क्या तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के विदेश दौरे के पीछे कोई सीक्रेट कूटनीतिक खेल चल रहा था? क्या राइजिंग तेलंगाना के नाम पर अमेरिका में इन्वेस्टमेंट जुटाने की आड़ में दिल्ली को बिना बताए एक ऐसी मीटिंग सेट की जा रही थी, जिससे सरकार चौकन्नी हो गई? कूटनीतिक गलियारों से लेकर भारत की राजनीति में इस वक्त यही सवाल गूंज रहा है. मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी लंदन के दौरे पर थे और वहीं से उन्हें अमेरिका के बोस्टन और न्यूयॉर्क जाना था, लेकिन ऐन वक्त पर विदेश मंत्रालय ने उनके अमेरिकी दौरे की पॉलिटिकल क्लीयरेंस पर ब्रेक लगा दिया.
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विदेश मंत्रालय का कहना है कि दौरा रेवंत रेड्डी के संवैधानिक पद की गरिमा के अनुकूल नहीं था. लेकिन इस कूटनीतिक रेड सिग्नल के पीछे जिस एक चर्चित चेहरा से इतना बड़ा भूचाल लाया है, वो नाम है न्यूयार्क सिटी के मेयर- जोहरान ममदानी. राइजिंग तेलंगाना की आड़ में एक राज्य के मुख्यमंत्री का बिना डिप्लोमेटिक चैनलों के सीधे अमेरिकी उपराष्ट्रपति के स्तर पर तय करने को विदेश मंत्रालय ने प्रोटोकॉल और संवैधानिक पद की गरिमा के प्रतिकूल माना. जोहरान ममदानी तो वैसे ही सरकार की नजर में बहुत पसंद किए जाने वाले व्यक्ति हैं नहीं.
जैसे ही रेवंत रेड्डी का अमेरिकी दौरा रद्द हुआ, तेलंगाना की राजनीति में एक नया ज्वालामुखी फट पड़ा. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव और सांसद अरविंद धर्मपूरी ने दावा किया कि मुख्यमंत्री राइजिंग तेलंगाना के तहत निवेश और शिक्षा का बहाना बना रहे थे, लेकिन पर्दे के पीछे न्यूयार्क के मेयर जोहरान ममदानी के साथ एक गुप्त राजनीतिक बैठक की स्क्रिप्ट लिखी जा रही थी. ममदानी वही किरदार हैं जो विदेशों में बैठकर राहुल गांधी के 'वैचारिक गुरु' और भारत विरोधी नैरेटिव के हेडमास्टर बनते हैं.
सवाल उठाए गए कि आखिर एक मुख्यमंत्री देश की विदेश नीति और आधिकारिक चैनलों को बाईपास करके एक ऐसे विदेशी नेता से क्यों मिलना चाहता था, जिसका ट्रैक रिकॉर्ड भारत के खिलाफ रहा है? मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने सफाई दी है कि ममदानी से मुलाकात केवल 'संभावित' थी और फाइनल नहीं थी. अगर तेलंगाना बीजेपी के आरोप दमदार हैं तो सवाल ये है कि कौन हैं जोहरान ममदानी जिनके भारतीय होने भी सरकार पसंद नहीं कर रही है? चर्चित चेहरा के इस एपिसोड में जानिए पूरी कहानी.
क्या जोहरान ममदानी का है भारत से कनेक्शन?
इस पूरी राजनीतिक थ्रिलर के सेंटर में खड़े जोहरान ममदानी कोई साधारण अमेरिकी नेता नहीं हैं. 34 साल के जोहरान ममदानी जनवरी में न्यूयॉर्क सिटी के मेयर चुने गए हैं. उनकी प्रोफाइल सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं है. उनका भारत से बेहद गहरा पारिवारिक कनेक्शन है. जोहरान ममदानी भारत की मशहूर, ऑस्कर नॉमिनेटेड फिल्म मेकर मीरा नायर के बेटे हैं जिन्होंने सलाम बॉम्बे और मानसून वेडिंग जैसी फिल्में बनाईं. पिता प्रोफेसर महमूद ममदानी युगांडा के मूल निवासी और न्यूयॉर्क की कोलंबिया यूनिवर्सिटी में मानव विज्ञान (Anthropology) के बेहद प्रतिष्ठित प्रोफेसर हैं. प्रोफेसर महमूद ममदानी को 1972 में युगांडा के तानाशाह ईदी अमीन ने देश से बाहर निकाल दिया था क्योंकि वे भारतीय मूल के थे.
