागवार गुजरा. योग गुरु बाबा रामदेव भी राइट विंग के हैं लेकिन उन्हें भी कंगना की सोच विकृत लगी. कंगना ने उनसे कह दिया मेरे बेडरूम के सपने न देखें. आशुतोष राणा ने कंगना का नाम नहीं लिया, बस इतना कहा कि सिंह गरजता है और कुत्ता भौंकता है, हर जीव अपने सुर से पहचाना जाता है. इसे भी कंगना ने खुद पर हमला माना. तापसी पन्नू ने कंगना की परवरिश और बात करने के तरीके पर तंज कसा, तो कंगना का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया. कह दिया कि बी ग्रेड की सस्ती कॉपी. ये सारे वो लोग हैं जो कम से कम बीजेपी के खिलाफ नहीं माने जाते. फिर निकला कंगना की तरकश से एक लाइन का तीर अगर आप मेरे बराबर एक 1% भी सफलता हासिल नहीं किए हैं तो मैं आपका कोई ज्ञान नहीं सुनूंगी. पहले आप कंगना रनौत बनकर दिखाए. फेल्ड, स्टुपिड और भूखे नंगे लोगों की मैं कोई सलाह नहीं लूंगी. 

कंगना का फैमिली बैकग्राउंड

अगर कंगना कहती हैं कि पहले कंगना बनकर दिखाओ तो इसके पीछे उनका अतीत की कामयाबियां हैं जो उन्होंने अकेले दम हासिल की. हिमाचल प्रदेश के मिडिल क्लास परिवार से निकलकर देश की बड़ी फिल्म स्टार और फिर संसद तक पहुंचने का उनका सफर कड़े संघर्ष, विद्रोह और मजबूत इरादों से भरा है. कंगना रनौत की कहानी हुई 23 मार्च 1987 को, जब हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के भांभला में जन्म हुआ. पिता अमरदीप रनौत बिजनेसमैन हैं और मां आशा रनौत स्कूल टीचर रहीं. कंगना जिस परिवार से निकलकर एक्ट्रेस बनीं उस परिवार की जड़ें राजनीति में थी. उनके परदादा सरजू सिंह रनौत हिमाचल विधानसभा के विधायक रहे. दादा IAS थे. बड़ी बहन रंगोली और छोटे भाई अक्षत के साथ कंगना का बचपन पहाड़ों में सख्त पारिवारिक अनुशासन वाली आबोहवा में बीता.

डॉक्टर बनने के लिया था साइंस, लेकिन फिर आया टर्निंग पॉइंट

खानदान में सब अलग-अलग प्रोफेशन में थे. पिता ने बेटी कंगना के लिए अलग सपना देखा डॉक्टर बनाने का. स्कूलिंग के लिए  मंडी के हिल्स एंट एम्स्टर्डम स्कूल में एडमिशन कराया. आगे की पढ़ाई के लिए चंडीगढ़ डीएवी स्कूल भेजा. डॉक्टर बनने के लिए कंगना ने भी साइंस स्ट्रीम चुनी भी, लेकिन मन किताबों से ज्यादा आर्ट और आजादी की तरफ भागता था. टर्निंग पॉइंट तब आया जब 12वीं में केमिस्ट्री के यूनिट टेस्ट में फेल हुईं. उस एक असफलता ने कंगना के भीतर के विद्रोही को जगा दिया. कंगना ने ठान लिया कि वो मेडिकल की पढ़ाई नहीं करने वाली. परिवार ने शादी के लिए प्रेशर बनाना शुरू किया तब उन्होंने साहसिक कदम उठाते हुए बिना पैसों, बिना किसी सहारे घर छोड़कर दिल्ली आ गईं. पिता इतने नाराज हुए कि उनसे सारे रिश्ते तोड़ लिए. आर्थिक मदद भी बंद कर दी.

एक्टिंग में कैसे आई कंगना रनौत?

