महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और धांधली के खिलाफ पुणे में पिछले 10 दिनों से प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने अपना आंदोलन समाप्त कर दिया है. राज्य सरकार द्वारा छात्रों की मुख्य मांगों को स्वीकार करने और जांच समिति के गठन के ऐलान के बाद आंदोलनकारियों ने यह फैसला लिया. इस पूरे घटनाक्रम पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की प्रतिक्रिया भी सामने आई है.
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क्या था पूरा विवाद और क्यों सड़क पर उतरे छात्र?
पुणे के एस. एम. जोशी पुल पर सैकड़ों छात्र MPSC आयोग के कामकाज, पेपर लीक के आरोपों, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और आयोग के अध्यक्ष विवेक भीमनवार के इस्तीफे की मांग को लेकर धरने पर बैठे थे.
छात्रों की मुख्य मांगें कुछ यूं थीं:
- MPSC आयोग में जारी कथित धांधली और भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच.
- MPSC अध्यक्ष विवेक भीमनवार को पद से हटाना.
- विभिन्न सरकारी विभागों में खाली पड़े लगभग 70,000 पदों पर जल्द भर्ती प्रक्रिया शुरू करना.
- ग्रुप-सी (Group C) भर्ती परीक्षाओं में पदों की संख्या बढ़ाना.
- प्रदर्शनकारी छात्रों व प्रतिनिधियों पर दर्ज पुलिस केस वापस लेना.
सरकार का एक्शन: जांच समिति का गठन और अध्यक्ष छुट्टी पर
बढ़ते विरोध-प्रदर्शन और राजनीतिक दबाव के बीच महाराष्ट्र सरकार ने आंदोलनकारी छात्रों से वार्ता की. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पहल के बाद सरकार ने जांच के आदेश दिए.
- पूर्व जज की अध्यक्षता में समिति: सरकार ने सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की है, जिसमें वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे को सचिव बनाया गया है.
- MPSC अध्यक्ष छुट्टी पर गए: जांच पूरी होने तक MPSC के अध्यक्ष विवेक भीमनवार ने अपने पद से हटकर छुट्टी पर जाने का फैसला किया.
- सकारात्मक आश्वासन: राज्य सरकार के प्रतिनिधियों ने छात्रों को भरोसा दिया कि आयोग की कार्यप्रणाली को पारदर्शी बनाया जाएगा और छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की प्रक्रिया शुरू होगी.
राहुल गांधी का बयान: 'यह छात्रों और सत्यनिष्ठा की जीत है'
MPSC अभ्यर्थियों के आंदोलन का समर्थन कर रहे कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' (ट्विटर) पर पोस्ट साझा करते हुए इसे युवाओं की बड़ी जीत बताया. राहुल गांधी ने लिखा, "MPSC के अध्यक्ष को आखिर जाना पड़ा - अब भ्रष्टाचार की पूरी जांच होगी. ये छात्रों की बड़ी जीत है, ये युवाओं की बड़ी जीत है, ये सत्याग्रह की बड़ी जीत है."
10 दिनों तक चले इस व्यापक आंदोलन के खत्म होने से पुणे के परीक्षा केंद्रों और कोचिंग हब में राहत का माहौल है. हालांकि, अभ्यर्थियों का कहना है कि वे जांच समिति की 60 दिनों की रिपोर्ट और सरकार के आगामी कदमों पर नजर बनाए रखेंगे.
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