राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ साए की तरह नजर आने वाले पूर्व एडीसी (ADC) मेजर ऋषभ सांब्याल ने अपनी समय से पहले सेवानिवृत्ति (Premature Retirement) और अपने निजी जीवन को लेकर बड़ा खुलासा किया है. 12 साल तक देश की सेवा करने के बाद हाल ही में सेना से रिटायर्ड हुए मेजर ऋषभ ने बताया कि राष्ट्रपति का एडीसी बनने के लिए उन्हें जीवन में कौन से बड़े व्यक्तिगत त्याग करने पड़े.
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राष्ट्रपति का ADC बनने का सबसे बड़ा बलिदान
एक पॉडकास्ट में अपनी जर्नी और पर्सनल लाइफ पर बात करते हुए 30 वर्षीय पूर्व एडीसी ऋषभ सांब्याल ने कहा, *"राष्ट्रपति का एडीसी बनने के लिए मेरा सबसे बड़ा व्यक्तिगत त्याग यह था कि मैंने अभी तक शादी नहीं की. नियमों के मुताबिक राष्ट्रपति के एडीसी रहते हुए आप शादी नहीं कर सकते. आपको परिवार से दूर रहना पड़ता है और एक आम इंसान की तरह घूमना-फिरना या जिंदगी एंजॉय करना संभव नहीं होता."*
उन्होंने आगे बताया कि राष्ट्रपति की सुरक्षा और प्रोटोकॉल से जुड़ी बेहद अहम जिम्मेदारियां उनके कंधों पर होती थीं. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ अपने संबंधों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि उनके और राष्ट्रपति जी के बीच मां-बेटे जैसा रिश्ता रहा है.
क्यों ली प्रीमेच्योर रिटायरमेंट?
अपनी प्रीमेच्योर रिटायरमेंट की खबरों और शादी की अफवाहों पर स्थिति साफ करते हुए मेजर ऋषभ ने बताया कि उन्होंने यह फैसला काफी सोच-समझकर और परिवार से चर्चा के बाद लिया है. उन्होंने कहा कि उनकी अपने माता-पिता और परिवार के प्रति कई जिम्मेदारियां हैं. माता-पिता से किए वादों को पूरा करने के लिए ही उन्होंने सेना से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे अभी शादी नहीं कर रहे हैं और न ही फिलहाल ऐसी कोई योजना है.
जानिए कौन हैं मेजर ऋषभ सांब्याल
जम्मू-कश्मीर के सांबा जिले के एक डोगरा राजपूत परिवार से आने वाले मेजर ऋषभ सांब्याल ने वर्ष 2013 में एनडीए (NDA) की परीक्षा पास कर भारतीय सेना में अपना सफर शुरू किया था. अपने 12 साल के सैन्य करियर के दौरान उन्होंने जाट रेजीमेंट और भारतीय सेना की प्रतिष्ठित घातक '4 पैरा स्पेशल फोर्सेस' में अपनी सेवाएं दीं और उत्कृष्ट सेवा व वीरता के लिए उन्हें 'बलिदान बैज' से भी सम्मानित किया गया. वर्ष 2021 की गणतंत्र दिवस परेड में उन्होंने जाट रेजीमेंट की टुकड़ी का सफल नेतृत्व किया था, जिसे 'बेस्ट मार्चिंग कंटिंजेंट' की ट्रॉफी से नवाजा गया. इसके बाद मार्च 2023 में उनका चयन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के एडीसी (ADC) के रूप में हुआ, जहां उन्होंने राष्ट्रपति की सुरक्षा और प्रोटोकॉल की अहम जिम्मेदारियां निभाईं और अंततः अगस्त 2026 में 12 साल की सेवा के बाद उन्होंने सेना से सेवानिवृत्ति ली.
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