हैदराबाद: बैडमिंटन के कोर्ट पर जब शटल गिरती है तो पॉइंट खत्म हो जाता है, लेकिन जिंदगी की पिच पर जब रिश्ता डगमगाता है तो उसे सहेजने के लिए सिर्फ तकनीक नहीं, बल्कि बड़ा कलेजा चाहिए होता है. भारत की बैडमिंटन क्वीन साइना नेहवाल और उनके हमसफर पारुपल्ली कश्यप ने साबित कर दिया है कि अगर इरादा पक्का हो, तो जिंदगी के किसी भी मैच में 'रिटायर्ड हर्ट' होने की जरूरत नहीं पड़ती.
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मौन प्रेम से शुरू हुआ था सफर
इस कहानी की नींव 2005 में हैदराबाद की पुलेला गोपीचंद एकेडमी में पड़ी थी. हरियाणा की बेबाक छोरी साइना और आंध्र प्रदेश के शांत स्वभाव वाले कश्यप वहां प्रतिद्वंदी नहीं, बल्कि 'शैडो पार्टनर' थे. उस दौर में एकेडमी के सख्त अनुशासन के बीच, जहां बात करने पर भी पाबंदी थी, नजरों ही नजरों में एक प्रेम कहानी शुरू हुई. करीब 10 साल तक दुनिया को लगा कि ये सिर्फ अच्छे दोस्त हैं, जबकि कश्यप की आंखों में साइना की हर जीत की चमक साफ दिखती थी.
शादी, अलगाव और वो 'कॉफी डेट'
दिसंबर 2018 में दोनों ने सादगी से शादी की. लेकिन करियर के ढलान के साथ रिश्तों में तनाव ने दस्तक दी. जुलाई 2025 में जब साइना ने सोशल मीडिया पर अपने अलग होने का ऐलान किया, तो खेल जगत सन्न रह गया. ईगो और करियर के दबाव ने उनके बीच दीवार खड़ी कर दी थी.
मगर असली 'ट्विस्ट' अभी बाकी था. अलगाव के महज तीन हफ्ते बाद अगस्त 2025 में दोनों की एक कैफे में साथ बैठी तस्वीर वायरल हुई. वहां कोई शोर नहीं था, बस दो इंसान थे जो एक-दूसरे को समझने की कोशिश कर रहे थे. हाल ही में एक इंटरव्यू में साइना ने खुलासा किया कि वे फिर से साथ हैं. कश्यप की पहल और समझदारी ने इस टूटते रिश्ते को एक नया जीवनदान दिया है.
गुरु गोपीचंद: एक और भावुक रिश्ता
साइना की जिंदगी में सिर्फ कश्यप ही नहीं, बल्कि उनके गुरु पुलेला गोपीचंद के साथ भी कई नाटकीय मोड़ आए. 2014 में जब साइना को लगा कि उन्हें एकेडमी में वो 'पर्सनल अटेंशन' नहीं मिल रहा जो पीवी सिंधु को मिल रहा है, तो उन्होंने गोपीचंद का साथ छोड़ दिया था. करीब तीन साल तक गुरु-शिष्य के बीच बातचीत बंद रही. लेकिन 2017 में चोट से टूटी साइना वापस अपने गुरु के पास लौटीं और 2018 के कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीतकर साबित किया कि वे अब भी 'क्वीन' हैं.
रिकॉर्ड्स की रानी और राजनीति का नया कोर्ट
साइना का सफर रिकॉर्ड्स से भरा रहा है:
- 2008: विश्व जूनियर चैंपियनशिप जीतने वाली पहली भारतीय.
- 2012: लंदन ओलंपिक में बैडमिंटन में भारत को पहला पदक दिलाया.
- नंबर 1: दुनिया की नंबर एक रैंकिंग हासिल करने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी.
हाल ही में स्वास्थ्य कारणों से बैडमिंटन से संन्यास लेने वाली साइना अब अपनी एकेडमी और बीजेपी की राजनीति में सक्रिय हैं. उनकी लाइफ पर परिणीति चोपड़ा अभिनीत बायोपिक भी बनी. साइना और कश्यप की यह कहानी सिखाती है कि कोर्ट पर हार से उबरना जितना जरूरी है, असल जिंदगी की दरारों को भरना उससे भी बड़ा 'गोल्ड मेडल' है.
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