देश के सिनेमाघरों में एक ही नाम का बारूद फट रहा है, रॉकिंग स्टार यश. KGF 2 के चार साल बाद जब ये सुल्तान पर्दे पर लौटा, तो बॉक्स ऑफिस के सारे रिकॉर्ड्स धुआं-धुआं हो गए. उनकी नई फिल्म टॉक्सिक ने सिनेमाघरों में रिलीज होते ही बंपर ओपनिंग का एक नया इतिहास लिख दिया है. पहले दिन की ओपनिंग ही 140 करोड़ प्लस की लगी. इस ऐतिहासिक कामयाबी के साथ ही शुरू हो चुका है विवादों, तकरार और तीखे सवालों का वो दौर, जिसने पूरी फिल्म इंडस्ट्री को हिलाकर रख दिया है. कैसे जेब में महज 300 लेकर घर से भागने वाला एक बस ड्राइवर का बेटा आज साउथ से लेकर बॉलीवुड तक का सबसे बड़ा सिकंदर बन चुका है. चर्चित चेहरा के इस खास एपिसोड में आज कहानी यश की.
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बचपन से ही सवार था एक्टिंग का भूत!
आज दुनिया जिसे बॉक्स ऑफिस के सुल्तान यश के नाम से जानती है, उसका असली नाम नवीन कुमार गौड़ा है, जिनका जन्म 8 जनवरी 1986 को कर्नाटक के हासन जिले के साधारण परिवार में हुआ था. उनके पिता अरुण कुमार बेंगलुरु में एक सरकारी बस BMTC के ड्राइवर थे और मां पुष्पा एक गृहिणी. यश का बचपन मैसूर में बीता, जहां एक आम बच्चे की तरह वे भी बड़े हुए, लेकिन स्कूल के दिनों से ही उनके सिर पर एक्टिंग और नाटकों का ऐसा भूत सवार था कि वो खुद को हमेशा सुपरस्टार ही समझते थे. घरवाले चाहते थे कि वे पढ़-लिखकर कोई नौकरी करें, लेकिन अपनी जिद के पक्के यश महज 16 साल की उम्र में जेब में सिर्फ 300 लेकर घर से बेंगलुरु भाग आए.
घर वालों ने ट्रेन से भागते नवीन को पकड़ लिया लेकिन लड़के ने एक मौका मांगकर परिवार को कदम पीछे करने के लिए मजबूर कर दिया. जब बेटा घर से भागा, तो पिता ने गुस्सा होने के बजाय उसे एक मौका दिया. यश जब कन्नड़ सिनेमा के बहुत बड़े स्टार बन गए, तब भी उनके पिता कई सालों तक गर्व से अपनी बस चलाते रहे. पिता के इसी उसूल ने यश को कभी जमीन से उठने नहीं दिया और उनके पैर हमेशा जमीन पर टिके रहे.
झाड़ू लगाने की थी शुरुआत
यश की कहानी शुरुआत हुई एक थिएटर ग्रुप से. उन्होंने मशहूर निर्देशक टी.एस. नागभरण के थिएटर ग्रुप 'बेनाका' में मंच के पीछे झाड़ू लगाने और कलाकारों को चाय पिलाने का काम किया, ताकि बस एक्टिंग को करीब से सीख सकें. टी.एस. नागभरण ही वो गुरु बने जिन्होंने 16 साल के लड़के को बेंगलुरु रेलवे स्टेशन पर खाली हाथ खड़ा देकर अपने साथ ले लिया और आगे चलकर करीने से तराशा.
एक दिन यश का धैर्य और उनकी मेहनत रंग लाई और उसे कन्नड़ टीवी सीरियल्स में छोटे-मोटे रोल मिलने शुरू हुए. टीवी की दुनिया ने ही नवीन गौड़ा को नया नाम दिया यश. कड़े संघर्ष के दम पर उन्होंने 2004 में कन्नड़ टीवी सीरियल नंदा गोकुला से अपने करियर की शुरुआत की.
