Shesh Bharat: बहुमत का दम दिखाकर DK ने BJP से छीना इतना बड़ा पद, विभीषणों ने पलटी बाजी अब बीजेपी को एक और झटका!

रूपक प्रियदर्शी

• 10:01 AM • 11 Aug 2026

कर्नाटक विधान परिषद में बीजेपी-जेडीएस विधायकों की क्रॉस-वोटिंग से मिले प्रचंड बहुमत के बाद डीके शिवकुमार ने सभापति बसवराज होरट्टी से जबरन इस्तीफा करवाकर कांग्रेस का वर्चस्व स्थापित कर दिया है.

विधान परिषद में विभीषणों की सेंधमारी, डीके ने छीना सभापति का पद
विधान परिषद में विभीषणों की सेंधमारी, डीके ने छीना सभापति का पद
Google CTA

कर्नाटक में फिर कुछ ऐसा हुआ जिसने दिल्ली से लेकर बेंगलुरु तक बीजेपी की नींद उड़ा दी है. बीजेपी को घेरने सीएम डीके शिवकुमार ने फिर ऐसा चक्रव्यूह रचा जिसमें फंस गई बीजेपी. उन्होंने नया ऐसा मास्टरस्ट्रोक चला जिसने बिना कोई शोर किए बीजेपी के अभेद्य किले को ढहा दिया.  कहा जाता है कि जब डीके चाल चलते हैं, तो उसकी धमक बहुत बाद में सुनाई देती है. कर्नाटक विधान परिषद में जो कुछ भी हुआ, वह कोई सामान्य राजनीतिक बदलाव नहीं है, बल्कि यह बीजेपी के सबसे मजबूत गढ़ में एक ऐसी सर्जिकल स्ट्राइक है जिसकी भनक उसे लग भी नहीं पाई.

Read more!

कर्नाटक विधान परिषद के चेयरमैन यानी सभापति बसवराज होरट्टी ने 7 अगस्त को अपने पद से इस्तीफा दे दिया. हंगामा इसलिए मच रहा है कि सभापति बसवराज का इस्तीफा सामान्य नहीं माना जा रहा. बीजेपी ने सीएम डीके शिवकुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं लेकिन डीके ने सिर्फ ये कहकर बात खत्म कर दी कि बीजेपी को बदलती राजनीतिक हकीकत समझनी होगी. 

बसवराज होरट्टी मई 2022 में बीजेपी ज्वाइन किया

पूरे विवाद के सेंटर में हैं 80 साल के सीनियर नेता और 8 बार के एमएलसी बसवराज होरट्टी. इनका रिकॉर्ड है कि ये विधान परिषद के सबसे सीनियर नेता हैं. उनसे जितना कोई विधान परिषद सदस्य नहीं रहा. बसवराज होरट्टी ने लंबे समय तक जेडीएस में रहने के बाद मई 2022 में बीजेपी ज्वाइन किया की थी. बीजेपी ने उन्हें विधान परिषद का सभापति बनाकर सम्मानित किया. होरट्टी ने इस्तीफा देने के बाद आरोप लगाए कि कांग्रेस सरकार ने उन पर पद छोड़ने का भारी दबाव बनाया था. सीएम डीके शिवकुमार ने उन्हें बुलाकर कहा कि कांग्रेस हाईकमान चाहता है कि वो तुरंत इस्तीफा दें, नहीं तो उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जाएगा. 

बसवराज होरट्टी के इस खुलासे के बाद बीजेपी-जेडीएस ने आसमान सिर पर उठा लिया है. राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मुलाकात करके मांग की है कि उनका इस्तीफा मंजूर नहीं करें क्योंकि सीएम ने चेयरमैन के दफ्तर में जाकर जबरन इस्तीफा टाइप करवाया और उनके हस्ताक्षर लिए, जो संवैधानिक मर्यादाओं का खुला उल्लंघन है.

बीजेपी का यह गुस्सा स्वाभाविक है, क्योंकि परेशानी सिर्फ एक इस्तीफे की नहीं है. परेशानी इस बात की है कि पार्टी के अंदर मौजूद 'विभीषणों' ने ऐन वक्त पर पीठ में छुरा घोंप दिया. जब बीजेपी के चाणक्य दिल्ली में रणनीति बना रहे थे, तब बेंगलुरु में डीके शिवकुमार अपनी डायरी में बीजेपी के उन विधायकों के नाम टिक कर रहे थे जो क्रॉस वोटिंग के लिए तैयार हो चुके थे. उसी क्रॉस वोटिंग के दम पर कांग्रेस औऱ डीके शिवकुमार को कर्नाटक विधान परिषद में भी बहुमत मिल गया है. 