दिल्ली में उन्हें मॉडलिंग असाइनमेंट मिलने लगे. तब जागा अंदर का आर्टिस्ट. कंगना ने ठान लिया कि मॉडलिंग उनके लिए नहीं है. वो तो एक्टिंग के लिए बनी हैं. दिल्ली के मशहूर अस्मिता थिएटर ग्रुप से जुड़ीं. बड़े थिएटर डायरेक्टर अरविंद गौर ने उनकी एक्टिंग स्किल्स निखारनी शुरू की. थियेटर ने कंगना को सेल्फ कॉन्फिडेंस दिया. अगला डेस्टिनेशन था मुंबई. 

एस्पायरिंग एक्टर्स के लिए मुंबई की शुरूआती जिंदगी हमेशा खौफनाक और तंगी से भरी रही. उस दुनिया में कंगना ने भी कदम रख दिए. एक अनजान शहर में बिना किसी सपोर्ट के कंगना चल पड़ीं अपने सपने पूरे करने. किस्मत ने तब पलटी मारी जब फिल्ममेकर अनुराग बसु ने उन्हें मुंबई के लोखंडवाला के किसी कैफे में देखा. अपकमिंग सस्पेंस-थ्रिलर फिल्म के लिए ऑडिशन देने को कहा. यूनिक लुक्स, कर्ली हेयर्स-कुछ तो था कंगना में कि बसु को भा गईं. तब उम्र मुश्किल से 17-18 साल रही होगी. बसु के रेकमेंडेशन पर महेश भट्ट ने गैंगस्टर में कास्ट किया और कंगना की गाड़ी चल पड़ी.

कंगना का सक्सेसफुल करियर

शाइनी आहूजा के साथ गैंगस्टर ब्लॉकबस्टर रही. कंगना के कर्ली हेयर्स, और इंटेंस एक्टिंग ने पूरी इंडस्ट्री को हिलाकर रख दिया. फिर कंगना ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. इंडस्ट्री में जमने की रही-सही कसर 2008 की फिल्म फैशन ने पूरी कर दी. उस दौर में प्रियंका चोपड़ा के सितारे बुलंदी पर थी. प्रियंका के रहते कंगना फैशन में छा गईं. करियर का पहला नेशनल अवॉर्ड भी मिला. 

2011 में तनु वेड्स मनु और 2014 में आई क्वीन ने हिंदी सिनेमा का इतिहास बदल दिया. बिना किसी खान-कपूर या बड़े गॉडफादर के सहारे, कंगना ने अकेले अपने कंधे पर फिल्में हिट कराईं और 'बॉलीवुड की क्वीन' का खिताब हासिल किया. अपने बेमिसाल अभिनय के दम पर उन्होंने 4-4 नेशनल फिल्म अवॉर्ड और पद्मश्री हासिल किया. इतने कम वक्त में इतनी कामयाबी हर किसी के नसीब में नहीं होती. कंगना को ये सब मिला लेकिन उन्होंने कुछ अलग तरीके से कैरी किया.

सुशांत सिंह राजपूत की मौत और कंगना की पॉलिटकल एंट्री

बॉलीवुड के स्थापित प्रोडक्शन हाउसेस की मोनोपॉली और मूवी माफिया को खत्म करने के लिए खुद प्रोडक्शन कंपनी मणिकर्णिका फिल्म्स खड़ी कर दी. इरादा था ऐसी फिल्में बनाना जो बिना किसी डर के बोल्ड या लीक से हटकर सब्जेक्ट को उठा सकें, जिन पर बाकी फिल्ममेकर्स बात करने से कतराते हैं. एक इरादा ये भी कि अपनी कंपनी के जरिए उनकी एक्टिंग का करियर चलता रहे. जून 2020 में एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की रहस्यमयी मौत ने न जाने क्यों कंगना को हिला दिया. उन्होंने बॉलीवुड के नेपोटिज्म और मूवी माफिया के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. 

उसी समय से कंगना की राजनीति शुरू हुई. कंगना ने महाराष्ट्र की तत्कालीन उद्धव ठाकरे सरकार और मुंबई पुलिस को टारगेट पर ले लिया. उद्धव सरकार से कंगना का विवाद तब और उग्र हो गया जब कंगना ने ट्वीट कर दिया कि शिवसेना के नेताओं की धमकियों के कारण मुंबई में डर लगता है. शहर अब उन्हें पीओके जैसा महसूस होने लगा है.

