CJP meeting News: देशव्यापी आंदोलन स्थगित करने के बाद अब युवा और छात्र संगठन अपनी रणनीति दोबारा तैयार करने में जुट गए हैं. कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने केंद्र सरकार द्वारा दिए गए आश्वासनों की मौजूदा स्थिति की समीक्षा करने के लिए सोमवार को अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाई है. संगठन का स्पष्ट कहना है कि सरकार ने अपने वादों को पूरा करने की दिशा में अब तक कोई भी औपचारिक जानकारी साझा नहीं की है, इसलिए आगे का फैसला इस बैठक में लिया जाएगा.
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शांतिपूर्ण आंदोलन का रास्ता फिर से खुला
सीजेपी ने साफ कर दिया है कि सरकार से मिले आश्वासनों को पूरा कराने के लिए जितने भी जरूरी कदम होंगे, उन पर विचार किया जाएगा. इसमें देशभर में फिर से एक शांत और अनुशासित आंदोलन शुरू करने का विकल्प भी पूरी तरह शामिल है. संगठन ने बयान जारी कर कहा है कि उन्होंने देश के युवाओं के हित में और सरकार के वादे पर भरोसा करके आंदोलन वापस लिया था, लेकिन इस 'सद्भावना' को सरकार किसी भी सूरत में उनकी 'कमजोरी' समझने की भूल न करे.
सुप्रीम कोर्ट के रुख के बाद बढ़ा तनाव
हाल ही में 18 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में छात्रों और प्रदर्शनकारियों पर दर्ज हुई सभी FIR की एक लिस्ट मांगी थी. शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार से तीन बार यह सूची पेश करने को कहा ताकि वह अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करके मुकदमों को रद्द करने पर विचार कर सके. हालांकि, सीजेपी का कहना है कि बार-बार कहे जाने के बाद भी केंद्र सरकार ने यह सूची अदालत को सौंपने की कोई प्रतिबद्धता नहीं दिखाई, जिससे सवाल खड़े हो रहे हैं.
धोखे का आरोप और अधर में लटके वादे
अदालत की कार्रवाई के तुरंत बाद सीजेपी के सह-संयोजक सौरव दास और कानूनी मामलों की देखरेख कर रही रत्ना सिंह ने इस पर गहरी चिंता जताई. उन्होंने आरोप लगाया कि बातचीत के दौरान किए गए लिखित वादों के आधार पर ही आंदोलन वापस लिया गया था, लेकिन अब सरकार युवाओं के साथ 'विश्वासघात' करती दिख रही है. संगठन के मुताबिक, सरकार ने उन लिखित आश्वासनों पर क्या कदम उठाए हैं, इसकी कोई आधिकारिक रिपोर्ट अभी तक सीजेपी को नहीं भेजी गई है.
नीट विवाद, एफआईआर और मुआवजे का मामला
उल्लेखनीय है कि मई महीने में पेपर लीक के कारण रद्द हुई नीट-यूजी परीक्षा के बाद छात्रों का गुस्सा भड़क उठा था. सीजेपी का यह आंदोलन तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और सरकार द्वारा दंडात्मक कार्रवाई न करने के वादे के बाद 25 जुलाई को खत्म हुआ था. संगठन की मुख्य मांगों में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर दर्ज सभी एफआईआर वापस लेना, छात्रों पर भविष्य में कार्रवाई न होने की गारंटी देना और परीक्षा रद्द होने से दुखी होकर जान गंवाने वाले नीट अभ्यर्थियों के परिवारों को मुआवजा देना शामिल है.
युवाओं को तैयार रहने का दिया निर्देश
सीजेपी ने अपने सभी समर्थकों, वालंटियर्स, छात्रों और देश के युवाओं से सोमवार की बैठक के नतीजों के लिए तैयार रहने की अपील की है. संगठन ने चेतावनी दी है कि सरकार अगर अपने लिखित वादों को टालने, बदलने या उनसे मुकरने की कोशिश करेगी तो इसे देश के नौजवानों के साथ सीधा 'विश्वासघात' माना जाएगा. अब सोमवार को होने वाली बैठक में ही तय होगा कि देश का युवा वर्ग किस दिशा में कदम बढ़ाएगा.
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