पेट्रोल-डीजल पर तेल कंपनियां फायदे में? फिर भी क्यों बढ़ रहे पेट्रोल-डीजल के दाम, मनीष तिवारी ने बताए चौंकाने वाले आंकड़े, उठाया ये सवाल

Petrol Diesel Price Controversy: देश में 10 दिन के भीतर चौथी बार पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने से आम जनता बेहाल है. विपक्ष का दावा है कि सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) ने वित्त वर्ष 2025-26 में 77,280 करोड़ का बंपर मुनाफा कमाया है. भारी मुनाफे के बावजूद लगातार बढ़ रही कीमतों पर अब बड़ा राजनीतिक विवाद छिड़ गया है.

Petrol Diesel price hike controversy
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राजू झा

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Petrol-Diesel Price Hike Facts: देश में पिछले 10 दिनों के भीतर चौथी बार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगी आग ने हर आम नागरिक को हैरान और परेशान कर दिया है. पेट्रोल कई शहरों में सेंचुरी लगा चुका है तो वहीं डीजल भी ₹2.71 की ताजा बढ़ोतरी के बाद 100 रुपये के आंकड़े के बेहद करीब पहुंच गया है.

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एक तरफ आम जनता इस महंगाई की मार से पीस रही है, तो दूसरी तरफ तेल कंपनियों की कमाई के आंकड़ों ने इस पूरे मामले को एक बड़े राजनीतिक और आर्थिक विवाद में बदल दिया है. आखिर जब सरकारी तेल कंपनियां रिकॉर्ड तोड़ मुनाफा कमा रही हैं तो जनता की जेब क्यों काटी जा रही है? आइए समझते हैं इसके पीछे का पूरा गणित.

77,280 करोड़ का बंपर मुनाफा, फिर भी 'दनादन' बढ़ रहे दाम

इस पूरे विवाद को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने हवा दी. मनीष तिवारी ने पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी को टैग करते हुए सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) के मुनाफे के आंकड़े सार्वजनिक किए हैं.

आंकड़ों के मुताबिक, इन तीनों कंपनियों ने वित्त वर्ष 2025-26 में कुल मिलाकर 77,280 करोड़ रुपये का जबरदस्त मुनाफा कमाया है. यह मुनाफा पिछले वित्त वर्ष (2024-25) के मुकाबले 130% से भी ज्यादा है. अगर सिर्फ जनवरी-मार्च 2026 की चौथी तिमाही (Q4) की बात करें, तो इन कंपनियों का मुनाफा 19,470 करोड़ रुपये था, जो पिछले साल की इसी अवधि से 40% अधिक है. विपक्ष का सीधा सवाल है: जब कंपनियां इतने तगड़े मुनाफे में हैं, तो फिर आम आदमी पर कीमतों का यह दमनकारी बोझ क्यों डाला जा रहा है?

''किश्तों में जेब काट रहे हैं महंगाई मानव" -राहुल गांधी

तेल के बढ़ते दामों को लेकर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, "महंगाई मानव मोदी का फिर से हमला. पेट्रोल-डीजल के दाम किश्तों में बढ़ाते हैं ताकि चुपके-चुपके आपकी जेब कटती रहे. चुनाव खत्म होते ही पेट्रोल-डीजल 8 रुपये महंगा कर दिया गया. चुनाव में वादे और बाकी समय जनता की जेब पर वार." वहीं पवन खेड़ा ने भी तंज कसते हुए कहा कि कुछ दिनों में पेट्रोल सुनार की दुकान पर सोने की तरह थैलियों में बिकेगा. दूसरी तरफ, पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सवाल उठाया कि जब रूस और ईरान हमें सस्ता कच्चा तेल देने को तैयार हैं, तो प्रधानमंत्री की क्या मजबूरियां हैं जो वे वहां से तेल नहीं खरीद रहे?

मुनाफे के बावजूद क्यों बढ़ रहे दाम? एक्सपर्ट्स ने बताई 2 बड़ी वजहें

इस मामले पर आर्थिक और पेट्रोलियम एक्सपर्ट्स का गणित थोड़ा अलग है. उनके अनुसार, तेल की कीमतें बढ़ने के पीछे मुख्य रूप से दो कारण हैं:

1. चुनावी स्थिरता की भरपाई: विधानसभा चुनावों के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें बढ़ने के बावजूद सरकार ने घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ाए थे. अब चुनाव खत्म होने के बाद कंपनियां उस दौरान हुए अपने 'राजस्व घाटे' (Revenue Loss) की भरपाई कर रही हैं.
2. पुराना कर्ज और वैश्विक संकट: एक्सपर्ट्स के मुताबिक, तेल कंपनियों पर करीब 1000 करोड़ रुपये का पुराना कर्ज था, जिसे इस मुनाफे से कम किया गया है. इसके अलावा, पश्चिम एशिया संकट (इजराइल-ईरान तनाव) और हॉर्मोज जलडमरूमध्य में नाकाबंदी के कारण वैश्विक परिवहन लागत (शिपिंग कॉस्ट) काफी बढ़ गई है.

एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि यदि ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहीं, तो देश में पांचवीं बार भी कीमतों में बढ़ोतरी होना तय है, जिसे कोई रोक नहीं पाएगा.

कच्चे तेल से आपकी गाड़ी तक: कैसे तय होती है 1 लीटर तेल की कीमत?

आम उपभोक्ताओं को यह जानना जरूरी है कि तेल कंपनियां हर दिन सुबह 6 बजे डेली प्राइस रिवीजन के तहत नए रेट जारी करती हैं. आप तक पहुंचने से पहले 1 लीटर तेल पर 5 तरह के खर्च और टैक्स जोड़े जाते हैं:

1. कच्चे तेल का बेस प्राइस (Base Price): भारत अपनी जरूरत का 90% क्रूड ऑयल आयात करता है, जिसकी कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार के बैरल रेट से तय होती है.
2. रिफाइनिंग और कंपनी मार्जिन: कच्चे तेल को देश की रिफाइनरियों में साफ करने का खर्च और कंपनियों का अपना प्रॉफिट मार्जिन इसमें जुड़ता है.
3. केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी (Excise Duty): इसके बाद केंद्र सरकार इस पर उत्पाद शुल्क और रोड सेस लगाती है, जो पूरे देश में एक समान होता है.
4. डीलर कमीशन: तेल कंपनियां जिस रेट पर पेट्रोल पंप मालिकों (डीलर्स) को ईंधन बेचती हैं, उसमें डीलर्स का निश्चित कमीशन जोड़ा जाता है.
5. राज्य सरकार का वैट (VAT): सबसे आखिर में राज्य सरकारें अपने हिसाब से वैट या लोकल सेल्स टैक्स जोड़ती हैं. चूंकि हर राज्य का वैट अलग होता है, इसीलिए दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे शहरों में कीमतें अलग-अलग होती हैं.

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