उद्धव ठाकरे को कंगना ने क्यों दिया था श्राप?

शिवसेना से खुली जंग का बदला कंगना ने ऐसे चुकाया कि बीएमसी ने अवैध निर्माण के आरोप में पाली हिल का मणिकर्णिका फिल्म्स का दफ्तर डिमोलिश कर दिया. बुलडोजर चलने के बाद कंगना ने वीडियो जारी करके श्राप दिया कि उद्धव ठाकरे, आज मेरा घर टूटा है, कल तेरा घमंड टूटेगा. यह वक्त का पहिया है, याद रखना, हमेशा एक जैसा नहीं रहता. 2022 में जब उद्धव ठाकरे की सरकार गिरी और पार्टी टूटी तो कहा गया कि कंगना का श्राप सच हो गया. 

तब कंगना अकेली पड़ती गईं. इंडस्ट्री को दुश्मन बना चुकी थीं लेकिन उन्हें सपोर्ट मिलने लगा बीजेपी और समर्थकों का. शायद कंगना को एहसास होना शुरू हुआ कि फिल्म माफिया और विरोधी राजनीतिक ताकतों से अकेले लड़ने के लिए उन्हें एक मजबूत राजनीतिक संगठन के सहारे की जरूरत है. 

कंगना की बीजेपी में एंट्री

उस दौर में देश में बीजेपी की राजनीति पीक पर थी. बोलती-बोलती कंगना वही सब बोलने लगीं जो राष्ट्रवाद, सनातन धर्म, राहुल गांधी, अयोध्या, कश्मीरी पंडित जैसे मुद्दों पर राइट विंग पॉलिटिक्स बीजेपी की लाइन थी. कंगना रनौत का बीजेपी की ओर झुकाव कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था. जैसे-जैसे करियर में मोड़ आए, जैसे-जैसे राजनीतिक टकराव हुए, कंगना बीजेपी की नजरों में आने लगीं. उस वैचारिक दौर में कंगना ने पकड़ लिया कि अगर बीजेपी में आना है तो पीएम मोदी को पकड़ना होगा, राहुल गांधी को निशाने पर लेना होगा. 

बॉलीवुड के बड़े सितारे प्रो मोदी तो रहे लेकिन खुलकर मोदी नाम की उतनी तपस्या किसी ने नहीं की जितनी कंगना ने करनी शुरू की. बीजेपी में कंगना ने एंटी राहुल जो स्टांस लिया उससे आगे कोई टिक नहीं पाया. 2024 के चुनावों में कंगना को तपस्या का बंपर फल मिला. मंडी से बीजेपी ने लोकसभा टिकट दे दिया. कभी घर से भागी कंगना घर लौटकर सांसद का चुनाव जीतकर दिल्ली लौटीं.

कंगना का विवादों से पूरा नाता!

वहां से एक और नई कंगना ने जन्म लिया. बोलने में कभी संकोच नहीं करने वाली कंगना ने बोल-बोलकर पार्टी को असहज करना शुरू किया. बीजेपी को रिटन में बताना पड़ा कि कंगना रनौत के विचार पार्टी के नहीं हैं. लेकिन कंगना न तब रूकी, न आज रूकीं. आगे बीजेपी ने भी उनके विचारों से खुद को अलग करना छोड़ दिया. पहला कांड था किसान आंदोलन जिसके लिए कंगना बोली कि वहां तो लाशें लटक रही थीं और वहां रेप हो रहे थे. इसी किसान आंदोलन को लेकर 2020 में बोल चुकी थी कि एक बुजुर्ग महिला किसान की तस्वीर शेयर करते हुए ट्वीट किया था कि ऐसी दादियां 100-100 रुपये में प्रदर्शनों में शामिल होने के लिए मिल जाती हैं. उसी बयान के लिए चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर CISF की महिला कांस्टेबल कुलविंदर कौर ने थप्पड़ मारा था.

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Gen Z को "गटर जेनरेशन" वाले बयान पर बॉलीवुड एक्टर सोनू सूद ने कंगना रनौत को दे दी नसीहत !