दिसंबर 2022 में विधान परिषद में अपना चेयरमैन बनवाया

बीजेपी ने दिसंबर 2022 में विधान परिषद में अपना चेयरमैन बनवाया था. यह कोई अचानक हुआ फैसला नहीं था, बल्कि इसके पीछे सोची-समझी रणनीति थी.  फरवरी 2021 तक विधान परिषद में कांग्रेस के प्रतापचंद्र शेट्टी चेयरमैन थे。 तब बीजेपी के पास अकेले दम पर बहुमत नहीं था. बीजेपी और जेडीएस ने हाथ मिलाया और कांग्रेस के चेयरमैन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव (No-Confidence Motion) पास कराकर उन्हें हटा दिया. गठबंधन के तहत 9 फरवरी 2021 को जेडीएस के वरिष्ठ नेता बसवराज होरट्टी को पहली बार दोनों पार्टियों के समर्थन से सर्वसम्मति से चेयरमैन बनाया गया.


बीजेपी सिर्फ जेडीएस के भरोसे भी परिषद पर नियंत्रण नहीं रखना चाहती थी. मई 2022 में तत्कालीन बीजेपी सरकार ने होरट्टी को बीजेपी में शामिल करा लिया. होरट्टी ने चेयरमैन पद और जेडीएस से इस्तीफा दे दिया और 18 मई 2022 को बीजेपी में शामिल हो गए. बीजेपी ने उनसे वादा किया था कि पार्टी उन्हें चेयरमैन बनाएगी. तब बीजेपी के पास बहुमत से ज्यादा कुल 39 का बहुमत था.

बीजेपी के चेयरमैन होने से ये हो रहा था कि जब भी कांग्रेस की सरकार विधानसभा से कोई नया कानून या नीति पास कराती थी, तो विपक्ष काउंसिल में हंगामा करके या तकनीकी कमियां निकालकर उसे रुकवा देता था. चेयरमैन के पास यह विवेकाधीन शक्ति  होती है कि वह किसी बिल पर वोटिंग कब कराए या उसे Select Committee के पास ठंडे बस्ते में भेज दे. इसके चलते कांग्रेस के कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक और राजस्व संबंधी बिल महीनों लटके रहे और सरकार को बार-बार अध्यादेश लाकर काम चलाना पड़ रहा था. अब कांग्रेस के सलीम अहमद के नया चेयरमैन और उमाश्री के डिप्टी चेयरमैन बनने से ये समस्या स्थाई रूप से दूर हो जाएगी. 

चुनाव में सबसे बड़ा झटका बीजेपी और जेडीएस को

दूसरी स्टोरी है सीएम डीके शिवकुमार के उस चाणक्य नीति की जिसके दम पर उन्होंने विधान परिषद में भी कांग्रेस को बहुमत दिला दिया. विधान परिषद (MLC) चुनावों में डीके शिवकुमार ने अपना रौब दिखाते हुए कांग्रेस को 7 में से 5 सीटें जितवाईं. इस चुनाव में सबसे बड़ा झटका बीजेपी और जेडीएस को तब लगा, जब उनके अपने विधायकों ने क्रॉस वोटिंग कराकर कांग्रेस के लिए असंभव पांचवीं सीट भी जीता दी. कांग्रेस के पास जहां अपने सिर्फ 135 वोट थे, वहीं 7 बीजेपी और 4 जेडीएस विधायकों की क्रॉस वोटिंग के दम पर कांग्रेस को कुल 151 वोट मिल गए. बीजेपी-जेडीएस आजतक पता नहीं लगा पाए कि किसने-किसने क्रॉस वोटिंग की. बीजेपी में हुई इस बड़ी बगावत और क्रॉस वोटिंग ने विधान परिषद में बीजेपी-जेडीएस की कमर तोड़ दी. 75 सदस्यीय विधान परिषद में कांग्रेस की ताकत बढ़कर 38 हो गई, जिससे उन्हें अकेले दम पर स्पष्ट बहुमत मिल गया..

