फ्लैश फ्लड में 587 मौतों ने दुनिया को हिलाया, इधर चीन ने नेपाल पर ही फोड़ा तबाही का ठीकरा !

न्यूज तक डेस्क

28 Aug 2026 (अपडेटेड: Aug 28 2026 7:17 PM)

नेपाल में प्रलयंकारी फ्लैश फ्लड से 587 मौतों के बाद चीन पर बाढ़ की पूर्व सूचना न देने के आरोप लगे हैं. चीन ने तबाही का कारण नेपाल का ग्लेशियर टूटना बताया.

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नेपाल में बाढ़ पर चीन ने दिया हैरान करने वाला जवाब.
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नेपाल में आए प्रलयंकारी फ्लैश फ्लड ने दुनिया को हिलाकर रख दिया है. सवाल उठ रहे हैं कि चीन के कब्जे वाले तिब्बत के इलाके से आने वाली बाढ़ को लेकर चीन ने कोई पूर्व सूचना नहीं दी. यदि सूचना मिल जाती तो इतनी जानें नहीं जाती. इधर मामले पर चीन सीधे-सीधे मुकर गया है. यही नहीं चीन ने मामले का ठीकरा उल्टा नेपाल पर ही फोड़ा दिया है. चीन का कहना है कि तिब्बत में नहीं बल्कि नेपाल के ऊंचाई वाले इलाके में ग्लेशियर टूटने से तबाही आई है. 

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चीन के केरूंग और नेपाल में आई बाढ़ पर शुक्रवार को चीन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों ने कई सवाल किए. इसपर चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने हैरान करने वाला जवाब दिया. जियान ने कहा कि नेपाल में आई मौजूदा आपदा का कारण ऊंचाई वाले क्षेत्र में स्थित एक ग्लेशियर का टूटना है. लिन जियान ने आगे कहा कि चीन और नेपाल के विशेषज्ञों तथा संबंधित आधिकारिक संस्थानों ने आपदा के कारणों का प्रारंभिक आंकलन किया है. उनके अनुसार, नेपाल के ऊंचाई वाले क्षेत्र में स्थित एक ग्लेशियर के टूटने के बाद यह आपदा उत्पन्न हुई. 

चीन को लेकर नेपाल में है भारी रोष

दुनिया भर के मीडिया द्वारा चीन को दोषी बताए जाने के बाद चीन ने अपनी सफाई देते हुए सरासर झूठ बोला है. नेपाल में इस बात को लेकर काफी गुस्सा है कि चीन के द्वारा पूर्व सूचना नहीं दिए जाने के कारण नेपाल में इतनी बड़ी क्षति हुई. 

अब तक मिले सभी प्रमाणों में यह साफ-साफ दिख रहा है कि यह बाढ़ चीन के कब्जे वाले तिब्बत के इलाके से आया है. नेपाल के रसुवा  से ऊपर चीन का करूंग इलाका है और इस तरफ से पानी का सैलाब नेपाल की तरफ आया, लेकिन चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने साफ-साफ झूठ बोलते हुए इसके लिए नेपाल में रहे ग्लेशियर के टूटने को कारण बताया है. 

अब तक  587 मौतें  

ध्यान देने वाली बात है कि नेपाल में बाढ़ के बाद आई भारी तबाही में अब तक 587 लोगों की मौतें हो चुकी हैं, जबकि 1,500 से अधिक लोगों का अभी भी पता नहीं चल पा रहा है. तबाही के बाद 290 भारतीय नागरिकों का भी कोई पता नहीं चल रहा है. इनकी तलाश जारी हैं. इधर त्रिशूली हाइड्रोपावर की टनल में फंसे 350 मजदूरों और कर्मचारियों को नेपाल की सेना ने निकाल लिया है. बताया जा रहा है कि इस हाइड्रोपावर में भारतीय मजदूर भी थे. 

अभी भी भीषण बाढ़ का खतरा 

नेपाल पर खतरा अभी टला नहीं है. नेपाली सरकार के प्लेनेट लैब्स और लैंडसैट की सैटेलाइट तस्वीरों की एनॉलिसिस के बाद पता चला है कि सुवागढ़ी सीमा से करीब 18 किलोमीटर ऊपर लेंडे नदी का अब बंद हो चुका है. नदी का पानी अस्थायी झील में तब्दील हो चुका है. नेपाल सरकार ने चेतावनी जारी की है कि इन प्राकृतिक झीलों में पानी इकट्‌ठा हो रहा है. इसका बांध टूटते ही निचले इलाकों में फिर बाढ़ का खतरा बना हुआ है. फिलहाल उसपर पूरी नजर रखी जा रही है. 

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