झारखंड में JPSC परीक्षा में कथित गड़बड़ी को लेकर एक ओर छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर मामले की जांच लगातार जारी है. इसी बीच मामले में अब बड़ा खुलासा हुआ है और 8 लोगों के नाम और उनके रोल के बारे में जानकारी सामने आई है. इनमें JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांगते, TDPL के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी समेत बड़े अधिकारी और कर्मचारियों के नाम शामिल है. आइए विस्तार से जानते है कौन हैं JPSC महाघोटाले के पीछे के 8 किरदार और साथ ही जानेंगे क्या रहा उनका रोल.
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1. एल. खियांगते
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं के मामले में राज्य की CID ने आयोग के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांगते को गिरफ्तार कर लिया है. सीआईडी फिलहाल इस बात की पड़ताल कर रही है कि परीक्षा आयोजित करने के लिए 'TDPL' जैसी ब्लैकलिस्टेड (काली सूची में दर्ज) कंपनी को क्यों चुना गया था. झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव रह चुके खियांगते ने 22 जुलाई, 2026 को आयोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने कहा था कि उनके इस्तीफे से मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सकेगी.
2. अभय तिवारी
इस पूरे फर्जीवाड़े का कथित मास्टरमाइंड अभय तिवारी बताया जा रहा है, जो परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी TDPL का पूर्व मार्केटिंग मैनेजर रह चुका है. जांच में खुलासा हुआ है कि अभय तिवारी ने JPSC के पूर्व अध्यक्ष को करोड़ों रुपये एडवांस देने के साथ-साथ कुल कमाई का 20% कमीशन तय किया था. इसके अलावा, उसने JSSC CGL परीक्षा के पेपर के सिलसिले में JSSC के सचिव सुधीर गुप्ता को भी 1 करोड़ 80 लाख रुपये दिए थे, जिसमें 25% कमीशन पर डील हुई थी.
हैरानी की बात यह है कि अभ्यर्थियों से पैसे लेकर सरकारी नौकरी में सेटिंग कराने वाला अभय तिवारी खुद बेहद प्रतिभाशाली रहा है और अब तक केंद्र व राज्य स्तर की 12 प्रतियोगिता परीक्षाएं पास कर चुका है. इनमें JSSC PGT टीचर (अंग्रेजी में टॉपर), JPSC सहायक वन रक्षक (ACF), JPSC वन क्षेत्र पदाधिकारी (FRO), JSSC CGL, पुलिस दरोगा, CRPF हेड कॉन्स्टेबल, BARC सहायक, नेवी (SAR), IRB कॉन्स्टेबल और NCL जैसी प्रमुख परीक्षाएं शामिल हैं। वर्तमान में वह गोड्डा जिले के पोड़ैयाहाट में 'प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी' (BSO) के पद पर कार्यरत है.
जांच एजेंसियों के अनुसार, अभय तिवारी ने इस अवैध सिंडिकेट के दम पर न सिर्फ खुद सरकारी कुर्सी हासिल की, बल्कि अपने रिश्तेदारों को भी फर्जीवाड़े के जरिए बड़े पदों पर बिठाया. उसकी पत्नी स्वीटी पांडेय फिलहाल ASO (सहायक प्रशासनिक अधिकारी) के पद पर तैनात हैं, जबकि इस घोटाले में शामिल उसके दो साले सौरव तिवारी और गौरव तिवारी, फिलहाल फरार चल रहे हैं और पुलिस उनकी तलाश में जुटी हुई है.
3. श्वेता गुप्ता
श्वेता गुप्ता JPSC में उप परीक्षा नियंत्रक के पद पर तैनात थीं और परीक्षा से जुड़े तमाम संवेदनशील व महत्वपूर्ण कार्य उन्हीं की देखरेख में संपन्न होते थे. हालांकि 22 मई को उनका तबादला खाद्य एवं आपूर्ति विभाग में कर दिया गया था, फिर भी उन्हें JPSC से रिलीव नहीं किया गया. इसके चलते, तबादले के बाद भी वह परीक्षा व्यवस्था से जुड़ी अहम जिम्मेदारियां संभालती रहीं. परीक्षा संचालन से लेकर (TDPL) एजेंसी के चयन तक की पूरी प्रक्रिया उन्हीं के मार्गदर्शन में हुई. CID की पूछताछ में उन्होंने बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि JPSC ने बिना कोई निविदा जारी किए, केवल नामांकन के आधार पर 'TDPL' एजेंसी को परीक्षा का पूरा काम सौंप दिया था.
4. सतपाल सिंह
नोएडा स्थित फर्म TDPL के निदेशक सतपाल सिंह को रांची में आयोजित झारखंड लोक सेवा भर्ती परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ी और धांधली के मामले में गिरफ्तार किया गया है. टीडीपीएल वही निजी एजेंसी है, जिसे झारखंड में सार्वजनिक क्षेत्र की भर्ती परीक्षाओं के प्रबंधन का ठेका दिया गया था. सतपाल सिंह इस एजेंसी में रामवीर सिंह के साथ सह-निदेशक (Co-Director) के रूप में कार्यरत थे. परीक्षाओं में हुई बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और पैसों के लेन-देन के आरोपों के आधार पर CID ने उनके खिलाफ मामला दर्ज कर यह कार्रवाई की है.
5. रामवीर सिंह
TDPL कंपनी के निदेशक रामवीर सिंह JPSC भर्ती परीक्षा घोटाले और अनियमितताओं के मामले में CID द्वारा गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपियों में शामिल हैं. उन पर परीक्षाओं में धांधली कराने तथा भर्ती परीक्षा का ठेका दिलाने के एवज में घूसखोरी और ठगी करने के गंभीर आरोप हैं.
6. अवध
TDPL का एक कर्मचारी है.
7. मनोज तिर्की
मनोज तिर्की JPSC में एक कर्मचारी है.
8. सोनू कुमार
सोनू कुमार भी JPSC कर्मचारी हैं.
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