Charchit Chehra: 54 साल की उम्र में वृद्धाश्रम पहुंचे विनोद कांबली, जानिए सचिन के साथ करियर शुरू करने के बावजूद क्यों हुई ये हालत?

रूपक प्रियदर्शी

• 12:10 PM • 29 Sep 2026

Charchit Chehra Vinod Kambli: कभी सचिन तेंदुलकर के साथ क्रिकेट की दुनिया में कदम रखने वाले विनोद कांबली आज अपनी जिंदगी के बेहद मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं. 54 साल की उम्र में उनके ठाणे के एक वृद्धाश्रम में रहने का वीडियो सामने आने के बाद वह फिर चर्चा में हैं. जानिए सचिन तेंदुलकर के दोस्त विनोद कांबली के क्रिकेट करियर, रिश्तों, विवादों और मौजूदा जिंदगी की पूरी कहानी.

Vinod Kambli biography
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विनोद कांबली का जब भी जिक्र आता है, तो उनका नाम हमेशा सचिन तेंदुलकर से ही जुड़ता है. एक ही स्कूल, एक ही गुरु, एक ही क्रिकेट ग्राउंड से एक साथ करियर शुरू करने के बाद जहां सचिन तेंदुलकर क्रिकेट के भगवान, मास्टर ब्लास्टर और भारत रत्न बन गए लेकिन विनोद कांबली आज बेहद लाचार हालात में वृद्धाश्रम में दिन काट रहे हैं. विनोद कांबली की लाचारी और बदहाली ने उन्हें एक बार फिर से हेडलाइन बनाया हुआ है. एक ऐसा चर्चित चेहरा, जिसके पीछे छिपी है करियर की असफलता, तंगहाली, बेइंतहा दर्द. फिर भी प्यार की एक डोर है जो पकड़े हुए हैं विनोद कांबली कि ताकि वो और डगमगा न पाएं. चर्चित चेहरा एंड्रिया हेवले की जो Broken Love Story के बाद भी क्यों विनोद कांबली को छोड़ नहीं पाईं?

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अचानक कैसे चर्चा में आए विनोद कांबली?

सोशल मीडिया पर कांबली का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसे देखकर कोई भी दहल जाएगा. इंडियन क्रिकेट के स्टार रहे विनोद गणपत कांबली की लाचारी का ये वीडियो ठाणे के निदान एल्डरली केयर सेंटर यानी वृद्धाश्रम केयर होम का बताया जा रहा है. वायरल वीडियो में कांपते हाथों और लड़खड़ाती जुबान के साथ कांबली केयर होम की की सुख-सुविधाओं की तारीफ कर रहे हैं. कह रहे हैं कि उन्हें यहां घर जैसा महसूस होता है. 54 साल कोई उम्र नहीं होती वृद्धाश्रम जाने या केयर होम जाने की लेकिन विनोद कांबली की किस्मत उन्हें आज यहां तक ले आई. 

छिन्न-भिन्न हो चुका करियर, खत्म हो चुके पैसे, बिखरे हुए परिवार के साथ-साथ विनोद कांबली गंभीर न्यूरोलॉजिकल और शारीरिक दिक्कतों से जूझ रहे हैं. दावा है कि उनके दिमाग में ब्लड क्लॉट यानी खून का थक्का जमा है, जिसकी वजह से उनकी याददाश्त भी कमजोर हो चुकी है. ब्रेन स्ट्रोक का खतरा मंडरा रहा है. पिछले कुछ सालों में ऐसी कोई तस्वीर नहीं आई जिसमें विनोद बिना सहारे चलते या अपने कदम पर खड़े दिखे हों. 

विनोद की लत ने खराब किया सब?

इंसान सारी दुनिया के थपेड़े सह सकता है अगर परिवार, प्यार और अपने साथ हों. विनोद कांबली की जिंदगी में प्यार, शादी और परिवार के पन्ने कोरे तो नहीं रहे लेकिन कुछ चिथड़ों में बंटे धुंधले पड़ते गए. जितने ड्रामेटिक तरीके से विनोद का क्रिकेट करियर बना, फिर उसी तरह प्यार, शादियों और रिश्तों का उतार-चढ़ाव ड्रामेटिक और दर्दनाक रहा है. विनोद कांबली ने शादियां तो दो-दो की लेकिन जिंदगी में शामिल हुई दोनों ही महिलाओं की जिंदगी में कांबली अपने स्वभाव, लाइफस्टाइल और सबसे बढ़कर शराब की गंभीर लत सबसे बड़ा तूफान बनकर शामिल रहे.

