पहलगाम हमले को आज 400 दिन पूरे हो गए हैं. NIA ने अपनी चार्जशीट सौंप दी है. मामला कोर्ट में है. बैसरन घाटी में उस दिन हुए आतंकी हमले को देश भूला नहीं है. जिन परिवारों ने अपनों को खोया उन्हें रह-रहकर बंदूकों की तड़तड़ाहट और आतंकियों की कलमा वाली बातें बेचैन करती हैं. आज भी लोगों के मन में कई सवाल हैं कि उन आतंकियों का क्या हुआ जिन्होंने बैसरन घाटी पहुंचकर हमला बोला और 26 पर्यटकों को मौत के घाट उतार दिए. कई मांगें सूनी कर दी.
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इस हमले में बैसरन घाटी में अटैक करने वाले उन तीन आतंकी फैसल जट्ट उर्फ सुलेमान, हबीब ताहिर उर्फ छोटू और हमजा अफगानी का नाम सामने आया. मामले में दो कश्मीर के दो भाइयों बशीर अहमद और परवेज अहमद का नाम भी है. इन दोनों ने उन आतंकियों को न केवल पनाह दी बल्कि खाने-पीने की चीजें मुहैया कराई उनकी कई जानकारियां भी दी. अब सवाल ये है कि इस पूरे प्लान का मास्टर माइंड कौन था?
आतंकी बात कर रहे थे... 'साजिद जट्ट भाई...'
NIA की पूछताछ में बशीर और परवेज ने बताया कि आतंकी पंजाबी टोन में बातें कर रहे थे. ये बार-बार 'साजिद जट्ट भाई...' बोल रहे थे. जांच में सामने आया कि पहलगाम का मास्टरमाइंड साजिद सैफुल्लाह जट्ट है. साजिद जट्ट पाकिस्तान के कसूर का रहने वाला है. उसके पैर में गोली लगने के कारण वह नकली पैर लगाता है इसलिए उसे लंगड़ा भी कहा जाता है. साजिद जट्ट का नाम पहले से आतंकवादियों की लिस्ट में दर्ज था. उसने लश्कर को वापस खड़ा किया था. साजिद जट्ट करीब 2005 में जम्मू-कश्मीर में घुस आया था. उसने दक्षिण कश्मीर में लश्कर-ए-तैयबा के लिए नौजवान लड़कों, ओवरग्राउंड वर्कर्स और पुराने आतंकियों को जोड़कर TRF को मजबूत बनाया.
जांच के मुताबिक, साजिद जट्ट पाकिस्तान में बैठकर इक्रि्टेड नेटवर्क के जरिए आतंकियों को लोकेशन, रास्ते, ड्रोन ड्रॉप और मूवमेंट के आदेश दे रहा था, जबकि जमीन पर मौजूद तीनों आतंकी उन्हीं निर्देशों का पालन कर रहे थे.
ऑपरेशन महादेव में 3 आतंकी ढेर
28 जुलाई 2025 को श्रीनगर के महादेव हिल्स में सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ हुई. आतंकियों के खिलाफ हमारे सुरक्षा बलों के इस ऑपरेशन को नाम दिया गया- 'ऑपरेशन महादेव'. इसकी रिपोर्ट हरवान पुलिस स्टेशन में दर्ज करवाई गई. पुलिस स्टेशन को खबर मिली कि 3 अज्ञात हथियारबंद आतंकियों ने सुरक्षा बलों पर हमला किया है. लेकिन वो तीनों ही इस मुठभेड़ में मारे गए हैं. ये भी दावा किया गया कि ये वही आतंकी हैं जो पहलगाम अटैक में शामिल थे. ये सुनते ही एजेंसियों के कान खड़े हो गए. NIA ने उन तीनों की शिनाख्त कराई. कुछ विटनेस से और जेल में बंद बशीर और परवेज से भी. ये तीनों वही थे जिन्होंने उस घिनौने हमले को अंजाम दिया था. इन आतंकियों को पहलगाम हमे के वक्त मौजूद रहे कुछ सिविलियंस ने भी पहचान लिया. सुरक्षा बलों को इनके पास से कुछ हथियार भी मिले थे, जिनमें 2 AK-47 रायफल और एक M-4 कार्बाइन भी थी. ये वही हथियार हैं जिनका इस्तेमाल पहलगाम हमले में हुआ था.
साजिद सैफुल्लाह जट्ट कहां है?
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक एक महीने पहले ही सैफुल्लह को पाकिस्तान में ट्रेस किया गया. ये वहां अपना नाम दूसरा रखकर (हबीबुल्लाह तबस्सुम उर्फ साजिद) रखा हुआ था. साजिद जट्ट वर्तमान में भारत के टॉप-3 सबसे वॉन्टेड आतंकवादियों में शामिल है और भारत सरकार ने उस पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा है.
