न्यूयॉर्क के मेयर, भारतवंशी जोहरान ममदानी एक बार फिर चर्चा में हैं. जोहरान ममदानी को लेकर चर्चा होने के पीछे की वजह एक तो उनका अनोखा ऐतिहासिक शपथ ग्रहण समारोह और दूसरा तिहाड़ जेल में बंद उमर खालिद को लिखी एक चिट्ठी है. एक तरफ जहां कुरान पर हाथ रखकर शपथ लेने पर सियासी गरमा-गर्मी शुरू हो गई, ट्रंप और उनके समर्थक आमने-सामने आ गए, तो वहीं दूसरी तरफ JNU के पूर्व छात्र उमर खालिद को लिखी गई उनकी चिट्ठी सुर्खियों में है.
ADVERTISEMENT
चर्चित चेहरा के इस खास एपिसोड में जानिए जोहरान ममदानी के शपथ को लेकर क्या है विवाद? उमर खालिद को भेजी चिट्ठी में ममदानी ने क्या लिखा? कैसे भारत से जुड़ी हुई हैं ममदानी के परिवार की जड़े और क्यों उन्हें माना जाता है पीएम मोदी का बड़ा विरोधी...
जोहरान ममदानी ने दो बार ली शपथ
अमेरिका में जोहरान ममदानी ने नवंबर 2025 में मेयर का चुनाव जीत लिया था, जिसके बाद नए साल की शुरुआत में 1 जनवरी 2026 को उन्होंने न्यूयॉर्क के मेयर पद की शपथ ली. डेमोक्रेट ममदानी ने अमेरिका के सबसे बड़े शहर के पहले मुस्लिम नेता के तौर पर शपथ ली. शपथ के दौरान उन्होंने इस्लाम की किताब कुरान शरीफ पर हाथ रखा. ऐसा करने वाले ममदानी न्यूयॉर्क शहर के इतिहास में पहले मेयर होंगे. ममदानी ने दो बार शपथ ली. एक तो उन्होंने मैनहट्टन में एक बंद पड़े सबवे स्टेशन पर मेयर पद की शपथ ली, ये समारोह उनकी राजनीतिक सहयोगी लेटिटिया जेम्स ने वहां आयोजित किया था.
इसके बाद दूसरी बार ममदानी ने सिटी हॉल की सीढ़ियों पर एक भव्य सार्वजनिक समारोह में शपथ ली, यहां उन्हें उनके राजनीतिक आदर्श अमेरिकी सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने शपथ दिलाई. न्यूयॉर्क की एक पुरानी परंपरा है. नए मेयर का कार्यकाल नए साल की शुरुआत के साथ ही शुरू होता है. जोहरान ममदानी के ऑफिस ने कहा कि लंबे वक्त से बंद सबवे स्टेशन का चुनाव उन मेहनती लोगों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जो हर दिन हमारे शहर को चलाते हैं.
कुरान पर हाथ रखकर शपथ लेने का विवाद
जोहरान ममदानी के न्यूयॉर्क सिटी के मेयर के रूप में कुरान पर हाथ रखकर शपथ लेने के बाद अमेरिकी राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है. ममदानी ने कुरान पर हाथ रखकर शपथ ली तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके समर्थकों की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई, जिसे धार्मिक और वैचारिक असहमति से जोड़कर देखा जा रहा है. जबकि ममदानी और उनके समर्थकों ने इसे अमेरिका की धार्मिक स्वतंत्रता और विविधता का प्रतीक बताया. दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप ममदानी की राजनीतिक विचारधारा और नीतियों से भी असहज रहते हैं. अब इस नई बयानबाजी ने टकराव फिर से बढ़ गया है.
भारत में क्यों हो रहा विवाद?
एक तरफ जहां जोरहान ममदानी को लेकर सियासत गरमाई है तो वहीं भारत में भी एक नए मुद्दे को लेकर सियासत शुरू हो गई है. ये मुद्दा दिल्ली के तिहाड़ जेल में बंद JNU के पूर्व छात्र उमर खालिद से जुड़ा है. दरअसल, जोहरान ममदानी ने उमर खालिद को एक चिट्ठी लिखी है ये चिट्ठी सोशल मीडिया पर उसी दिन सामने आई, जिस दिन ममदानी ने न्यूयॉर्क के मेयर के रूप में शपथ ली. इस चिट्ठी में जोहरान ममदानी ने उमर खालिद और उनके परिवार से हुई अपनी मुलाकात का जिक्र किया है. उन्होंने कहा कि वे अक्सर खालिद की कही बातों को याद करते हैं और उनके माता-पिता से मिलना उनके लिए एक महत्वपूर्ण अनुभव रहा.
ममदानी ने अपनी चिट्ठी में लिखा कि वो लगातार उमर खालिद के बारे में सोच रहे हैं और उनकी स्थिति पर गहरी चिंता है. अमेरिका में उमर खालिद की हिरासत को लेकर पहले भी आवाज उठाई गई है. हाल ही में 8 अमेरिकी सांसदों ने भारत के राजदूत को एक चिट्ठी भेजकर उनकी लंबी हिरासत पर चिंता जाहिर की थी.
