Indian Railways News: भारतीय ट्रेनों के एयर-कंडीशन्ड कोच से बेडशीट, तकिए और कंबल गायब होने की बढ़ती घटनाओं को रेलवे ने अब बेहद गंभीरता से लिया है. केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस चोरी को रोकने और नुकसान पर लगाम लगाने के लिए अधिकारियों को अगले दो महीने के अंदर एक ठोस पॉलिसी तैयार करने काे निर्देश दिए हैं. रेलवे द्वारा किए जा रहे विभिन्न सुधारों को लेकर आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में रेल मंत्री ये जानकारी दी. अश्विनी वैष्णव ने अधिकारियों से कहा कि ट्रेनों से लिनेन और बेडरोल गायब होने की समस्या का एक स्थाई और लंबे समय तक चलने वाला समाधान निकाला जाना बेहद जरूरी है.
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चादर और तौलियों की चोरी से रेलवे को भारी नुकसान
बता दें कि रेलवे को हर साल एसी कोच के यात्रियों को दी जाने वाली बेडशीट, तकिए, कंबल और तौलियों की चोरी या उनके गुम होने के कारण भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ता है. लगातार गायब हो रहे इन सामानों की वजह से रेलवे का खर्च लगातार बढ़ रहा है. इसी नुकसान को कम करने और व्यवस्था को सुधारने के लिए अब पॉलिसी लेवल पर बड़े बदलाव की तैयारी शुरू कर दी गई है.
रोजाना बांटे जाते हैं लगभग आठ लाख लिनेन सेट
रेलवे के लिए यह चुनौती इसलिए भी बड़ी है क्योंकि इसका रोजाना का ऑपरेशन विशाल स्तर पर फैला हुआ है. भारतीय रेलवे के पूरे नेटवर्क पर हर दिन लगभग 8 लाख लिनेन सेट बांटे जाते हैं.
प्रत्येक लिनेन सेट में यात्रियों को यह सामान दिए जाते हैं:
- दो बेडशीट
- एक तकिया और उसका कवर
- एक कंबल
- एक हैंड टॉवल (फेस टॉवल)
इस बड़े पैमाने के कारण रेलवे को रोजाना लगभग 16 लाख बेडशीट, 8 लाख कंबल, 8 लाख तकिए, 8 लाख तकिए के कवर और 8 लाख फेस टॉवल यात्रियों को देने पड़ते हैं. इस बड़े डिस्ट्रीब्यूशन में मामूली चोरी भी बड़े नुकसान का कारण बन जाती है.
भरपाई के लिए करनी पड़ती है अतिरिक्त खरीद
ट्रेनों में यात्रियों की सेवा प्रभावित न हो इसके लिए रेलवे को गायब बेडरोल की जगह तुरंत नए सामान की व्यवस्था करनी पड़ती है. इस कमी को पूरा करने के लिए रेलवे लगातार अतिरिक्त लिनेन सेट की खरीद करता है, जिससे उसका बजट प्रभावित होता है.
फिलहाल की व्यवस्था के अनुसार, यात्रियों के उतरने के बाद लिनेन अटेंडेंट बेडरोल इकट्ठा करते हैं. इसका पूरा हिसाब रखने का जिम्मा उस बाहरी एजेंसी का होता है जिसे इसका कॉन्ट्रैक्ट मिला है. यदि सामान कम पाया जाता है तो उसकी कीमत एजेंसी के भुगतान से काटी जाती है. हालांकि, इस व्यवस्था के बाद भी चोरी रुक नहीं रही है.
छोटे तौलिए बने सिरदर्द, सबसे ज्यादा होते हैं गायब
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, सभी लिनेन सामानों में से छोटे साइज के तौलिए सबसे ज्यादा गायब होते हैं. अपने छोटे आकार के कारण ये तौलिए या तो यात्री अनजाने में अपने साथ ले जाते हैं या फिर कई बार अत्यधिक गंदे होने की वजह से दोबारा इस्तेमाल करने लायक नहीं बचते हैं. इससे रेलवे पर ऑपरेटिंग कॉस्ट का बोझ और अधिक बढ़ जाता है.
थर्ड एसी से फेस टॉवल हटाने की कोई योजना नहीं
पिछले कुछ समय से यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि रेलवे अपना नुकसान कम करने के लिए थर्ड एसी कोच से फेस टॉवल देना बंद कर सकता है. हालांकि, रेलवे ने कहा है कि ऐसी कोई भी योजना या प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है. यात्रियों को मिलने वाली सुविधाएं पहले की तरह ही जारी रहेंगी, लेकिन मॉनिटरिंग को पहले से कहीं अधिक सख्त किया जाएगा.
नई पॉलिसी में तकनीक और जवाबदेही पर रहेगा मुख्य फोकस
आगामी दो महीनों में तैयार होने वाली नई पॉलिसी के तहत कई कड़े कदम उठाए जा सकते हैं. अधिकारियों द्वारा इन्वेंट्री मैनेजमेंट को मजबूत करने, सर्विस प्रोवाइडर्स की जवाबदेही तय करने, लिनेन के मूवमेंट की तकनीकी ट्रैकिंग करने और यात्रियों के उतरने के बाद कलेक्शन की कड़ी निगरानी करने की उम्मीद है. इस पूरी कवायद का उद्देश्य यात्रियों की सुविधाओं को प्रभावित किए बिना रेलवे के नुकसान को रोकना है.
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