CBSE-Rahul Gandhi Fight: क्या है COEMPT कंपनी जिसपर राहुल गांधी ने उठाए सवाल? तेलंगाना में भी एक पुराने विवाद से है इसका नाता

सीबीएसई बोर्ड परीक्षा 2026 के डिजिटल मूल्यांकन को लेकर राहुल गांधी और सीबीएसई के बीच जंग छिड़ गई है. जानिए क्या है कोएमप्ट (COEMPT) एडटेक कंपनी, जिसपर राहुल गांधी ने गंभीर आरोप लगाए हैं और इसका 2019 के तेलंगाना परीक्षा विवाद से क्या संबंध है.

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राहुल गांधी ने CBSE और सरकार पर उठाए कई सवाल.

निधि तनेजा

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देश में जब भी परीक्षाओं के सिस्टम में वेंडर या प्राइवेट कंपनियों की एंट्री होती है, तो छात्रों का भविष्य अक्सर अधर में लटक जाता है. पिछले साल एसएससी (SSC) परीक्षाओं में वेंडर के स्तर पर हुई तकनीकी खामियों का विवाद अभी थमा भी नहीं था कि अब देश के सबसे भरोसेमंद बोर्ड, सीबीएसई (CBSE) में भी वेंडर को लेकर बड़ा बवाल खड़ा हो गया है.

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इस बार यह मोर्चा कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने संभाला है. राहुल गांधी ने सीबीएसई परीक्षा 2026 की कॉपियों के डिजिटल मूल्यांकन (Digital Evaluation) में बड़े पैमाने पर हुई गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए 'कोएमप्ट' (COEMPT) नाम की एक प्राइवेट एडटेक कंपनी पर गंभीर सवाल उठाए हैं. राहुल गांधी के इन तीखे आरोपों के बाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक 'सीबीएसई बनाम राहुल गांधी' की जंग छिड़ गई है.

क्या है COEMPT एडटेक कंपनी और क्या है विवाद? 

कोएमप्ट (COEMPT Edutech) एक एग्जाम टेक्नोलॉजी कंपनी है जो डिजिटल मूल्यांकन, ऑनलाइन टेस्टिंग, आंसर बुक डिजिटाइजेशन और ऑन-स्क्रीन मार्किंग जैसी सेवाएं देती है. सीबीएसई ने साल 2026 की बोर्ड परीक्षाओं की कॉपियों को जांचने (On-Screen Marking System) के लिए इस कंपनी के 'ऑनमार्क' (OnMark) प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया था.

यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब 19 साल के एक छात्र निसर्ग अधिकारी ने इस सिस्टम में गंभीर कमियां उजागर कीं. उसने दावा किया कि कोएमप्ट के इस ऑन-स्क्रीन मार्किंग पोर्टल की सुरक्षा में इतनी बड़ी चूक थी कि इसे आसानी से ब्रीच (हैक) करके किसी भी छात्र के नंबर बदले जा सकते थे. 

राहुल गांधी ने दागे सरकार और सीबीएसई पर 4 सवाल 

राहुल गांधी ने इस मामले को लेकर सरकार और सीबीएसई को घेरते हुए चार तीखे सवाल पूछे हैं:  

  • कोएम्प्ट को CBSE का ठेका क्यों और किसके कहने पर दिया गया?
  • कौन-कौन से नियम और प्रक्रिया दरकिनार करके इस कंपनी को ये ठेका दिया गया?
  • कोएम्प्ट पहले Globarena के नाम से विवादों में घिर चुकी है, ये CBSE को क्यों नहीं पता चला? Background checks क्यों नहीं किए गए?
  • कोएम्प्ट प्रबंधन और मोदी सरकार के बीच आखिर क्या संबंध हैं?

राहुल गांधी ने इस पूरे डिजिटल मूल्यांकन घोटाले की सच्चाई सामने लाने के लिए एक स्वतंत्र न्यायिक जांच और एसआईटी (SIT) गठन करने की मांग की है. राहुल ने कहा कि जब पूरा सिस्टम किसी प्राइवेट वेंडर के भरोसे छोड़ दिया जाता है, तो सरकारी एजेंसियां सिर्फ मूकदर्शक बनकर रह जाती हैं. 

सीबीएसई और कंपनी ने आरोपों पर दी ये सफाई 

राहुल गांधी के आरोपों पर पलटवार करते हुए सीबीएसई ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है. सीबीएसई का कहना है कि यह आरोप भ्रामक और तथ्यों से परे हैं. बोर्ड ने सफाई दी कि 28 अगस्त 2025 को सरकारी पोर्टल (GeM) पर पूरी पारदर्शिता के साथ टेंडर मांगे गए थे और जनरल फाइनेंशियल रूल्स (GFR) का पालन करते हुए ही कोएमप्ट को यह कॉन्ट्रैक्ट दिया गया था.

वहीं दूसरी ओर, कोएमप्ट कंपनी के सीईओ वीएसए राजू ने भी सफाई पेश करते हुए कहा कि उनका सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित है और इसमें कोई समझौता नहीं हुआ है. उन्होंने बताया कि इस कॉन्ट्रैक्ट की रेस में टीसीएस (TCS) जैसी दिग्गज कंपनियां भी शामिल थीं, लेकिन पारदर्शी ई-बिडिंग के जरिए उन्हें यह काम मिला. 

2019 का तेलंगाना विवाद: हजारों छात्र हुए थे फेल

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि कोएमप्ट एडटेक कंपनी पहले 'ग्लोबरेना टेक्नोलॉजीज' (Globarena Technologies) के नाम से काम करती थी. साल 2019 में इस कंपनी ने तेलंगाना स्टेट बोर्ड ऑफ इंटरमीडिएट एजुकेशन की 12वीं की परीक्षा के नतीजों में बहुत बड़ी तकनीकी और प्रशासनिक गड़बड़ी की थी.

उस समय सॉफ्टवेयर की कोडिंग में खराबी और ओएमआर (OMR) शीट की स्कैनिंग में हुई भयंकर त्रुटियों के कारण हजारों होनहार छात्रों को कई विषयों में 'जीरो नंबर' दे दिए गए थे और कई को 'एब्सेंट' घोषित कर दिया गया था. भारत के इतिहास के उस सबसे बड़े शैक्षणिक विवाद के कारण तेलंगाना में भारी विरोध प्रदर्शन हुए थे. हालांकि, कोएमप्ट के सीईओ का दावा है कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक गया था, लेकिन कंपनी के खिलाफ कोई गड़बड़ी साबित नहीं हुई थी. 

फिलहाल, इस पूरे मामले पर देश के छात्रों और अभिभावकों की नजरें टिकी हुई हैं कि क्या सीबीएसई का डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर वाकई सुरक्षित है या देश के करोड़ों छात्रों का भविष्य वेंडर्स के चक्रव्यूह में फंस चुका है. 

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