भारतीय जनता पार्टी के इतिहास में सबसे युवा अध्यक्षों में शुमार नितिन नबीन इन दिनों हर तरफ चर्चा का विषय बने हुए हैं. इतनी कम उम्र में देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी की कमान संभालना कोई छोटी बात नहीं है. हर कोई जानना चाहता है कि आखिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने उन पर इतना बड़ा भरोसा क्यों जताया? इस बीच सोशल मीडिया पर उनके कॉलेज के दिनों की एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने न सिर्फ लोगों का दिल जीत लिया बल्कि खुद पीएम मोदी ने भी इसे रीट्वीट करते हुए लिखा कि “नितिन नबीन की सादगी और सरलता हर कार्यकर्ता के लिए गर्व की बात है.
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20 की थाली और DTC बस का वो सफर
कहानी शुरू होती है साल 1998 से जब दिल्ली की चिलचिलाती गर्मी में दो दोस्त बारहवीं पास करने के बाद कॉलेज में दाखिले के लिए भटक रहे थे. एक तरफ केंद्रीय विद्यालय के पीयूष पद्माकर थे तो दूसरी तरफ सीएसकेएम स्कूल के नितिन नबीन. नितिन के पिता उस समय बिहार में सिटिंग विधायक (MLA) थे, लेकिन नितिन के व्यवहार में इस बात का रत्ती भर भी घमंड नहीं था.
पीयूष पद्माकर अपनी पोस्ट में लिखते हैं, "मई-जून के महीने में हम दोनों दिल्ली के एक ही कमरे में रहते थे. नितिन विधायक के बेटे थे, लेकिन जेब और सोच बिल्कुल आम लड़कों जैसी थी. दोपहर के लंच में हम 20 रुपये की एक थाली मंगाते थे और उसे आपस में शेयर करते थे ताकि 10 रुपये बचाए जा सकें. ऑटो की बजाय डीटीसी (DTC) बसों के धक्के खाते थे ताकि किराया बच सके. उस दौर में 50 रुपये से महंगी दिखने वाली टैक्सी में बैठने की बात तो नितिन के मुंह से कभी निकली ही नहीं. जब कभी 6-7 दोस्त कमरे पर आ जाते थे तो दोनों दोस्त इस जुगाड़ में लग जाते थे कि कम से कम पैसों में सबका पेट कैसे भरा जाए."
जब प्रॉपर्टी डीलर ने विधायक का बेटा जानकर दिखाए महंगे फ्लैट
कॉलेज शुरू होने के बाद दोस्तों ने दिल्ली के पॉश इलाके आईपी एक्सटेंशन में रहने का मन बनाया. पीयूष, नितिन और उनके दो अन्य दोस्त (विश्वजीत और सीताराम) पटपड़गंज के एक प्रॉपर्टी डीलर 'वाघवा' की दुकान पर पहुंचे. बातचीत के दौरान जब डीलर को पता चला कि नितिन के पिता बिहार की राजधानी पटना से विधायक हैं तो उसकी आंखें चमक गईं. उसने तुरंत लड़कों को महंगे और आलीशान फ्लैट्स दिखाना शुरू कर दिया. लेकिन नितिन नबीन ने जो किया वह उनके जमीन से जुड़े होने का सबसे बड़ा सबूत था.
नितिन ने तुरंत डीलर को टोकते हुए कहा, "भैया हमारा महीने का कुल बजट 2,000 है. पापा इससे एक रुपया ज्यादा नहीं देंगे. इसी 2,000 में हमें रहना, खाना और कॉलेज का आना-जाना सब मैनेज करना है.", इसके बाद भाजपा के ये युवा नेता अपने दोस्तों के साथ पश्चिम विनोद नगर के मंडावली की एक संकरी, अंदरूनी गली के कमरे में शिफ्ट हो गए.
कमरे पर झाड़ू-पोछा और बर्तन भी मांजते थे नितिन
मंडावली के उस छोटे से कमरे में जिंदगी आसान नहीं थी. मेड या नौकर रखने के पैसे नहीं थे, इसलिए चारों दोस्तों ने आपस में काम बांट रखा था. सुबह-सुबह दो दोस्त नाश्ता बनाते तो बाकी दो सफाई में जुट जाते. शुरुआती दिनों में नितिन और पीयूष की ड्यूटी एक साथ लगती थी. आज भले ही नितिन नबीन बड़े-बड़े मंचों से भाषण देते हों लेकिन एक दौर वो भी था जब वह अपने दोस्त के साथ मिलकर सिंक में जूठे बर्तन धोते थे. कमरे में झाड़ू लगाते थे और पोछा मारते थे. इसके बाद दोनों फटाफट तैयार होकर दो-दो बसें बदलकर कॉलेज पहुंचते थे.
झगड़े सुलझाने में थे एक्सपर्ट
पीयूष बताते हैं कि नितिन उस जमाने में भी चारों दोस्तों में सबसे ज्यादा अनुशासित, शांत और मिलनसार स्वभाव के थे. लड़कों के बीच जब भी कोई मनमुटाव या झगड़ा होता था तो नितिन हमेशा 'संकटमोचक' की भूमिका निभाते थे और बड़ी समझदारी से मामला शांत करा देते थे. यही अनुशासन, सादगी और हर किसी को साथ लेकर चलने का हुनर आज नितिन नबीन को राजनीति के इस शिखर पर ले आया है, जहां देश के प्रधानमंत्री भी उनकी सादगी की तारीफ करते नहीं थक रहे हैं.
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