विस्थापन और शरणार्थी होने के दर्द ने ही जोहरान को न्यूयॉर्क में बेघर होने वाले और किराया न दे पाने वाले गरीब परिवारों के लिए लड़ने की प्रेरणा दी. राजनीति में आने से पहले वे क्वींस इलाके में लोगों को बेदखली से बचाने वाले काउंसलर के रूप में काम करते थे, जिसने उन्हें जमीन से जुड़े नेता के रूप में स्थापित किया.
कौन हैं जोहरान ममदानी?
जोहरान ममदानी का जन्म 18 अक्टूबर 1991 को युगांडा की राजधानी कंपाला में हुआ था. उनका पूरा नाम जोहरान क्वामे ममदानी है, और उनका मिडिल नेम क्वामे घाना के पहले प्रधानमंत्री क्वामे न्क्रूमा के नाम पर रखा गया था. जोहरान का बचपन युगांडा और दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन में बीता, लेकिन जब वे महज 7 साल के थे, तब उनका परिवार अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में आकर बस गया. जोहरान का जन्म युगांडा में हुआ. फिर अमेरिकी नागरिक बने लेकिन उनकी रगो में खून में भारतीय ही है.
ममदानी की लाइफ जर्नी
जोहरान ममदानी का रेज्मे पावरफुल है. उन्होंने न्यूयॉर्क के मैनहट्टन के प्रोग्रेसिव स्कूल 'बैंक स्ट्रीट कॉलेज ऑफ एजुकेशन' और फिर देश के प्रतिष्ठित 'ब्रोंक्स हाई स्कूल ऑफ साइंस' से अपनी स्कूलिंग की. 2014 में उन्होंने अमेरिका के मशहूर बोडॉइन कॉलेज (Bowdoin College) से 'अफ्रीकन स्टडीज' में बैचलर ऑफ आर्ट्स की डिग्री हासिल की. राजनीति में आने से पहले जोहरान मिस्टर कार्डामम,'यंग कार्डामम नाम से एक हिप-हॉप रैपर के तौर पर भी काम कर चुके हैं. राजनीति में कदम रखते ही उन्होंने 'डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट्स ऑफ अमेरिका' (DSA) का दामन थामा और पहले न्यूयॉर्क स्टेट असेंबली के सदस्य बने. इसके बाद नवंबर 2025 के चुनाव में उन्होंने अमेरिका को चौंकाते हुए शानदार जीत दर्ज की और जनवरी 2026 में न्यूयॉर्क सिटी के पहले मुस्लिम और दक्षिण एशियाई मूल के मेयर बनकर इतिहास रच दिया.
ममदानी के चुनावी कैंपेन का सबसे पहला और बड़ा नियम था, किसी भी बड़े कॉर्पोरेट घराने, रियल एस्टेट लॉबी या बड़े बिजनेसमैन से एक भी डॉलर का चंदा न लेना. ममदानी ने पूरी तरह Small-Dollar Donations की क्राउड फंडिंग पर भरोसा किया. ममदानी और उनके वॉलेंटियर्स की फौज ने न्यूयॉर्क के एक-एक घर का दरवाजा जाकर वोट मांगे. उन्होंने न्यूयॉर्क की बसों को आम जनता के लिए पूरी तरह मुफ्त करने की लड़ाई लड़ी. बड़े मकान मालिकों और रियल एस्टेट माफिया के खिलाफ जाकर किराएदारों के हक में कानून बनाने का वादा किया.
मेयर होने के बावजूद बेहद सादगी से जीते है जिंदगी!
जोहरान ममदानी ने 2025 में सीरियाई मूल की मशहूर आर्टिस्ट और इलस्ट्रेटर रामा दुवाजी से शादी की. दोनों की मुलाकात एक डेटिंग ऐप के जरिए हुई थी. न्यूयॉर्क के मेयर होने के बावजूद जोहरान अपनी बेहद सादा जीवनशैली के लिए जाने जाते हैं. वे किसी आलीशान बंगले में रहने के बजाय क्वींस के एस्टोरिया इलाके में एक 'रेंट-स्टेबलाइज्ड' अपार्टमेंट में रहते हैं, जिसका मासिक किराया करीब लगभग 2 लाख रुपये है. उनके पास अपना कोई घर या कार भी नहीं. अक्सर न्यूयॉर्क की मेट्रो ट्रेन में बैग उठाए सफर करते देखे जाते हैं.
फोर्ब्स की रिपोर्ट के मुताबिक जोहरान ममदानी की कुल संपत्ति करीब 1 करोड़ 71 लाख भारतीय रुपये है. न्यूयॉर्क के सबसे कम संपत्ति वाले मेयरों में से एक हैं. न्यूयॉर्क स्टेट असेंबली के सदस्य के रूप में उनकी सालाना सैलरी करीब 1.25 करोड़ रुपये थी और मेयर बनने के बाद उन्होंने एलान किया कि जनता की भलाई के लिए किसी भी तरह की सैलरी हाइक नहीं लेंगे.
