Nitin Gadkari E20 controversy: अगर आप भी E20 यानी एथेनॉल ब्लेंडिंग पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर मीम्स बनाते हैं. सोशल मीडिया पर इस पूरे मामले को लेकर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को कटघरे में खड़ा करते हैं तो आप सावधान हो जाइए. क्योंकि इस पूरे मामले को लेकर नितिन गडकरी बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंच चुके हैं. हाई कोर्ट में उन्होंने 86 पेजों की अर्जी लगाई है. उस अर्जी में उन्होंने 11 करोड़ का हरर्जाना भी मांगा है.
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केंद्रीय मंत्री गडकरी क्यों पहुंचे हाईकोर्ट ?
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का आरोप है कि सोशल मीडिया पर AI जेनरेटेड फर्जी कंटेंट को गलत तरीके से पेश कर उनकी इमेज को खराब करने का काम किया जा रहा है. इसी बात को लेकर उन्होंने 86 पेज की अर्जी लगाई है.
इसके साथ ही उन्होंने AI वाले फर्जी कंटेंट है जो उनकी इमेज को खराब करने के लिए गलत तरीके से चीजें पेश की जा रही हैं उनके खिलाफ वो अब कोर्ट पहुंचे हैं और अर्जी दायर की है. तो आपको बता दें कि बॉम्बे हाईकोर्ट में नितिन गडकरी की ओर से जो अर्जी दाखिल की गई है 86 पेजों की जो अर्जी उन्होंने लगाई है याचिका लगाई है.
नितिन गडकरी ने मेटा, एक्स, Google और YouTube के अलावा कुछ अज्ञात सोशल मीडिया यूज़र्स के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर की है. सोशल मीडिया पर AI से बने फर्जी वीडियो और तस्वीरों को हटाने की मांग है. इसके अलावा 11 करोड़ रुपए का हर्जाना भी मांगा गया है.
योजना और उससे जुड़े कथित भ्रष्टाचार से जोड़ा जा रहा- गडकरी
मामले में नितिन गडकरी का कहना है कि सोशल मीडिया पोस्ट में E 20 योजना और उससे जुड़े कथित भ्रष्टाचार से उन्हें जोड़ा जा रहा है. E 20 इथेनॉल मिश्रण योजना से उनका कोई संबंध नहीं है. यह योजना पेट्रोलियम मंत्रालय चलाता है. इसमें उन सोशल मीडिया पोस्ट का हवाला दिया गया है जिनमें E 20 पेट्रोल लाने और गाड़ियों को नुकसान पहुंचाने का जिम्मेदार गडकरी को बताया है.
यही नहीं सोशल मीडिया पोस्ट में उनके परिवार को योजना से आर्थिक फायदा पहुंचेन और भ्रष्टाचार का आरोप भी लगाया जा रहा है. याचिका में ऐसे 26 लिंक का जिक्र है. जिनमें फेस स्वैप, एआई तस्वीरों और कार्टून बनाए गए हैं.
याचिका में इन बातों का जिक्र भी
इसके अलावा नितिन गडकरी की इस लंबी चौड़ी याचिका में कई और बातों का जिक्र किया गया है. उन्होंने अपनी इस याचिका में यह भी बताया है कि E 20 एथेनॉल मिश्रण योजना है. यह पेट्रोलियम मंत्रालय के अधीन है ना कि उनके मिनिस्ट्री के अधीन आती है. इसे लेकर उन्होंने यह भी कहा है कि इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम की शुरुआत साल 2003 में हुई थी जब सरकार ने पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की नीति बनाई थी. समय के साथ यह योजना बढ़ती गई और साल 2025-26 में यह 20% मिश्रण यानी ई20 तक पहुंच गई है.
मेरे अधीन आने वाले मंत्रालय की आलोचना से ऐतराज नहीं
नितिन गडकरी का कहना है कि इस योजना को पेट्रोलियम मंत्रालय ही तैयार करता है और लागू करता है. आपको बता दें कि नितिन गडकरी ने यह भी साफ किया है कि उनके मंत्रालय के अधीन आने वाली योजनाओं की वह आलोचना से वे ऐतराज नहीं करते हैं. लेकिन वो यह भी कह रहे हैं कि E 20 जिसे हम एथेनॉल मिश्रण योजना कहते हैं इसे लेकर उनके खिलाफ एक कैंपेन चलाया जा रहा है. उनकी छवि को खराब करने की कोशिश की जा रही है.
इसमें परिवार को भी घसीटा जा रहा- गडकरी
उनका तो यह भी कहना है कि उनके परिवार को इसमें घसीटा जा रहा है. उनके परिवार पर आर्थिक फायदा लेने की बात हो रही है. भ्रष्टाचार के कथित आरोप उनपर लग रहे हैं. इस पूरे मामले को लेकर नितिन गडकरी ने अब कानूनी कदम उठा लिया है.
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