Charchit Chehra: जनर्लिजम से की करियर की शुरुआत फिर बनी CJP आंदोलन की बैकबोन! जानिए कौन हैं रत्ना सिंह जिनकी इंटरनेट पर हो रही भारी सर्चिंग?

रूपक प्रियदर्शी

• 11:49 AM • 31 Jul 2026

Ratna Singh Profile: जंतर-मंतर छात्र आंदोलन के बाद CJP की प्रवक्ता रत्ना सिंह लगातार चर्चा में बनी हुई हैं. उनकी भूमिका, करियर, वायरल विवाद और निजी जिंदगी को लेकर इंटरनेट पर सर्च तेजी से बढ़ रही है. जानिए कौन हैं रत्ना सिंह, कैसे लीगल जर्नलिज्म से वकालत तक का सफर तय कर वह CJP आंदोलन का अहम चेहरा बनीं.

Ratna Singh Profile
Ratna Singh Profile
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जंतर-मंतर पर शुरू हुआ एक ऐसा छात्र आंदोलन, जिसने देश की सरकार हिला दी. जिस सरकार में इस्तीफे नहीं होते थे उसके शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा करा दिया. और ये सब किया कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP ने. अभिजीत दिपके, सौरव दास, आशुतोष रांका- ये सब बीजेपी, मोदी सरकार के खिलाफ नेशनल वॉयस और स्टार बन चुके हैं. इसी बीच रत्ना सिंह लाइमलाइट में तब आईं जब उन्होंने कॉकरोच के आंदोलनकारियों को पुलिस से बचाने का जिम्मा संभाला. आंदोलन खत्म हो चुका लेकिन रत्ना सिंह की चर्चा अलग-अलग कारणों से खत्म नहीं हो रही.

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सोशल मीडिया से लेकर टीवी स्क्रीन तक छाईं रत्ना सिंह आखिर है कौन? कैसे एक पूर्व लीगल जर्नलिस्ट और वकील इस बड़े आंदोलन की बैकबोन बन गई? खोजी पत्रकार सौरव दास और CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके से उनका क्या कनेक्शन है? और वो आंदोलन जो युवाओं के हक के लिए खड़ा हुआ था, वो अब अपनी ही 'इस्तीफा पार्टी' और रत्ना सिंह की चुप्पी के चलते विवादों के भंवर में क्यों फंस गया है? आज चर्चित चेहरा में जानेंगे रत्ना सिंह की लाइफ जर्नी से लेकर उनके विवादों तक की पूरी कहानी.

इंटरनेट पर हो रही खूब सर्चिंग!

रत्ना सिंह की पर्सनल लाइफ को लेकर इन दिनों इंटरनेट पर सर्चिंग आसमान छू रही है. सर्च किया जा रहा है Who is Ratna Singh CJP, Ratna Singh and Saurav Das relation,  Ratna Singh husband name आदि, आदि. बहुत सारे लोग बायोग्राफी के साथ ये जानने को बेताब है कि आंदोलन की इस पोस्टर गर्ल की लव लाइफ या शादी की क्या कहानी है? मीडिया और राजनीतिक गलियारों में CJP के प्रवक्ता और पत्रकार सौरव दास के साथ उनकी ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री, लंबी रणनीतिक मुलाकातों और गहरी बॉन्डिंग को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं और लव स्टोरी के कयास लगाए जा रहे हैं. 

सोशल मीडिया पर दोनों की तस्वीरों को लेकर गॉसिप्स का बाजार गर्म है लेकिन जब भी मीडिया या इंटरव्यूज में उनसे उनकी शादी या निजी जिंदगी पर सवाल किया जाता है, तो रत्ना सिंह बेहद चालाकी से मुस्कुराकर 'नो कमेंट्स' कह देती हैं. हालांकि रत्ना फिलहाल सिंगल हैं. कहती हैं जंतर-मंतर के आंदोलन ने उन्हें जो Thick Skin दी है, उसकी वजह से वे इन पर्सनल अफवाहों पर ध्यान देने के बजाय अपने लीगल करियर और युवाओं के अधिकारों की लड़ाई पर ही फोकस रखना चाहती हैं.

कौन हैं रत्ना सिंह?