नोएला से शादी, लेकिन ज्यादा समय टिक नहीं पाई!

विनोद कांबली की पहली शादी साल 1998 में नोएला लुईस से हुई थी. नोएला पुणे के बड़े होटल ब्लू डायमंड में रिसेप्शनिस्ट हुआ करती थी. उस समय तक विनोद के क्रिकेट करियर अच्छा समय जाना शुरू हो चुका था. कांबली का पहला डाउनफॉल तभी शुरू हुआ था. 1995 में कांबली की 23 साल की उम्र में टेस्ट करियर खत्म हो चुका था. किसी तरह वनडे टीम में वापसी का संघर्ष चल रहा था. 

लेट 90s में स्टार क्रिकेटर रहते विनोद कांबली पुणे के लक्जरी होटल होटल ब्लू डायमंड पहुंचे थे. तब नोएला होटल के फ्रंट डेस्क पर रिसेप्शनिस्ट हुआ करती थी. शायद नोएला को देखते कांबली दिल हार बैठे. पहले दोस्ती हुई जो प्यार तक पहुंची और फिर दोनों डेट करने लगे. डेट करते हुए विनोद कांबली करियर बचाने का स्ट्रगल कर रहे थे. 1998 में दोनों ने पुणे के सेंट पैट्रिक कैथेड्रल चर्च में ईसाई रीति-रिवाज से शादी कर ली. डेटिंग तक तो सब ठीक चला था लेकिन शादी के बाद रिलेशनशिप की उम्र घटने लगी. 

कांबली की लेट-नाइट पार्टियों, शराब पीने की आदत और करियर के ढलान के कारण उपजे गुस्से ने रिश्ते में जहर घोल दिया. तंग आकर नोएला ने खामोशी और गरिमा के साथ कांबली से तलाक ले लिया. तलाक के बाद नोएला ने मीडिया लाइमलाइट से खुद को पूरी तरह दूर कर लिया. नए सिरे से अपनी प्राइवेट लाइफ शुरू की. लौटकर कभी कांबली की जिंदगी में नहीं आईं.

2006 में रचाई थी दूसरी शादी

2000 में आखिरी इंटरनेशनल मैच खेलने के बाद कांबली समझ चुके थे कि टीम इंडिया के दरवाजे उनके लिए बंद हो चुके हैं. रीबर्थ के हिसाब से उन्होंने नए करियर में स्विच किया. क्रिकेट एक्सपर्ट और कॉमेंटेटर बनते हुए एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की तरफ मुड़े. 2006 के आसपास टीवी रियलिटी शोज और छोटे-मोटे एक्टिंग प्रोजेक्ट्स में हाथ आजमाना शुरू कर दिया था.

फिर एक और खूबसूरत हादसा हुआ जहां विनोद दूसरी बार दिल हार बैठे. अबकी बार फैशन मॉडल एंड्रिया हेविट से दिल लगा बैठे. मॉडल एंड्रिया हेविट ज्वेलरी ब्रांड तनिष्क बिल बोर्ड पर छा चुकी थीं. एंड्रिया कांबली को अच्छी लगीं. दोनों मिले, प्यार हुआ, डेटिंग की और 2006 में फिर एक दिन शादी कर दी. एंड्रिया के लिए कांबली का प्यार इतना दीवाना हुआ कि उन्होंने शादी के लिए ईसाई धर्म को अपना लिया. एंड्रिया और विनोद एक बेटा और एक बेटी के पेरेंट्स बने.

विनोद और एंड्रिया की शादी का अनोखा चैप्टर!

