क्या है EPFO 3.0? सब्सक्राबर्स को मिलेगी डेबिट कार्ड की सुविधा, निकाल सकेंगे अपने पैसे

शुभम गुप्ता

• 10:10 AM • 03 Jan 2025

EPFO 3.0 के जरिए सब्सक्राइबर्स को बैंकिंग जैसी सुविधाएं मिलेंगी. इसमें पूरा सिस्टम सेंट्रलाइज्ड होगा, जिससे क्लेम सेटलमेंट और दूसरी प्रक्रियाएं आसान और तेज हो जाएंगी. इसके अलावा, सब्सक्राइबर्स को डेबिट कार्ड जारी किया जाएगा.

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Employement provident Fund: एंप्लॉयीज प्रॉविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन (EPFO) अपने सब्सक्राइबर्स के लिए डिजिटल युग में नई सुविधा लाने जा रहा है. इस साल मई-जून तक EPFO का मोबाइल एप्लिकेशन और डेबिट कार्ड लॉन्च करने की योजना है. केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने गुरुवार को इस नई पहल की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि EPFO के IT सिस्टम को पूरी तरह अपग्रेड किया जा रहा है. जनवरी 2024 के अंत तक EPFO 2.01 का काम पूरा हो जाएगा, जिसके बाद मई-जून तक EPFO 3.0 लॉन्च होगा.  

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EPFO 3.0 के फायदे

EPFO 3.0 के जरिए सब्सक्राइबर्स को बैंकिंग जैसी सुविधाएं मिलेंगी. इसमें पूरा सिस्टम सेंट्रलाइज्ड होगा, जिससे क्लेम सेटलमेंट और दूसरी प्रक्रियाएं आसान और तेज हो जाएंगी. इसके अलावा, सब्सक्राइबर्स को डेबिट कार्ड जारी किया जाएगा. हालांकि, इसमें कुछ शर्तें होंगी. सब्सक्राइबर अपने अंशदान का पूरा हिस्सा नहीं निकाल सकेंगे. एक लिमिट तक राशि निकालने की अनुमति दी जाएगी, और इसके लिए पहले से मंजूरी लेने की आवश्यकता नहीं होगी.  

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एनडीए बनाम यूपीए

श्रम मंत्री ने रोजगार के आंकड़ों की तुलना करते हुए यूपीए और एनडीए सरकार के कार्यकाल की उपलब्धियां साझा कीं.  
- 2004-2014 (यूपीए शासन):  
  - केवल 2.19 करोड़ नई नौकरियां.  
  - एंप्लॉयमेंट ग्रोथ 7% तक सीमित रही.  
  - एग्रीकल्चर सेक्टर में रोजगार में 16% की गिरावट.  
  - मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में सिर्फ 6% की बढ़ोतरी.  

- 2014-2023 (एनडीए शासन): 
  - 4.6 करोड़ नौकरियां केवल 2023-24 में सृजित की गईं.  
  - एंप्लॉयमेंट ग्रोथ 36% तक बढ़ी.  
  - एग्रीकल्चर सेक्टर में 19% की बढ़त.  
  - मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 15% की वृद्धि.  

बेरोजगारी दर में गिरावट

मांडविया ने बताया कि 2017-18 में बेरोजगारी दर 6% थी, जो 2023-24 में घटकर 3.2% रह गई. इसी अवधि में एंप्लॉयमेंट रेट 46.8% से बढ़कर 58.2% हो गया.  

ग्रैजुएट युवाओं की एंप्लॉयबिलिटी बढ़ी

उन्होंने कहा कि 2013 में ग्रैजुएट युवाओं की एंप्लॉयबिलिटी केवल 33.95% थी, जो 2024 में बढ़कर 54.81% हो गई. 2017-18 में युवाओं की एंप्लॉयमेंट रेट 31.4% थी, जो 2023-24 में 41.7% तक पहुंच गई.