यश और राधिका की लव-स्टोरी
उन्हीं दिनों यश की जिंदगी में राधिका पंडित की दस्तक हुई. पहली मुलाकात नंदा गोकुला के सेट पर हुई थी. तब राधिका यश से कहीं बड़ी स्टार थी. सेट पर मिलने और शूटिंग के दौरान दोनों एक-दूसरे के करीब आने लगे. राधिका यश के लिए लकी साबित हुईं. 2008 में जब यश ने अपनी पहली फिल्म मोगिना मनसु साइन की, तो इत्तेफाक से उसमें भी उनकी हीरोइन राधिका पंडित ही बनीं.
पर्दे पर उनकी केमिस्ट्री सुपरहिट रही और परदे के पीछे भी दोनों का प्यार परवान चढ़ने लगा. यश ने बेहद फिल्मी अंदाज में राधिका को प्रपोज किया था. उन्होंने वैलेंटाइन्स डे के दिन राधिका की कार में चुपके से एक कीमती तोहफा रख दिया था और फोन पर अपने दिल की बात कही थी. राधिका ने हां कहने में 6 महीने का वक्त लिया था. लगभग 10 साल तक रिश्ते को दुनिया की नजरों से पूरी तरह छुपा कर रखने के बाद, दोनों ने दिसंबर 2016 में शादी कर ली. राधिका ने यश के उस दौर में उनका हाथ थामा था जब यश के पास न तो नाम था और न ही पैसा. आज दो प्यारे बच्चों के माता-पिता बन चुका यह कपल देश की सबसे पसंदीदा जोड़ियों में से एक है.
कैसे बने यश रॉकिंग स्टार?
राधिका के साथ पहली फिल्म से पहले यश ने 2007 में फिल्म 'जम्बाडा हुडुगी' में छोटे रोल से हीरो बनने का सपना पूरा किया था. उसके बाद उन्होंने बैक-टू बैक लगातार 7-8 हिट फिल्में दीं. तभी कर्नाटक के रॉकिंग स्टार कहे जाने लगे यश लेकिन असली इतिहास लिखा जाना अभी बाकी था. अगर 70 और 80 के दशक में अमिताभ बच्चन ने समाज के सिस्टम के खिलाफ खड़े होकर पर्दे पर 'एंग्री यंग मैन' की इमेज बनाई तो आज के दौर में उसी विरासत को यश ने अपने रॉकी भाई और अब 'राया' के किरदारों से बिल्कुल नए और ग्लोबल अंदाज में जिंदा किया है.
2018 में निर्देशक प्रशांत नील के साथ मिलकर यश ने एक ऐसी बारूद की ढेरी तैयार की, जिसने कन्नड़ सिनेमा का नक्शा बदल दिया. यश कर्नाटक में स्टार तो थे, लेकिन उन्हें नेशनल और ग्लोबल लेवल पर रॉकिंग स्टार बनाने का विजन प्रशांत नील का था. प्रशांत ने यश की पर्सनैलिटी, उनकी वायस बेस और आंखों के गुस्से को भांप लिया. अगर प्रशांत नील ने कोयला खदान वाला KGF का सेट नहीं बनाए हुआ होता तो शायद भारत को उसका सबसे बड़ा एंग्री यंग मैन नहीं मिलता. KGF चैप्टर 1 और 2 में 'वायलेंस-वायलेंस-वायलेंस' का नारा लगाने वाले रॉकी भाई ने बॉक्स ऑफिस पर 1200 करोड़ से ज्यादा की सुनामी लाकर साउथ और बॉलीवुड की दीवार को हमेशा के लिए ढहा दिया. कन्नड़ का स्टार जितनी अपनी दुनिया में हिट हुआ उससे कहीं ज्यादा हिंदी बॉलीवुड ऑडियंस का प्यारा बना.
KGF के लिए नहीं बल्कि इसलिए यश ने रखा था लंबे बाल-दाढ़ी वाला लुक
यश कन्नड़ सिनेमा से आते हैं, जिसे कभी साउथ की सबसे छोटी और कम बजट वाली इंडस्ट्री माना जाता था. तमिल, तेलुगु फिल्मों के पीछे बहुत बड़ी और अमीर इंडस्ट्रीज का हाथ था, लेकिन यश ने अकेले दम पर एक छोटी सी इंडस्ट्री को उठाकर सीधे दुनिया के नक्शे पर ला खड़ा किया. यही बात उन्हें बाकी सारे स्टार्स से जुदा और बेहद अनोखा बनाती है.