साजिद के बेटे ने की थी उसकी पहचान
एनआईए ने चार्जशीट में साजिद जट्ट की जो तस्वीर शामिल की है, उसकी पहचान (TIP) कश्मीर में रह रहे उसके बेटे से कराई गई है. उसके बेटे ने बयान देकर पुष्टि की है कि तस्वीर में दिख रहा व्यक्ति ही उसका पिता ही है. गौरतलब है कि दक्षिण कश्मीर के कुलगाम में रहते हुए साजिद ने शब्बीरा नाम की स्थानीय महिला से शादी की थी. जिससे उसे एक बेटा भी हुआ.
3 आतंकी कैसे पहुंचे बैसरन, एक शख्स ने सबकुछ बता दिया
अब चलते हैं उस कहानी पर जिसमें एक शख्स ने NIA की बड़ी मदद की जिससे ये केस साफ होने लगा. NIA ने मामले में दुकाने वाले, पोनी वाले, ढोक में रहने वाले और टैक्सी ट्राइवर समेत कुल 1,113 लोगों से पूछताछ की. एक विटनेस ने NIA को वो बताया जिस जानकारी की उन्हें शख्स जरूरत थी.
विटनेस ने बताया- हमले के एक दिन पहले जब वो घर लौट रहा था तब बशीर अहमद के साथ उसने उन तीनों आतंकियों को देखा था. बशीर उन्हें लेकर परवेज की झोपड़ी में गया. विटनेस ने ये भी बताया कि अगले दिन यानी हमले वाले दिन जब वो बैसरन में गया था तब बशीर और परवेज वहीं थे. विटनेस को भी आतंकियों ने पकड़ लिया. उसे कलमा पढ़ने को कहा. जब विटनेस ने कलमा पढ़ लिया तो आतंकियों ने छोड़ दिया.
बशीर और परवेज की झोपड़ी में क्या कर रहे थे आतंकी?
अब सवाल ये है कि बशीर और परवेज के साथ ये आतंकी क्या कर रहे थे? अब NIA ने इन दोनों भाइयों को पकड़ा. इन्होंने जो कहानी बताई वो बेहद चौंकाने वाली थी. हालांकि NIA को लगा कि ये दोनों अभी भी कुछ छुपा रहे हैं. इसके लिए जांच एजेंसी ने नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट कराने की अर्ज़ी दी जिसे 29 अगस्त को कोर्ट ने खारिज कर दिया.
परवेज ने सुनाई उस रात की कहानी
इधर परवेज ने NIA को बताया कि 21 अप्रैल की शाम ढल रही थी. वो अपनी पत्नी ताहिरा और बेटे के साथ ढोक (झोपड़ी) में चाय पीने की तैयारी कर रहा था. तभी उसका मामा बशीर अहमद जोठाड़ वहां आया और इशारों में चुप रहने को कहा. बशीर तुरंत पलटा और बाहर गया. कुछ ही देर में वो फिर लौटा. इस बार उसके साथ 3 शख्स और थे इनमें एक छोटे कद का था. तीनों के हाथों में बंदूकें थीं. उन्होंने आते ही पानी मांगा. बोले- बहुत लंबा सफर तय करके आए हैं और थके हैं.
पानी पीने के बाद उन लोगों ने परवेज़ से कहा कि ''अल्लाह के रास्ते में लड़ने वालों'' की मदद करने पर सवाब मिलेगा. परवेज़ ने बताया कि वो तीनों लगातार जिहाद और कश्मीर की आजादी की बातें कर रहे थे. परवेज की बीवी ने उनके लिए खाना बनाया. उन्होंने खाना खाते-खाते एक आतंकी ने परवेज़ से अमरनाथ यात्रा, सुरक्षा बलों के आवाजाही और इलाके में उनकी तैनाती के बारे में बातें कर रहे थे.
बशीर को कैसे मिले आतंकी?
बशीर ने पूछताछ में बताया कि एक दिन पहले शाम को वो अपने घोड़े को देखने जंगल की तरफ जा रहा. तभी अचानक पेड़ों के पीछे से तीन हथियारबंद लोग उसके सामने आए. उनके हाथों में बंदूकें थीं. उन्होंने बशीर से कहा कि उन्हें किसी सुरक्षित जगह पर ले चले और खाने का इंतजाम करे. बशीर को तभी समझ आ गया कि वो “मुजाहिद” थे. उन तीनों ने बैग और पाउच छिपाने को दिए, जिन्हें परवेज़ ने कंबलों के नीचे छिपा दिया. तीनों करीब पांच घंटे तक ढोक यानि झोपड़ी में रुके रहे. रात करीब 10 बजे वो एक-एक करके वहां से निकल गए. जाते समय छोटे कद वाले आतंकी ने परवेज को 3000 रुपए भी दिए.
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