सेलिब्रिटी वर्ल्ड में विनोद कांबली और एंड्रिया हेविट के प्यार और शादी का अनोखा चैप्टर है. 2006 में विनोद और एंड्रिया ने सादगी से कोर्ट मैरिज की थी. विनोद कांबली को हमेशा अफसोस रहा कि एंड्रिया को ट्रेडिशनल गॉरजियस क्रिश्चियन वेडिंग गाउन गिफ्ट नहीं दे पाए. उस अधूरी हसरत को पूरा करने कोर्ट मैरिज के 8 साल बाद, 3 मई 2014 को मुंबई के बांद्रा के सेंट पीटर चर्च में रीति-रिवाज से दोबारा शादी रचाई. एंड्रिया सफेद वेडिंग गाउन में दोबारा विनोद की पत्नी बनीं. उस शादी में 4 साल का बेटा जीसस क्रिस्टियानो मां-पिता की शादी में बाराती बना. बच्चे की मौजूदगी में शादी दोहराने का ये पल एंड्रिया और कांबली की जिंदगी के सबसे खुशनुमा और यादगार पलों में शामिल हो गया. 

एंड्रिया से भी बिगड़ रिश्ते, लेकिन नहीं हो पाएं दूर!

कहा जाता है कि विनोद कांबली ने पहली शादी टूटने से कोई सबक नहीं सीखा. छूटा हुआ करियर वापस लौटा नहीं. शराब की लत भी नहीं छूट सकी. उस नशे ने घर का माहौल हिंसक बना दिया. फरवरी 2023 में बात इतनी बिगड़ गई कि नशे में कांबली ने एंड्रिया पर कुकिंग पैन फेंककर मारा, जिसके बाद एंड्रिया ने कांबली के खिलाफ घरेलू हिंसा का केस दर्ज कराया और तलाक मांग लिया. कांबली करीब 14 बार रिहैबिलिटेशन यानी नशा मुक्ति केंद्र भेजे गए लेकिन शायद बहुत देर हो गई. 

विनोद और एंड्रिया ने प्यार को दिल किया लेकिन शायद किस्मत को दोनों का सुकून मंजूर नहीं था. विनोद कांबली से तंग परेशान होकर भी एंड्रिया पूरी तरह अलग नहीं हुईं या यूं कहें कि अलग हो नहीं पाईं. कांबली की बदतर होती शारीरिक और मानसिक स्थिति को देखकर उन्होंने अलग होने का अपना फैसला पलट दिया. 

एंड्रिया ने पॉडकास्ट में किया था बड़ा खुलासा!

पॉडकास्ट इंटरव्यू में एंड्रिया हेविट ने खुलासा किया कि 2023 में कांबली से अलग होने का मन बना चुकी थीं, लेकिन कांबली की लाचारी देखकर कदम पीछे खींच लिए. एंड्रिया हेविट ने कहा मुझे एहसास हुआ कि अगर मैं उन्हें छोड़ दूंगी तो वो बिल्कुल बेसहारा और लाचार हो जाएंगे. वो इस समय एक छोटे बच्चे की तरह हैं, जिन्हें संभालना पड़ता है और ये स्थिति मुझे बहुत तकलीफ देती है. कई बार ऐसा हुआ जब मैं घर से दूर चली गई, लेकिन फिर मुझे उनकी चिंता सताने लगी कि उन्होंने खाना खाया या नहीं? वह ठीक से सोए हैं या नहीं? वह ठीक हैं या नहीं? तब मुझे समझ आया कि उन्हें मेरी जरूरत है. मैं तो किसी आम दोस्त को भी ऐसी हालत में न छोड़ूं, वह तो फिर भी मेरे पति हैं. एंड्रिया के उसी एक फैसले की वजह से आज भी एक पत्नी और केयरटेकर के रूप में कांबली का इलाज करा रही हैं और ठाणे के केयर सेंटर में उनके साथ खड़ी हैं.

विनोद कांबली की लाइफ जर्नी!

विनोद कांबली का जन्म 18 जनवरी 1972 को मुंबई के मिडिल क्लास परिवार में हुआ था. कांबली का बचपन मुंबई की तंग चालों में अभावों के बीच बीता. लेकिन उनकी किस्मत तब बदली जब उनकी मुलाकात शारदाश्रम विद्या मंदिर स्कूल में घुंघराले बालों वाले एक लड़के से हुई, जो सचिन तेंदुलकर थे. दोनों के गुरु एक ही थे, महान कोच रमाकांत आचरेकर. दोनों एक साथ लोकल ट्रेनों में सफर करते, एक ही वड़ा पाव बांटकर खाते और मैदान पर रनों का अंबार लगाते. साल 1988 में हैरिस शील्ड स्कूल टूर्नामेंट में इस जोड़ी ने 664 रनों की ऐतिहासिक और अटूट साझेदारी कर विश्व रिकॉर्ड बनाया, जिसमें कांबली ने अकेले नाबाद 349 रन ठोके थे. इस एक पारी ने दोनों को रातों-रात स्टार बना दिया.