लंबे एक तरफ झुके बाल और घनी दाढ़ी यश का आइकॉनिक लुक बन चुकी है. ये उस दौर का सिगनेचर है जब वो बड़ा बनने की कोशिश कर रहे थे लेकिन बन नहीं पा रहे थे. उन्होंने इंटरव्यू ने कहा कि जब नए-नए थिएटर में आए और जब कुछ बोलना चाहते तो सब उन्हें उम्र में छोटा कहकर चुप करा देते थे. बातों को गंभीरता से मनवाने और उम्र में थोड़ा बड़ा परिपक्व दिखने के लिए उन्होंने बाल-दाढ़ी बढ़ाने शुरू किए. जो धीरे-धीरे उनका सिग्नेचर स्टाइल बन गया. KGF 2 में डायरेक्टर ने यश को दाढ़ी कटवाने के लिए कहा तो उन्होंने ये कहकर मना कर दिया कि ये रॉकी भाई अवतार के फैंस से धोखा होगा. हालांकि, करीब एक दशक बाद टॉक्सिक में उन्होंने बाल-दाढी सरेंडर कर दिया. फिर भी साबित किया कि मस्कुलर एंग्रीमैन की पहचान केवल उसके चेहरे के बालों से नहीं, बल्कि उसकी दमदार एक्टिंग से होती है.
यश को क्यों कहा जाता है सिनेमा का सीईओ?
इंडस्ट्री के लोग यश को सिर्फ हायर किया गया एक्टर नहीं मानते. उन्हें सिनेमा का सीईओ कहा जाता है क्योंकि वो केवल एक्टिंग तक सीमित नहीं रहते. KGF के दौरान उन्होंने खुद निर्देशक प्रशांत नील के साथ बैठकर डायलॉग्स लिखे थे और स्क्रिप्टिंग प्रोसेस में शामिल थे. 'टॉक्सिक' में भी वे प्रोडक्शन से लेकर डिस्ट्रीब्यूशन तक के हर फैसले को खुद लीड कर रहे हैं. प्रशांत नील ने कई इंटरव्यूज में माना कि यश सिर्फ उनके हीरो नहीं, बल्कि उनके पहले ऑडियंस और को-राइटर थे. इंडस्ट्री मानती है कि यश के पास कमाल का 'बिजनेस माइंड' और 'सिनेमाई विजन' है. यश कोई ऐसे अभिनेता नहीं हैं जो सिर्फ डायरेक्टर का कहा मानकर सेट पर आएं और चले जाएं. वे फिल्म के जन्म से लेकर उसके पर्दे पर हिट होने तक, उसके खून-पसीने में शामिल रहते हैं. यही बात उन्हें दूसरों से अलग और फिल्म इंडस्ट्री का असली 'कैप्टन' बनाती है.
तेलुगू स्टार प्रभास बाहुबली के बाद से साउथ के पैन-इंडिया स्टार बने. माना जाता है कि उनकी फिल्में आज भी बिना प्रमोशन 100 करोड़ की ओपनिंग कर लेगी. यश अभी प्रभास से रेस में थोड़े पीछे हैं लेकिन अल्लू अर्जुन, जूनियर एनटीआर, राम चरण जो कि ग्लोबल स्टार बन चुके हैं उनके बराबर माने जाने लगे हैं. तमिल सिनेमा में थलापति विजय और अजीत भगवान की तरह पूजे जाते हैं लेकिन हिंदी बेल्ट और ग्लोबल मार्केट में जो पकड़ यश की है, वो विजय या अजीत की नहीं मानी जाती.
यश ने क्यों चुना 'टॉक्सिक'?
