कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को इंडियन स्टेट से जुड़ी उनकी एक विवादित टिप्पणी के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है. कोर्ट ने राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग वाली याचिका को शुक्रवार को सिरे से खारिज कर दिया.
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यह पूरा मामला राहुल गांधी के उस बयान से शुरू हुआ था जिसमें उन्होंने बीजेपी और आरएसएस के साथ-साथ इंडियन स्टेट का जिक्र किया था.
क्या था राहुल गांधी का वो बयान?
मामला 15 जनवरी 2025 का है. दिल्ली में कांग्रेस के नए मुख्यालय इंदिरा भवन के उद्घाटन समारोह के दौरान राहुल गांधी कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे. संबोधन के दौरान उन्होंने अपने भाषण में कहा था,
'यह मत सोचिए कि हम कोई सामान्य या निष्पक्ष लड़ाई लड़ रहे हैं. अगर आपको लगता है कि हमारी लड़ाई सिर्फ बीजेपी या आरएसएस जैसे राजनीतिक संगठनों से है तो आप गलत समझ रहे हैं. बीजेपी और आरएसएस ने देश की हर संस्था पर कब्जा कर लिया है. अब हमारी लड़ाई सिर्फ उनसे नहीं बल्कि इंडियन स्टेट से है.'
राहुल गांधी के इसी इंडियन स्टेट शब्द पर सियासी घमासान मच गया था. बीजेपी ने इसे देशविरोधी बयान करार देते हुए आरोप लगाया था कि राहुल गांधी सीधे तौर पर भारत राष्ट्र और उसकी संवैधानिक संस्थाओं को चुनौती दे रहे हैं.
निचली अदालत से हाईकोर्ट तक का सफर
राहुल गांधी के इस बयान के खिलाफ सिमरन गुप्ता नाम की महिला ने पहले संभल की चंदौसी कोर्ट में याचिका दायर कर राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की. 7 नवंबर 2025 को चंदौसी कोर्ट ने सिमरन गुप्ता की दलीलों को अपर्याप्त मानते हुए याचिका खारिज कर दी.
वहीं निचली अदालत के फैसले से असंतुष्ट होकर सिमरन गुप्ता ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. 8 अप्रैल 2026 को इलाहाबाद हाईकोर्ट में इस मामले पर लंबी बहस हुई जिसके बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.
क्यों मिली राहत?
शुक्रवार यानी 1 मई को को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ओपन कोर्ट में अपना फैसला सुनाते हुए सिमरन गुप्ता की याचिका को खारिज कर दिया. कोर्ट ने चंदौसी कोर्ट के पुराने फैसले को बरकरार रखा. अब कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि कोर्ट ने भाषण की स्वतंत्रता और राजनीतिक आलोचना के दायरे को ध्यान में रखते हुए ये फैसला लिया है. इस फैसले के बाद अब राहुल गांधी के खिलाफ इस मामले में कानूनी कार्रवाई की तलवार हट गई है
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