मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह एक बार फिर अपने बयानों को लेकर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में हैं. आगामी 20 अक्टूबर (दशहरे के दिन) से उज्जैन से अयोध्या तक लगभग 1000 किलोमीटर लंबी यात्रा शुरू करने से पहले दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर निर्माण और चंदे को लेकर बीजेपी तथा आरएसएस पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं.
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'सत्य सनातन स्वाभिमान पदयात्रा' और चंदा चोरी के आरोप
दिग्विजय सिंह 20 अक्टूबर से 'सत्य सनातन स्वाभिमान पदयात्रा' की शुरुआत करने जा रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि राम मंदिर के नाम पर एकत्र किए गए चंदे और चढ़ावे में 200 से 300 करोड़ रुपये की हेराफेरी हुई है. दिग्विजय सिंह का दावा है कि विश्व हिंदू परिषद (VHP) और मंदिर में आने वाले चढ़ावे के पैसे का इस्तेमाल बीजेपी और आरएसएस के बड़े-बड़े दफ्तरों के निर्माण और चुनावी चंदे में किया जा रहा है.
उन्होंने चंपत राय पर हमला बोलते हुए कहा कि वे आरएसएस के एजेंट हैं और उनका धर्म से कोई लेना-देना नहीं है [02:51]. दिग्विजय सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि मंदिर निर्माण में 8 महीने के सीसीटीवी फुटेज डिलीट कर दिए गए और ₹800 करोड़ की लागत वाला निर्माण ₹2200 करोड़ तक पहुंच गया. इसके अलावा उन्होंने चांदी की ईंटों का हिसाब भी मांगा है.
बीजेपी का पलटवार: 'तुष्टीकरण की राजनीति कर रहे दिग्विजय'
दिग्विजय सिंह के इन आरोपों पर मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री और बीजेपी नेता विश्वास सारंग ने कड़ा पलटवार किया है. विश्वास सारंग ने कहा कि दिग्विजय सिंह हमेशा से हिंदू धर्म, साधु-संतों और सनातन परंपराओं का अपमान करते आए हैं. वे राजनीतिक रोटी सेकने के लिए तुष्टीकरण की राजनीति करते हैं. सारंग ने कहा कि बिना किसी तथ्य और प्रमाण के इस तरह के मनगढ़ंत आरोप लगाकर करोड़ों सनातन धर्म प्रेमियों की भावनाओं को ठेस पहुँचाई जा रही है.
यात्रा के राजनीतिक मायने
उज्जैन से शुरू होकर अयोध्या पर समाप्त होने वाली 1000 किलोमीटर की यह पदयात्रा राजनीतिक दृष्टिकोण से काफी अहम मानी जा रही है. इससे पहले साल 2018 में दिग्विजय सिंह ने 'नर्मदा परिक्रमा यात्रा' की थी, जिसका बड़ा राजनीतिक लाभ 2018 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को मिला था. अब इस यात्रा का कांग्रेस को कितना राजनीतिक लाभ मिलता है, यह देखने वाली बात होगी.
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