झारखंड के रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित धांधली और पेपर लीक के खिलाफ छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे है. पिछले 9 दिनों से छात्र वहां अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हुए है. लेकिन इसी बीच वहां एक शख्स ने भूख हड़ताल शुरू कर दिया है, जिसकी तुलना जंतर-मंतर पर अनशन पर बैठे सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक से की जा रही है. कई ल तो इन्हें सोनम वांगचुक पार्ट 2 का नाम भी दे रहे हैं. भूख हड़ताल पर बैठे इस शख्स का नाम देवेन्द्रनाथ महतो है, जो कि एक छात्र नेता है और उन्होंने कसम ला ही कि जब तक दोनों ही एजेंसी JPSC और JSSC में पूरी तरह सफाई नहीं हो जाती, वह भूख हड़ताल पर रहेंगे. धीरे-धीरे छात्रों की संवेदनाएं भी अब उनसे जुड़ने लगी है. आइए विस्तार से जानते है आखिर कौन हैं देवेन्द्रनाथ महतो और इनके बारे में सबकुछ.
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'अभी नहीं तो कभी नहीं'
देवेनद्रनाथ महतो ने आजतक से खास बातचीत में कहा है कि जब 5 जुलाई को JPSC के 14वें सिविल सर्विसेज एग्जाम के प्रीलिम्स का रिजल्ट आया है, तभी उन्होंने इस आंदोलन का बिगुल फूंक दिया था. उन्होंने कहा कि कई ऐसी गड़बड़ियां थी जो कि अब पब्लिक डोमेन में है और ऐसे में भूख हड़ताल के अलावा कोई विकल्प नहीं था. साथ ही उन्होंने बताया कि CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी उनसे वीडियो कॉन्फ्रेंस पर बातचीत की और सहयोग का आश्वासन भी दिया. देवेन्द्रनाथ महतो ने अपनी भूख हड़ताल को लेकर साफ कहा कि, 'अभी नहीं तो कभी नहीं.'
कौन हैं देवेन्द्रनाथ महतो?
भूख हड़ताल पर बैठने के बाद अब सबके मन में एक ही सवाल उठ रहा है कि आखिर देवेन्द्रनाथ महतो कौन है? मिली जानकारी के मुताबिक, देवेन्द्रनाथ ने बहुत ही कठिन स्थिति में अपनी पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने रांची जिले के सुदुरवर्ती ग्रामीण इलाके राहें प्रखंड के कापीडीह गांव ने काफी संघर्ष और निरंतर मेहनत के बल पर दो विषयों में फर्स्ट डिजीवन से पोस्ट ग्रेजुएशन और बी.एड की डिग्री प्राप्त की है.
यही नहीं, देवेंद्र नाथ महतो का पढ़ाई-लिखाई का रिकॉर्ड भी शानदार रहा है. उन्होंने 2006 में JAC बोर्ड रांची से प्रथम श्रेणी में मैट्रिक पास की, जिसके बाद 2008 में साइंस से इंटरमीडिएट की परीक्षा भी फर्स्ट डिविजन से उत्तीर्ण की. इसके बाद उन्होंने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, रांची से संस्कृत में प्रथम श्रेणी के साथ ग्रेजुएशन पूरा किया.
मां को खोया, फिर भी छात्रों के अधिकार की लड़ाई से नहीं हटे पीछे
ग्रेजुएशन के बाद बाद उन्होंने हजारीबाग से सत्र 2015-17 में प्रथम श्रेणी के साथ बी.एड. (B.Ed.) किया. फिर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय से सत्र 2018-20 में संस्कृत विषय से पोस्ट ग्रेजुएशन (M.A.) की डिग्री प्रथम श्रेणी में हासिल की. अपनी शिक्षा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने सत्र 2020-22 में इसी विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा संकाय' से कुरमाली भाषा में भी प्रथम श्रेणी के साथ पोस्ट ग्रेजुएशन पूरा किया.
6वीं JPSC परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ियों और धांधली के खिलाफ चले आंदोलन में वे काफी सक्रिय रहे. इस संघर्ष के दौरान उन्होंने अपनी माताजी को भी खो दिया, लेकिन इसके बावजूद वे टूटे नहीं और छात्रों के अधिकारों की लड़ाई में लगातार डटे रहे.
2015 से ही उठा रहे मुद्दे
देवेंद्र नाथ महतो साल 2015 से ही छात्रों की मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं. उन्होंने स्कॉलरशिप, पेपर लीक, नियोजन नीति, और JPSC-JSSC परीक्षाओं में हुई धांधली व अनियमितताओं जैसे गंभीर मुद्दों को मजबूती से उठाया है. हर मंच पर छात्रों की आवाज़ बनकर वे उनके अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं.
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