विनोद कांबली ने 1991 में वनडे और 1993 में टेस्ट क्रिकेट में धमाकेदार एंट्री की. उन्होंने अपने शुरुआती 7 टेस्ट मैचों में ही दो दोहरे शतक और दो शतक जड़ दिए थे. उस दौर में कांबली का टेस्ट औसत 54.2 का था और वे सचिन से भी तेजी से रन बना रहे थे. स्पिनरों के खिलाफ उनके कदमों का इस्तेमाल और छक्के मारने की काबिलियत बेजोड़ थी. 17 टेस्ट मैचों में 1084 रन और 104 वनडे मैचों में 2487 रन उनके टैलेंट की गवाही देते हैं.

रफ्तार से बना करियर, उसी तरह डूबा भी!

कांबली जितनी तेजी से ऊपर चढ़े, उतनी ही तेजी से नीचे भी गिरे. जहां सचिन तेंदुलकर ने अनुशासन, कड़ी मेहनत और फोकस को अपना हथियार बनाया, वहीं कांबली चकाचौंध, लेट-नाइट पार्टियों, अनुशासनहीनता और शराब की लत के जाल में फंस गए. गेंदबाजों ने उनकी शॉर्ट-पिच गेंदों के खिलाफ कमजोरी को पकड़ लिया. खराब फॉर्म और खराब व्यवहार के कारण उन्हें टीम से अंदर-बाहर होना पड़ा. उन्होंने भारतीय टीम में कुल 9 बार कमबैक किया लेकिन खुद को संभाल नहीं पाए और महज 28 साल की उम्र में साल 2000 में उनका क्रिकेट करियर हमेशा के लिए खत्म हो गया.

कांबली की हालत के लिए क्या सचिन है जिम्मेदार?

करियर खत्म होने के बाद कांबली ने फिल्मों और राजनीति में हाथ आजमाया, लेकिन हर जगह नाकामी हाथ लगी. धीरे-धीरे उनकी जमापूंजी खत्म हो गई. स्थिति इतनी बदतर हो गई कि वे BCCI की मिलने वाली 30 हजार की मासिक पेंशन पर निर्भर हो गए. तंगहाली के बीच, 2009 में कांबली ने बयान दे दिया कि बुरे वक्त में उनके सबसे अच्छे दोस्त सचिन तेंदुलकर ने उनकी मदद नहीं की. इस बयान ने सालों पुरानी दोस्ती में गहरी दरार पैदा कर दी और सचिन उनसे दूर हो गए. हालांकि, बाद में कांबली ने खुद स्वीकारा कि सचिन ने हमेशा पर्दे के पीछे रहकर उनकी आर्थिक मदद की थी और उनकी दो बड़ी सर्जरियों का पूरा खर्च भी सचिन ने ही उठाया था. आज भी लोग कांबली की हालत देखकर सचिन को कोस ही देते हैं कि उन्होंने दोस्त की मदद नहीं की. सच क्या है ये सचिन और विनोद ही जानते होंगे.

जब दुनिया ने कांबली से मुंह मोड़ लिया, तब कुछ मदद के हाथ बढ़े. सुनील गावस्कर की चेम्प्स फाउंडेशन ने कांबली की  स्थिति को देखते हुए उन्हें जीवन भर के लिए हर महीने 30 हजार की आर्थिक सहायता और 30 हजार सालाना मेडिकल खर्च देने का जिम्मा उठाया. बीसीसीआई से मिलने वाली पेंशन उनका सहारा बनी. तमाम विवादों के बावजूद उनकी पत्नी एंड्रिया और उनका बेटा इस मुश्किल दौर में उनकी सेहत सुधारने के लिए लगातार रिहैब और मेडिकल सेंटर्स के चक्कर काट रहे हैं. 

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