कहते हैं कि अगर हौसलों में उड़ान हो तो तंग गलियां और सीमित साधन भी आपकी कामयाबी का रास्ता नहीं रोक सकते. पंजाब के जालंधर के रहने वाले अर्जुन राजपूत ने इस बात को सच कर दिखाया है. जालंधर की सड़कों पर कुल्चे बेचने वाले एक साधारण परिवार के बेटे अर्जुन का चयन बीसीसीआई की भारतीय अंडर-19 क्रिकेट टीम में हुआ है. अर्जुन जल्द ही भारतीय जर्सी पहनकर श्रीलंका दौरे पर रनों की बरसात करते नजर आएंगे. इस खबर के सामने आते ही अर्जुन के घर और पूरे शहर के खेल प्रेमियों में जश्न का माहौल है.
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'कूच बिहार ट्रॉफी' के डबल शतक ने बदली किस्मत
बाएं हाथ के आक्रामक बल्लेबाज अर्जुन राजपूत लंबे समय से घरेलू क्रिकेट में अपनी धाक जमा रहे हैं. लेकिन उनकी किस्मत का टर्निंग पॉइंट 'कूच बिहार ट्रॉफी' बनी, जहां उन्होंने केरल के खिलाफ शानदार 200 रनों की नाबाद पारी खेली. इस धमाकेदार दोहरे शतक ने सिलेक्टर्स का ध्यान अपनी ओर खींचा और उन्हें सीधे इंडिया अंडर-19 टीम का टिकट मिल गया. अर्जुन पूर्व दिग्गज भारतीय क्रिकेटर युवराज सिंह को अपना आदर्श मानते हैं और उन्हीं की तरह मैदान पर चौके-छक्कों की बरसात करना पसंद करते हैं.
बचपन का सपना हुआ पूरा, अब ट्रॉफी पर नजर
अर्जुन ने बताया कि उन्होंने महज 6 साल की उम्र से ही बैट थाम लिया था. उन्होंने जूनियर लेवल (अंडर-14 और अंडर-16) पर भी लगातार बेहतरीन प्रदर्शन किया है. अपनी इस कामयाबी पर अर्जुन कहते हैं, "भारतीय टीम में जगह मिलना बेहद गर्व की बात है. अब मेरा अगला सपना श्रीलंका दौरे पर सीरीज जीतकर देश के लिए ट्रॉफी लाना है." अर्जुन ने अपनी इस यात्रा में माता-पिता और कोच विक्रम सिद्धू के योगदान को सबसे बड़ा बताया, जिन्होंने मुश्किल समय में कभी उनका हौसला टूटने नहीं दिया.
शुद्ध शाकाहारी डाइट से बनाई फिटनेस
आजकल जहां एथलीट्स अपनी फिटनेस और प्रोटीन के लिए नॉन-वेज डाइट पर निर्भर रहते हैं, वहीं अर्जुन ने एक अलग मिसाल पेश की है. अर्जुन पूरी तरह से शुद्ध शाकाहारी (Pure Vegetarian) हैं. उन्होंने बताया कि वह अपनी बॉडी में प्रोटीन की मात्रा और एनर्जी लेवल को बनाए रखने के लिए केवल दूध, पनीर और हरी सब्जियों का ही इस्तेमाल करते हैं.
हरभजन सिंह की एकेडमी से शुरू हुआ था सफर
अर्जुन के परिवार ने बताया कि जब अर्जुन 7 साल के थे, तब उन्होंने भारत के स्टार स्पिनर हरभजन सिंह की क्रिकेट एकेडमी में ट्रेनिंग शुरू की थी. अर्जुन के पिता ओहथी राम, जो कि एक कुल्चे की दुकान चलाते हैं, अपने बेटे की इस सफलता पर फूले नहीं समा रहे हैं. उन्होंने तमाम तंगहाली के बावजूद अपने बच्चों के सपनों से कभी समझौता नहीं किया. सिर्फ अर्जुन ही नहीं, बल्कि उनकी बहन भी बैडमिंटन खिलाड़ी हैं और खेल के मैदान में परिवार का नाम रोशन कर रही हैं.
आधी रात को पता चली खुशखबरी
अर्जुन की बहन ने बताया कि भाई के सिलेक्शन की लिस्ट रात को ही आ गई थी और अर्जुन को इसकी जानकारी मिल चुकी थी. लेकिन माता-पिता को इस बात का अहसास सुबह तब हुआ, जब सुबह-सुबह अचानक बधाई देने के लिए रिश्तेदारों और करीबियों के फोन की घंटियां बजने लगीं. बहनों ने बताया कि समाज और रिश्तेदारों के विरोध के बावजूद उनके पिता ने हमेशा अपनी बेटियों और बेटों को आगे बढ़ने के लिए पूरा सपोर्ट किया, और आज उसी त्याग का नतीजा सबके सामने है.
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