देश आज अपनी आजादी का 80वां वर्षगांठ मना रहा है. इस ऐतिहासिक मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के लाल किले की प्राचीर से तिरंगा फहराया और राष्ट्र को संबोधित किया. अपने भाषण में पीएम मोदी ने आत्मनिर्भर भारत के रोडमैप को सामने रखते हुए कहा कि भारत अब दूसरे देशों के भरोसे नहीं बैठा है. 140 करोड़ देशवासियों की सामूहिक ताकत जिस रफ्तार से आगे बढ़ रही है, उसे अब रोकना नामुमकिन है.
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प्रधानमंत्री ने अपने पिछले 12 सालों के कार्यकाल के आंकड़े साझा करते हुए बताया कि भारत हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयां छू रहा है. वहीं, युवाओं के लिए एक बड़ा ऐलान करते हुए उन्होंने कहा कि आने वाले एक साल के भीतर 1 करोड़ युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) स्किल्स की ट्रेनिंग दी जाएगी और छात्रों के लिए बेहतर ऑनलाइन कोचिंग की व्यवस्था शुरू होगी.
12 सालों में बदला भारत का मैन्युफैक्चरिंग चेहरा
देश के विकास का लेखा-जोखा पेश करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते एक दशक में भारत ने हर सेक्टर में बड़ी छलांग लगाई है:
- मोबाइल उत्पादन: 33 गुना की रिकॉर्ड बढ़ोतरी.
- आधुनिक रेलवे कोच: निर्माण में 21 गुना का उछाल.
- इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग: 7 गुना इजाफा.
- खादी एवं ग्रामोद्योग: उत्पादन में लगभग 5 गुना तेजी.
- डिफेंस सेक्टर: रक्षा उत्पादन करीब 4 गुना बढ़ा.
पीएम ने साफ कहा कि डिजिटल टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के बल पर आज भारत ने पूरी दुनिया में अपनी एक अलग पहचान कायम की है.
चिप से लेकर गाड़ियों तक, सेमीकंडक्टर का हब बनेगा भारत
आधुनिक दुनिया की रीढ़ बन चुके सेमीकंडक्टर चिप्स पर बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि चाहे बात इलेक्ट्रॉनिक सामान की हो, मेडिकल डिवाइस की या ट्रांसपोर्ट सिस्टम की- आज बिना सेमीकंडक्टर के कुछ संभव नहीं है.
उन्होंने बताया कि भारत में तीन बड़े सेमीकंडक्टर प्लांट्स पहले ही काम शुरू कर चुके हैं और यहां बने चिप्स का अब निर्यात (एक्सपोर्ट) भी होने लगा है. इतना ही नहीं, अगले 7 से 8 वर्षों में देश के भीतर 5 से 8 नए सेमीकंडक्टर प्लांट्स पर काम शुरू करने की योजना है.
मैन्युफैक्चरिंग के लिए 'शक्ति की सप्तधारा' का मंत्र
ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की स्थिति मजबूत करने के लिए पीएम मोदी ने 'शक्ति की सप्तधारा' का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि भारत को अब केवल असेंबलिंग तक सीमित नहीं रहना है. छोटे से पुर्जे से लेकर बड़े-बड़े पेचीदा प्रॉडक्ट्स का डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग- पूरी वैल्यू चेन भारत के भीतर ही तैयार होनी चाहिए. दुनिया का भरोसा जीतने के लिए हमें उत्पादन की लागत, गुणवत्ता और स्केल (मात्रा) के वैश्विक पैमानों पर खरा उतरना होगा.
ग्लोबलाइजेशन भूला जग, संसाधनों को बनाया जा रहा हथियार
दुनिया की मौजूदा परिस्थितियों पर गहरी चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि अब कोई ग्लोबलाइजेशन की बात नहीं करता. जिन देशों से पहले ग्लोबलाइजेशन के सुर निकलते थे वे अब चुप हैं.
"दुर्भाग्य से इस संकट के दौर में संसाधनों को 'वेपनाइज' (हथियार की तरह इस्तेमाल) करने का खेल चल रहा है. आज पेट्रोल, डीजल, खाद, दवाइयां और यहां तक कि जमीन का भी इस्तेमाल हथियार की तरह किया जा रहा है. अगर हमने पिछले 10 सालों में आत्मनिर्भरता का रास्ता न चुना होता, तो आज इन वैश्विक संकटों के आगे टिक पाना बेहद मुश्किल होता."
देश बाढ़ पीड़ितों के साथ, 'स्वदेशी' बना जन-आंदोलन
देश के कई राज्यों में आई हालिया बाढ़ का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार और पूरा देश संकट की इस घड़ी में प्रभावित परिवारों के साथ मजबूती से खड़ा है. भाषण के अंत में उन्होंने 'मेक इन इंडिया', 'वोकल फॉर लोकल' और 'स्वदेशी' को आज के भारत का मूलमंत्र बताया. पीएम ने कहा कि जब हमारे संकल्प मजबूत होते हैं, तो बड़ी से बड़ी आपदाओं के बीच से भी रास्ते निकल आते हैं. भारत के सपने और संकल्प दोनों ही ऊंचे हैं और देश इसी दिशा में लगातार आगे बढ़ता रहेगा.
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