रत्ना सिंह सीजेपी की पढ़ी-लिखी फेस हैं. द प्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक रत्ना दिल्ली की गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ लॉ एंड लीगल स्टडीज' से लॉ ग्रेजुएट हैं. लॉ की डिग्री हासिल करने के बाद, रत्ना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत लीगल जर्नलिज्म से की. उन्होंने सबसे पहले देश के नामी ल़ॉ पोर्टल बार एंड बेंच के साथ काम किया, जहां उन्होंने सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट्स की रिपोर्टिंग की. आगे स्क्रॉल.इन में भी लीगल कॉरेस्पोंडेंट बनी.

पत्रकारिता में लगभग पांच साल का लंबा समय बिताने के बाद, रत्ना सिंह ने एक बड़ा फैसला लिया. उन्होंने न्यूजरूम छोड़ने और वकालत  में कदम रखने का मन बनाया. इस बड़े बदलाव की घोषणा करते हुए उन्होंने खुद लिखा था कि 'वे सालों तक कानूनी प्रणाली को बाहर से रिपोर्ट करने के बाद आखिरकार अपनी लॉ की डिग्री का सही और जमीनी इस्तेमाल करना चाहती हैं.' 

रत्ना सिंह की लाइफ का टर्निंग पॉइंट?

रत्ना सिंह की लाइफ जर्नी में यही सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट आया जब उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन में शामिल होने का फैसला किया. CJP आंदोलन में कूदने से पहले, रत्ना सिंह एक लीगल जर्नलिस्ट के रूप में एक नामी डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए काम कर रही थीं. एक दिन ठान लिया कि लॉ डिग्री को सही मायने में इस्तेमाल करने का वक्त आ गया है. उन्होंने पत्रकारिता छोड़ी और एक फुल-टाइम प्रैक्टिसिंग वकील बन गईं. यही वो अनूठा अनुभव था जिसने उन्हें CJP का सबसे कीमती मोहरा बना दिया. जहां आंदोलन के बाकी नेता अभिजीत दिपके या आशुतोष रांका रणनीतियां बना रहे थे, वहीं रत्ना सिंह ने अपनी पत्रकारिता की समझ और कानून की बारीकियों का इस्तेमाल कर बिहार से लेकर बंगाल तक हिरासत में लिए गए छात्रों के लिए कानूनी ढाल तैयार की.

रत्ना सिंह कैसे बनी आंदोलन की बैकबोन?

CJP की शुरुआत एक सटायर के रूप में संस्थापक अभिजीत दिपके ने की थी, जो बाद में एक बड़े जन-आंदोलन में बदल गया। भले ही रत्ना सिंह CJP के कई संस्थापक नेताओं के बाद इस संगठन से जुड़ी थीं, लेकिन वे बहुत जल्द इस आंदोलन का एक जरूरी हिस्सा बन गईं. आंदोलन के दूसरे बड़े चेहरे और खोजी पत्रकार सौरव दास के साथ रत्ना पहले ही दिल्ली में पत्रकार के तौर पर काम कर चुकी थीं. सौरव दास, अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका और रत्ना सिंह की इस चौकड़ी ने मिलकर CJP की कोर टीम बनाई. आगे रत्ना सिंह को CJP का प्रवक्ता बनाया गया. एक ओर जहां सौरव दास और आशुतोष रांका सरकार और मंत्रियों के साथ टेबल पर बातचीत की कमान संभाल रहे थे, वहीं रत्ना सिंह मीडिया को फेस करने और संगठन के कानूनी मामलों को देखने का सबसे अहम रोल निभा रही थीं. 

अगर अभिजीत दिपके इस आंदोलन के मुख्य आयोजक थे और आशुतोष रांका इसके नीति निर्माता (पॉलिसी आर्किटेक्ट), तो रत्ना सिंह इस पूरे आंदोलन की लीगल माइंड बन गईं. आंदोलन के कई अन्य नेताओं के विपरीत, जो छात्र राजनीति या किसी और फील्ड से आए, रत्ना सिंह का सीजेपी तक का सफर अदालतों के भीतर और बाहर- दोनों ही रूपों में भारत की कानूनी प्रणाली को समझने में बीते सालों के अनुभवों से तय हुआ था।

क्यों सुर्खियों में आई है रत्ना सिंह?

