ओडिशा में मॉब लिंचिंग: GRP कांस्टेबल सौम्य रंजन की निर्ममता से पीट-पीटकर हत्या, पुलिस पर मूकदर्शक बनने के आरोप

ओडिशा के खोरधा में छेड़छाड़ और एक्सीडेंट के आरोपों के बाद भीड़ ने GRP कांस्टेबल सौम्य रंजन स्वाइन की पीट-पीटकर हत्या कर दी. परिजनों ने पुलिस पर मूकदर्शक बनने का लगाया आरोप.

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जीआरपी कॉन्स्टटेबल सौम्य रंजन की पीट-पीटकर हत्या.

न्यूज तक डेस्क

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ओडिशा के खोरधा जिले से दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां 'मॉब लिंचिंग' (Mob Lynching) के चलते एक पुलिस कांस्टेबल को अपनी जान गंवानी पड़ी. जिले के बलियांटा थाना क्षेत्र के बेनुपुर इलाके में भीड़ ने दिन-दहाड़े एक जीआरपी (GRP) कांस्टेबल की पीट-पीटकर हत्या कर दी. घटना के बाद इलाके में भारी तनाव है और पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं. 

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कौन थे मृतक और क्या था पूरा मामला?

मृतक की पहचान सौम्य रंजन स्वाइन के रूप में हुई है, जो पिछले 12 वर्षों से कटक GRP में कांस्टेबल के पद पर तैनात थे. जानकारी के अनुसार, सौम्य रंजन अपने साथी ओम प्रकाश राउत के साथ सरकारी काम के सिलसिले में रेलवे ADG से मिलने जा रहे थे. रास्ते में बेनुपुर के पास स्थानीय युवकों के साथ उनका विवाद शुरू हो गया.

उत्पीड़न और दुर्घटना के आरोपों ने भड़काई आग 

स्थानीय लोगों का आरोप है कि कांस्टेबल और उनके साथी ने दो लड़कियों पर अभद्र टिप्पणियां (Harassment) कीं. इसके बाद, उनकी मोटरसाइकिल ने दो महिलाओं को टक्कर मार दी, जिससे वे कुछ दूर तक घिसटती चली गईं. जैसे ही यह खबर बेनुपुर में फैली, गुस्साई भीड़ वहां जमा हो गई और उन्होंने कांस्टेबल को घेर लिया. 

भीड़ ने 'पीट-पीटकर' मार डाला?

घटना का एक खौफनाक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें भीड़ सौम्य रंजन पर बेरहमी से हमला करती नजर आ रही है. सबसे चौंकाने वाला आरोप मृतक के परिवार ने लगाया है. सौम्य की मां का कहना है कि उनके बेटे को स्थानीय पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में ही मारा गया, लेकिन किसी ने उसे बचाने की कोशिश नहीं की. उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस मूकदर्शक बनकर खड़ी रही और भीड़ को कानून हाथ में लेने दिया. 

पुलिस का पक्ष और जांच 

मामले की गंभीरता को देखते हुए DCP जगमोहन मीना ने कहा कि जांच जारी है. दिलचस्प बात यह है कि दूसरे पक्ष ने भी मृतक और उनके साथी के खिलाफ छेड़छाड़ और दुर्व्यवहार की शिकायत दर्ज कराई है. पुलिस अब दोनों पक्षों के दावों और वायरल वीडियो की पड़ताल कर रही है. हालांकि, ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी वहां मौजूद थे या नहीं, इस पर अभी तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है. यह घटना एक बार फिर सवाल उठाती है कि क्या महज आरोपों के आधार पर किसी की जान लेना जायज है? 

इनपुट: अजय नाथ

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