जर्जर स्कूलों के मुद्दे पर CJP की मुहिम का एक महीना पूरा, अब क्या है अगला कदम? आशुतोष रांका ने बताया आगे का प्लान

न्यूज तक डेस्क

• 06:09 PM • 17 Sep 2026

CJP New Campaign: कॉकरोच जनता पार्टी के 'स्कूल ठीक करो' अभियान को एक महीना पूरा हो गया है. CJP के मुताबिक अभियान के दौरान बड़ी संख्या में सरकारी स्कूलों का ऑडिट किया गया और जर्जर स्कूल भवनों, शौचालय, पानी, कक्षाओं और दूसरी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को सामने लाया गया. जानिए CJP के आगे की पूरी रणनीति.

आशुतोष रांका
सीजेपी प्रवक्ता आशुतोष रांका
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कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा देश भर में चलाए जा रहे 'स्कूल ठीक करो कैंपेन' को एक महीना पूरा हो चुका है. 15 अगस्त से शुरू हुए इस अभियान को लेकर CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने बताया कि इसे देश भर से जबरदस्त समर्थन मिला है, जिसके तहत अब तक 15,000 से अधिक स्कूलों का ऑडिट किया जा चुका है. इस अभियान में न केवल CJP के वॉलंटियर्स, बल्कि अभिभावकों और देश के तमाम जागरूक नागरिकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है. इस बड़े पैमाने पर हुए ऑडिट के कारण सरकारों पर लगातार दबाव बढ़ता नजर आ रहा है, जिसके परिणाम स्वरूप हाल ही में हरियाणा सरकार ने 2,800 से अधिक जर्जर स्कूल इमारतों को गिराने का फैसला लिया है.

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राजस्थान में CJP की मुहिम का असर

राजस्थान में इस कैंपेन की सफलता पर प्रकाश डालते हुए आशुतोष रांका ने बताया कि प्रदेशवासियों और CJP ने यहां 500 से अधिक स्कूलों का ऑडिट किया है. शुरुआती दौर के स्कूलों के ऑडिट के दौरान सामने आई घटनाओं के बाद बढ़ते दबाव के चलते राजस्थान सरकार को अगले तीन वर्षों में सभी जर्जर इमारतों को ठीक करने के लिए 1,500 करोड़ रुपए का रोडमैप जारी करना पड़ा है.

CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने स्पष्ट किया है कि पार्टी इस पूरे निवेश और रोडमैप की कड़ी निगरानी रखेगी और सरकारी स्तर पर किसी भी प्रकार की चूक को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, साथ ही चेतावनी दी कि राजस्थान के सभी सरकारी स्कूल ठीक करने ही होंगे और सरकार के पास इसके अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है.

'आदिवासी स्कूल ठीक करो कैंपेन' का हुआ ऐलान

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका ने देश की आदिवासी आबादी की बदहाली पर गंभीर चिंता जताई और कहा कि जल, जंगल और जमीन के पहले हकदार होने के बावजूद आदिवासी आज देश की सबसे पिछड़ी आबादियों में शामिल हैं. आजादी के 80 साल बाद भी आदिवासी भाई-बहनों को मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है. महाराष्ट्र के आदिवासी इलाकों में पिछले दो वर्षों में 600 से अधिक बच्चों की मौत और मध्य प्रदेश के बालाघाट में 30 बच्चों की अलग-अलग कारणों से हुई मौतों ने व्यवस्था की पोल खोल दी है. 

पिछले साल राजस्थान के झालावाड़ में स्कूल की छत गिरने से सात आदिवासी बच्चों की दर्दनाक मौत की घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि आज भी झालावाड़ के स्कूलों के हालात जस के तस हैं. जर्जर इमारतों को प्रशासन द्वारा बंद किए जाने के बाद आज भी कई बच्चे खुले आसमान के नीचे और टेंटों में पढ़ने को मजबूर हैं. इन गंभीर समस्याओं को देखते हुए आशुतोष रांका ने 'आदिवासी स्कूल ठीक करो कैंपेन' की शुरुआत करने का भी ऐलान किया है. राजस्थान के तमाम आदिवासी इलाकों में कल से इस अभियान की शुरुआत की जाएगी, जिसके तहत आने वाले समय में विभिन्न जिलों का दौरा और निरीक्षण किया जाएगा.

'आशीर्वाद के दिए' जलाकर सरकार की नींद खोलने की तैयारी

देश भर के स्कूलों और कॉलेजों में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक 'आशीर्वाद के दिए' जलाने का आदेश जारी किया गया है. इस पर बात करते हुए CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि पार्टी की पूरी टीम भी आज इन दीपों को जलाएगी और आने वाले समय में जिन भी स्कूलों का निरीक्षण किया जाएगा, वहां इन दीपों को प्रज्वलित किया जाएगा ताकि भारतीय जनता पार्टी और देश की सरकारों की आंखें इन जर्जर स्कूलों और कॉलेजों की वास्तविक स्थिति पर खुल सकें.

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