कैसे जीता था ममदानी ने चुनाव?
न्यूयॉर्क जैसे बहुसांस्कृतिक (Multicultural) शहर में चुनाव जीतना आसान नहीं था, लेकिन जोहरान ममदानी ने इसके लिए अपनी बहुभाषी कला और बॉलीवुड का सहारा लिया. अंग्रेजी, हिंदी, उर्दू, स्पेनिश, बंगाली और मंदारिन (चीनी) सहित कई भाषाओं को बेहद सहजता से बोल लेते हैं. मेयर चुनाव के दौरान, जोहरान ने कोई पारंपरिक उबाऊ भाषण देने के बजाय सोशल मीडिया पर छोटे, मजेदार और डिजिटल-फर्स्ट वीडियो की झड़ी लगा दी थी. उन्होंने न्यूयॉर्क के स्ट्रीट फूड वेंडर्स के साथ बातचीत करते हुए हलाल-फ्लेशन जैसा अनोखा शब्द इजाद किया. उन्होंने अपने वीडियो में अमिताभ बच्चन की फिल्मों के डायलॉग और शाहरुख खान का आइकॉनिक पोज देकर न्यूयॉर्क में रहने वाले दक्षिण एशियाई प्रवासियों भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश के वोटर्स के दिलों को सीधे छुआ. उनके वीडियो वॉट्सऐप ग्रुप्स और इंस्टाग्राम रील्स पर इस कदर वायरल हुए कि प्रवासियों की दूसरी और तीसरी पीढ़ी के युवा खुद उनके लिए वोट मांगने सड़कों पर उतर आए.
ममदानी और भारत सरकार से उनकी तकरार!
ममदानी न्यूयॉर्क के मेयर न होते तो भारत से, सरकार से लड़ाई इतनी तीखी न होती. जब मेयर का चुनाव जीते तो दो कुरान पर हाथ रखकर शपथ ली थी. जोहरान ने मेयर चुनाव में अपने भारतीय कनेक्शन का जमकर इस्तेमाल किया. लेकिन न्यूयार्क की गद्दी पर बैठते ही उनकी सोच भारत के हितों से टकराने लगी. न्यूयॉर्क के मेयर चुनाव के दौरान जब भारतीय-अमेरिकी वोटरों ने उनके खिलाफ मोर्चा खोला और स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी के ऊपर 'रिजेक्ट ममदानी' के बैनर लहराए, तब उन्होंने थोड़ा डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि वे उस बहुलवादी भारत को पसंद करते हैं जिसमें वे बड़े हुए, लेकिन मोदी और बीजेपी का विजन ऐसा है जिसमें हर भारतीय के लिए जगह नहीं है.
जोहरान ममदानी अमेरिका में डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट राजनीति का चेहरा हैं. लगातार भारत के आंतरिक और न्यायिक मामलों में हस्तक्षेप करने की कोशिश करते रहे हैं. सबसे बड़ा विवाद तब खड़ा हुआ था जब ममदानी ने दिल्ली दंगों के मुख्य आरोपी जेल में बंद उमर खालिद के समर्थन में न्यूयॉर्क से ऑफिशियल चिट्टी जारी की. भारत सरकार पर मानवाधिकारों के हनन का आरोप लगाया, जिसके बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने बेहद सख्त लहजे में उन्हें चेतावनी दी. गुस्सा इसलिए भी कि भारतीय खून होने के बाद भी ममदानी अमेरिका में ऐतिहासिक इंडिया डे परेड का बहिष्कार करते हैं और पाकिस्तान डे के कार्यक्रमों में शामिल होकर उनके सुर में सुर मिलाते हैं.
पीएम मोदी और बीजेपी के खिलाफ जोहरान ममदानी के बयान केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि कूटनीतिक रूप से बेहद जहरीले रहे हैं. लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर 2002 के गुजरात दंगों का राग अलापते हैं और आरोप लगाते हैं कि भारत में अल्पसंख्यकों के लिए जगह खत्म की जा रही है. जोहरान ममदानी ने कभी भी सार्वजनिक या आधिकारिक तौर पर राहुल गांधी के खिलाफ या उनके पक्ष में कोई सीधा बयान नहीं दिया है. दोनों नेताओं के बीच सीधे तौर पर कभी कोई बातचीत या सार्वजनिक मंच साझा नहीं हुआ है.
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