बहुमत का आंकड़ा हाथ में आते ही मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 'पॉलिटिकल रिएलिटी' का हवाला देते हुए चेयरमैन को सम्मानपूर्वक पद छोड़ने की सलाह दी. हालांकि, मुख्यमंत्री ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है कि होरट्टी पर कोई दबाव बनाया गया था, उन्होंने कहा कि इस्तीफा पूरी तरह स्वैच्छिक था. अब कांग्रेस ने विधान परिषद के नए चेयरमैन के लिए वरिष्ठ नेता सलीम अहमद और डिप्टी चेयरमैन पद के लिए उमाश्री के नाम पर मुहर लगा दी है. 13 अगस्त से शुरू होने वाले मॉनसून सत्र में बसवराज होरट्टी प्रो-टर्म चेयरमैन की भूमिका निभाएंगे, जिसके बाद 14 अगस्त 2026 को नए चेयरमैन का आधिकारिक चुनाव होना तय हुआ है. साफ है कि बीजेपी में हुई क्रॉस वोटिंग का फायदा उठाकर डीके शिवकुमार ने न सिर्फ विपक्ष को पस्त किया है, बल्कि कर्नाटक के दोनों सदनों पर कांग्रेस का पूर्ण नियंत्रण भी स्थापित कर लिया है."

 75 सदस्यों वाली कर्नाटक विधान परिषद में बहुमत के लिए जादुई आंकड़ा 38 सीटों का है. पहले विधान परिषद में कांग्रेस अल्पमत में थी, लेकिन जून 2026 में हुए 7 सीटों के एमएलसी चुनाव ने पूरी बाजी पलट दी. क्रॉस वोटिंग की बदौलत कांग्रेस ने 7 में से 5 सीटें जीतकर उच्च सदन में अपनी कुल सदस्य संख्या 44 सहयोगी निर्दलीय को मिलाकर 45 पर पहुंचा दी. विपक्ष की कुल ताकत घटकर महज 30 जिसमें बीजेपी के 24 और जेडीएस 6 MLC  रह गए हैं, इसी प्रचंड बहुमत के दम पर कांग्रेस ने चेयरमैन पद पर अपना दावा ठोका और बसवराज होरट्टी को पद छोड़ना पड़ा.

मुसलमान और महिला फैक्टर को ऊपर रखा

अगले संभावित सभापति के चुनाव में कांग्रेस ने मुसलमान और महिला फैक्टर को ऊपर रखा है. सलीम अहमद कर्नाटक राजनीति के एक बेहद अनुभवी और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हैं. राजनीतिक जीवन की शुरुआत छात्र राजनीति (NSUI) और यूथ कांग्रेस से की थी. पहली बार 1996 में विधान परिषद (MLC) के सदस्य चुने गए थे और साल 2000 से 2007 तक विधान परिषद में कांग्रेस के चीफ व्हिप रह चुके हैं. केंद्र सरकार के युवा मामले और खेल मंत्रालय के तहत 'नेहरू युवा केंद्र संगठन' के महानिदेशक (Director General) और दिल्ली में कर्नाटक सरकार के विशेष प्रतिनिधि भी रहे. हुबली-धारवाड़, हावेरी और गदग स्थानीय प्राधिकरण निर्वाचन क्षेत्र से एमएलसी हैं और साथ ही कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के कार्यकारी अध्यक्ष के पद पर कार्यरत हैं. कैबिनेट विस्तार में मंत्री पद से चूकने के बाद, डीके ने उनकी वरिष्ठता और सांगठनिक क्षमता को देखते हुए उन्हें विधान परिषद के चेयरमैन पद के लिए उम्मीदवार बनाया है.

उमाश्री भारत की एक जानी-मानी एक्ट्रेस हैं जो राजनीति में आईं. कन्नड़ फिल्म उद्योग में 400 से अधिक फिल्मों में शानदार अभिनय करने और राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीतने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा.  सिद्धारमैया सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुकी हैं. महिला कोटे से  उन्हें विधान परिषद के डिप्टी चेयरमैन पद के लिए उम्मीदवार बनाया है. वो भी मंत्री बनने की दावेदार थी लेकिन डीके उन्हें डिप्टी चेयरमैन के लिए मनाने में सफल रहे. 

ये भी पढ़ें: Adani News : अमेरिकी अदालत से गौतम अडानी को राहत, आपराधिक मामला खारिज