कौन हैं उमर खालिद?
उमर खालिद को सितंबर 2020 में गिरफ्तार किया गया था. उमर पर दिल्ली दंगों की साजिश में शामिल होने का आरोप लगा था, जिसके चलते उन पर कई धाराएं लगाई गई हैं. हालांकि उमर को कुछ छोटे मामलों में बरी किया जा चुका है, लेकिन साजिश वाले मुख्य मामले में उन्हें जमानत नहीं मिल पाई है. जोहरान ममदानी जून 2023 में न्यूयॉर्क में एक कार्यक्रम के दौरान उमर खालिद के जेल से लिखे पत्रों के अंश पढ़ चुके हैं. उस समय उन्होंने कहा था कि उमर खालिद को बिना मुकदमे के लंबे समय तक हिरासत में रखा गया है, जो न्यायिक प्रक्रिया की अवहेलना है. ममदानी की तरफ से की गई उमर खालिद की चिंता तो मुस्लिम समुदाय के प्रति उनके झुकाव के तौर पर देखा जा रहा है.
ममदानी का क्या है भारत कनेक्शन?
जोरहान की जड़ें भारत से जुड़ी हुई हैं, इसलिए हमारे देश में उनको लेकर अक्सर चर्चाएं होती रहती हैं. न्यूयॉर्क के मेयर के पद पर पहुंचने वाले ममदानी पहले मुस्लिम, पहले दक्षिण एशियाई और पहले अफ्रीकी मूल के व्यक्ति हैं. 34 साल के जोरहान का जन्म 1991 में युगांडा में हुआ था. ममदानी की मां भारतीय फिल्म निर्माता मीरा नायर हैं और मशहूर शिक्षाविद महमूद ममदानी हैं. भले ही उनका जन्म युगांडा में हुआ हो, लेकिन उनके माता-पिता दोनों भारतीय मूल के हैं.
ममदानी की मां मीरा नायर मूल रूप से ओडिशा के राउरकेला से हैं. मीरा नायर भारत में ही पली-बढ़ीं और उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के मिरांडा हाउस से पढ़ाई की है. वहीं ममदानी के पिता का जन्म मुंबई में एक गुजराती मुस्लिम परिवार में हुआ था. हालांकि उनका परिवार बाद में पूर्वी अफ्रीका युगांडा चला गया था, लेकिन उनकी जड़ें गुजरात और मुंबई से जुड़ी हैं. ममदानी 7 साल की उम्र में न्यूयॉर्क चले गए थे. जोहरान खुद को एक भारतीय मुस्लिम के रूप में पहचानते हैं. उन्होंने अपने मेयर पद के पहले संबोधन में अपनी भारतीय जड़ों को स्वीकार किया और दिल्ली में रहने वाले अपने परिवार से जुड़े सदस्यों का आभार जताया.
ममदानी की लाइफ जर्नी
न्यूयॉर्क में ममदानी 'डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट' विचारधारा से जुड़े हैं. मेयर बनने से पहले वो 2021 से 2025 तक न्यूयॉर्क स्टेट असेंबली के सदस्य रहे. उन्होंने चुनाव में पूर्व गवर्नर एंड्रयू कुओमो को हराकर बड़ी जीत हासिल की. ममदानी की पढ़ाई की बात करें तो जोहरान ने बोडॉइन कॉलेज से 'अफ्रीकाना स्टडीज' में ग्रेजुएशन किया. राजनीति में आने से पहले, उन्होंने एक रॅपर Mr. Cardamom के रूप में भी काम किया और क्वींस में लोगों को बेदखली से बचाने वाले हाउसिंग काउंसलर रहे.
ममदानी खुले तौर पर खुद को डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट बताते हैं और अमीरों पर ज्यादा टैक्स, मुफ्त चाइल्ड केयर, किराया कंट्रोल और प्रवासियों के अधिकारों की वकालत करते रहे हैं. अपने उद्घाटन भाषण में ममदानी ने कहा कि सिटी हॉल अब न्यूयॉर्कवासियों की जिंदगी बेहतर बनाने के लिए अपनी शक्ति का इस्तेमाल करने से नहीं हिचकेगा. ज़ोहरान ममदानी की मेयर चुनाव में ऐतिहासिक जीत के बाद उन्हें भविष्य के एक बड़े नेता के रूप में देखा जा रहा है.
ममदानी को क्यों कहा जाता है पीएम मोदी का विरोधी?
जोरहान ममदानी को पीएम मोदी का विरोधी माना जाता है. ममदानी ने कई बार पीएम मोदी और उनकी सरकार की नीतियों की आलोचना की है. उन्होंने मोदी के लिए वॉर क्रिमिनल जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से तुलना भी की थी. एक बार ममदानी से पूछा था कि क्या वे मेयर बनने के बाद पीएम मोदी के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस करना पसंद करेंगे तो उन्होंने इसके लिए साफ इनकार कर दिया था. इसके अलावा ममदानी ने जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने और CAA की भी आलोचना की थी.
ADVERTISEMENT

