शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर आ गया CJP का रिएक्शन, जानें क्या कहा

न्यूज तक डेस्क

25 Jul 2026 (अपडेटेड: Jul 25 2026 3:10 PM)

शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' ने "Cockroaches won.. Democracy won!" का तंज कसते हुए इसे भ्रष्टाचार की हार बताया. इस अनोखी और व्यंग्यात्मक प्रतिक्रिया के बाद सोशल मीडिया से लेकर सियासत तक घमासान मच गया है.

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NEET-UG परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ियों और धांधली को लेकर पिछले काफी समय से देश भर में छात्रों का गुस्सा देखने को मिल रहा था. लगातार होते विरोध-प्रदर्शनों और चौतरफा दबाव के बीच आखिरकार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उनके इस कदम के बाद जहां एक तरफ राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है, वहीं दूसरी तरफ 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) का एक पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.

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CJP ने तंज कसते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, "Cockroaches won.. Democracy won!" यानी कॉकरोच जीते, लोकतंत्र जीता. इस बयान ने इंटरनेट पर बहस को एक नया ही मोड़ दे दिया है.

इस्तीफे के पीछे की वजह

पद छोड़ने के साथ ही धर्मेंद्र प्रधान ने एक भावुक पत्र जारी कर अपना पक्ष साफ किया. उन्होंने लिखा कि वह पिछले चार दशकों से भी ज्यादा समय से शिक्षा व्यवस्था, छात्रों और शिक्षकों के कल्याण के लिए काम करते आए हैं. उनका हमेशा से ये मानना रहा है कि एक मजबूत और पारदर्शी शिक्षा प्रणाली ही देश की तरक्की की नींव होती है.

अपने पत्र में उन्होंने पूरे घटनाक्रम का जिक्र करते हुए लिखा 3 मई 2026 को हुई NEET-UG परीक्षा में अनियमितताओं की खबरें सामने आते ही सरकार एक्शन में आ गई थी. पूरे मामले की जांच सीबीआई (CBI) को सौंपी गई और पुरानी परीक्षा रद्द कर फिर से परीक्षा कराने का फैसला लिया गया. भविष्य में ऐसी धांधली रोकने के लिए अगले साल से NEET परीक्षा को पूरी तरह कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) मोड पर कराने का ऐलान भी किया गया.

21 जून 2026 को करीब 20 लाख से ज्यादा परीक्षार्थियों के लिए दोबारा परीक्षा का आयोजन किया गया जो शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई. 16 जुलाई को जारी नतीजों में कई जरूरतमंद और गरीब परिवारों के होनहार बच्चों ने सफलता हासिल की.

राजनीतिक टकराव से दुखी होकर लिया फैसला

धर्मेंद्र प्रधान ने अपनी चिट्ठी में अफसोस जताते हुए लिखा कि कुछ जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने छात्रों को भ्रमित करने की कोशिश की, जिससे उन्हें काफी ठेस पहुंची है. पिछले 10 दिनों में जिस तरह का माहौल बना, उसने उन्हें गहराई से परेशान किया.

उन्होंने साफ किया कि यह उनका कोई व्यक्तिगत फैसला या आत्मसम्मान की लड़ाई नहीं है, बल्कि देश के युवाओं के भविष्य का मामला है. वह नहीं चाहते कि छात्र कानूनी दांव-पेच या राजनीतिक खींचतान में फंसकर अपनी पढ़ाई से भटकें. इसी बात को ध्यान में रखते हुए उन्होंने इस्तीफा देने का मन बनाया.

पत्र के अंत में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अपनी टीम और शिक्षा मंत्रालय के तमाम अधिकारियों का धन्यवाद किया. उन्होंने कहा कि पद पर न रहते हुए भी वह भारत माता, ओडिशा की जनता और देश के युवाओं की सेवा में हमेशा समर्पित रहेंगे.

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