KGF-2 के बाद हर बड़ा डायरेक्टर यश के घर के बाहर कतार में था. लेकिन यश को कुछ ऐसा करना था जो कल्ट हो, जो डार्क हो. तभी एंट्री हुई गीतू मोहनदास की. एक ऐसी महिला निर्देशक जो 'लायर्स डाइस' और 'मूथॉन' जैसी गंभीर और अंतरराष्ट्रीय स्तर की आर्ट टाइप फिल्मों के लिए जानी जाती हैं. जब गीतू ने यश को 1961 के पुर्तगाली शासन वाले गोवा के बैकड्रॉप पर एक ऐसे गैंगस्टर 'राया' की कहानी सुनाई, जो सत्ता की भूख में अंधा है, तो यश दंग रह गए. एक मास-एक्शन हीरो और एक रियलिस्टिक महिला डायरेक्टर का यह कॉम्बिनेशन ही इस फिल्म की सबसे बड़ी यूएसपी बना. फिल्म को सिर्फ एक्शन नहीं, बल्कि इंसानी लालच की एक 'टॉक्सिक' दुनिया के रूप में बुना गया. पहली ऐसी फिल्म बनी जिसे कन्नड़ के साथ-साथ सीधे अंग्रेजी में भी ऑन-सेट शूट किया गया.
धमाकेदार ओपिनिंग के साथ खड़ा हुआ बड़ा बवंडर
टॉक्सिक' ने रिलीज के पहले ही दिन बॉक्स ऑफिस की खिड़कियों को तोड़ डाला लेकिन इस बंपर सफलता के साथ ही फिल्म को लेकर विवादों का एक बहुत बड़ा बवंडर खड़ा है. फिल्म में दिखाए गए जरूरत से ज्यादा खून-खराबे, गन-वायलेंस और ड्रग्स की डार्क दुनिया के चलते सेंसर बोर्ड ने इसे Adults Only सर्टिफिकेट थमाया. यश और कियारा आडवाणी के इंटीमेंट सींस ने फिल्म की ओपनिंग को सुपर डुपर बनाने में भले मदद दी हो लेकिन यश और कियारा को बहुत कुछ सुनना पड़ा रहा है.
महफिल लूट गई कियारा आडवाणी!
फिल्म में साउथ की लेडी सुपरस्टार नयनतारा यश की बहन के एक बेहद कड़क और पावरफुल रोल में थीं. उम्मीद थी कि पूरी लाइमलाइट नयनतारा ले जाएंगी. लेकिन जैसे ही फिल्म स्क्रीन पर आईं, बाजी मार ले गईं बॉलीवुड की कियारा आडवाणी . कियारा ने फिल्म के इमोशनल सीन्स और यश के साथ अपनी केमिस्ट्री से दर्शकों का दिल इस कदर जीता कि नयनतारा के होते हुए भी सोशल मीडिया पर कियारा के चर्चों की बाढ़ आ गई. कियारा की इसलिए भी तारीफ हो रही है कि उन्होंने प्रेग्नेंसी के 7वें महीने में भी इतनी बोल्ड एक्शन फिल्म की शूटिंग की जिसके बाद पूरी इंडस्ट्री कियारा के इस प्रोफेशनलिज्म को सलाम कर रही है. यश को जब कियारा की प्रेग्नेंसी का पता चला, तो उन्होंने कियारा को ट्रैवल से बचाने के लिए फिल्म के बड़े हिस्से की शूटिंग शेड्यूल बेंगलुरु से बदलकर सीधे मुंबई शिफ्ट करवा दी.
यश का अगला टारगेट!
300 की जेब से शुरू हुआ यह सफर आज उस मुकाम पर पहुंच चुका है जहां यश अब सिर्फ एक्टर नहीं, बल्कि प्रोडक्शन कंपनी 'मॉन्स्टर माइंड क्रिएशंस' के मालिक भी बन गए हैं. विवाद चाहे जितने भी हों, सेंसर बोर्ड की कैंची चाहे जितनी चली हो, लेकिन 300 की जेब से शुरू होकर बॉक्स ऑफिस पर हजार करोड़ के साम्राज्य तक पहुंचने वाले इस 'रॉकिंग स्टार' की रफ्तार को रोकना अब नामुमकिन है. टॉक्सिक के इस जहरीले और धमाकेदार साम्राज्य के बाद अब यश की अगली नजर है भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी 4000 करोड़ की महाकाव्य फिल्म 'रामायण' पर, जहां वो रणबीर कपूर के सामने 'रावण' बनकर तहलका मचाने को पूरी तरह तैयार हैं.
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