सफलता के शिखर पर पहुंचे इस आंदोलन में विवाद तब शुरू हुआ, जब शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद CJP की कोर टीम का दिल्ली के होटल में डांस और जश्न मनाते हुए वीडियो वायरल हो गया. रत्ना सिंह, सौरव दास भी उस पार्टी में डांस करते देखे गए. उन लोगों को मसाला मिल गया जिन्हें पहले दिन से सीजेपी का प्रोटेस्ट गले नहीं उतर रहा था. तीखे सवाल दागे जाने शुरू हुए कि एक तरफ पेपर लीक से परेशान होकर आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को अब तक मुआवजा नहीं मिला है, और दूसरी तरफ ये लोग फाइव-स्टार पार्टी कर रहे हैं.

मीडिया ने जब रत्ना सिंह से इस पर तीखे सवाल दागे, तो उन्होंने 'नो कमेंट' कहकर कन्नी काट ली. तब से सोशल मीडिया ट्रोलर्स के निशाने पर आ गईं. सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हुए जिसमें दावा किया गया कि ऐसे तीखे सवालों पर रत्ना सिंह पूरी तरह चुप रहीं. उनके इसी 'नो कमेंट' वाले रुख और कैमरे से मुंह फेरने की वीडियो क्लिपिंग्स को सोशल मीडिया पर वायरल है. ट्रोल आर्मी उन्हें 'फेक एक्टिविस्ट' और 'अवसरवादी' बताकर मीम्स के जरिए लगातार निशाना बना रही है.

आंदोलन खत्म होते ही निशाने पर आई रत्ना!

रत्ना सिंह और CJP समर्थकों ने पलटवार किया कि  उनके बयान का आधा और काट-छांट कर बनाया गया Trimmed Video चलाया, ताकि उनकी छवि खराब की जा सके. रत्ना सफाई देती रही कि वो कोई अय्याशी की पार्टी नहीं थी, बल्कि उन वालंटियर्स का एक गेट-टुगेदर था जिन्होंने दिल्ली की जानलेवा गर्मी में डेढ़ महीने तक जमीन पर खून-पसीना बहाया था. 

आंदोलन खत्म होने के बाद से ही रत्ना सिंह सोशल मीडिया ट्रोलर्स के निशाने पर हैं. CJP की इस 'पोस्टर गर्ल' ने अब एक और बड़ा खुलासा कर सनसनी फैला दी कि उन्हें सोशल मीडिया के डायरेक्ट मैसेजेस (DMs) में जान से मारने और गंभीर शारीरिक नुकसान पहुंचाने की खौफनाक धमकियां मिल रही हैं. उन्हें 'आंदोलनजीवी' और 'विदेशी फंडिंग' का हिस्सा बताकर बदनाम किया जा रहा है, जिससे उनकी सुरक्षा पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है. 

रत्ना सिंह का डिफेंस बना CJP के लिए टास्क!

CJP के कोर ग्रुप और समर्थकों का आरोप है कि यह रत्ना सिंह को मानसिक रूप से तोड़ने की एक सुनियोजित राजनीतिक साजिश है, ताकि भविष्य में वो छात्रों के हक में दोबारा आवाज न उठा सकें. सीजेपी ने जंतर मंतर से आंदोलन जीत तो लिया लेकिन अब रत्ना सिंह का डिफेंस अब सीजेपी का नया टास्क बन गया है. दिपके ने कहा 37 दिनों तक जंतर-मंतर पर सरकार की चूलें हिलाने वाले इस ऐतिहासिक छात्र आंदोलन की सफलता से घबराए लोग अब उनकी महिला प्रवक्ता को मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं. 

एक साधारण वकील और पत्रकार से लेकर जंतर-मंतर के ऐतिहासिक छात्र आंदोलन की कमान संभालने वाली रत्ना सिंह आज के युवाओं और खास तौर पर 'जेन-जी' की राजनीति का एक नया चेहरा बन चुकी हैं. आलोचनाएं, वायरल वीडियो, मीडिया के तीखे सवाल और धमकियों के बीच रत्ना का कहना है कि जंतर-मंतर के इस आंदोलन ने उन्हें बेहद मजबूत बना दिया है और वो पीछे हटने वाली नहीं हैं.

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