रुपाली चाकणकर के लिए मुसीबत बना अश्लील CD वाला अशोक खरात, जानें वे बाबा के चक्कर कैसे फंसी?

Rupali Chakankar Controversy: महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है, जब महिला आयोग की अध्यक्ष रूपाली चाकणकर की तस्वीरें आरोपी बाबा अशोक खरात के साथ सामने आईं. 58 वीडियो वाले इस केस ने सियासी भूचाल ला दिया है. अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर सच्चाई क्या है और जिम्मेदारी किसकी बनती है.

Rupali Chakankar Controversy
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कीर्ति राजोरा

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Rupali Chakankar Controversy: महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों एक बड़ा विवाद छाया हुआ है और इसके केंद्र में हैं रूपाली चाकणकर. रूपाली फिलहाल महाराष्ट्र महिला आयोग की अध्यक्ष हैं, लेकिन हालात ऐसे बन गए हैं कि उनके पद पर बने रहने को लेकर सवाल उठने लगे हैं. दरअसल, उनकी कुछ तस्वीरें सामने आई हैं, जिनमें वह स्वयंभू धर्मगुरु अशोक खरात के लिए कहीं छाता पकड़े और कहीं पाद्य पूजन करती नजर आ रही हैं. यही अशोक खरात है, जिसके 58 अश्लील वीडियो सामने आने के बाद राज्य की राजनीति में हड़कंप मचा हुआ है. अब विपक्षी नेता और महिला संगठन सवाल उठा रहे हैं कि ऐसे आरोपी के साथ महिला आयोग की अध्यक्ष की नजदीकियां कैसे हो सकती हैं. इसी वजह से रूपाली चाकणकर के इस्तीफे की मांग भी तेज हो गई है. हालांकि, यह पहला मौका नहीं है जब उनका नाम विवादों में आया हो, लेकिन इस बार मामला ज्यादा बड़ा और गंभीर माना जा रहा है. क्या है पूरा मामला, कौन है रूपाली चाकणकर, जो अजित पवार और सुनेत्रा पवार की हैं बेहद करीबी. बताएंगे विस्तार से चर्चित चेहरा के इस एपिसोड में तो बने रहें वीडियो के आखिर तक.

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कौन है अशोक खरात? जानें उनका सफर

रूपाली के बारे में समझने से पहले कथित बाबा अशोक खरात के बारे में समझना जरूरी है क्योंकि विवाद की जड़ यही शख्स है. धार्मिक आस्था, दैवीय शक्ति और मंत्र तंत्र के सहारे 67 साल के अशोक खरात ने भक्तों की फौज बना रखी है. महाराष्ट्र के कई बड़े राजनेता, सेलिब्रिटी और उद्योगपति इस भविष्यवक्ता के फॉलोअर हैं. रिपोर्ट्स की मानें तो इनमें कई सेलिब्रिटी महिलाएं भी शामिल हैं. अशोक सिन्नर तालुका के मिरगांव में बनाए गए श्री ईशान्येश्वर मंदिर ट्रस्ट का चेयरमैन है. इस मंदिर को श्री शिवनिका संस्थान के नाम से भी जाना जाता है, जहां बड़े-बड़े लोग कई मौकों पर अशोक खरात की पाद्य पूजा यानी पैर पूजने की रस्म कर चुके हैं. हाल की गिरफ्तारी से पहले कैप्टन अशोक खरात के एक वायरल वीडियो पर विवाद हुआ था. इस वीडियो में खरात धार्मिक रस्म के बहाने एक महिला के सिर पर तांबा रखने के बाद अश्लील हरकत करते हुए नजर आया.

58 वीडियो, रेप और ब्लैकमेल के आरोप

उसके खिलाफ एक महिला ने ब्लैकमेल और दो साल तक रेप के आरोप लगे, जिसके बाद अशोक खरात को 18 मार्च को नागपुर पुलिस ने गिरफ्तार किया. अब कोर्ट ने आरोपी बाबा को 24 मार्च तक पुलिस हिरासत में भेज दिया. नागपुर पुलिस के मुताबिक, जांच के दौरान उसके पास से पेन ड्राइव बरामद की गई, जिसमें 58 सनसनीखेज वीडियो हैं, जिनमें कुछ मशहूर महिलाएं और सेलिब्रिटीज की तस्वीरें बताई जा रही हैं. राजनीतिक विवाद महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रूपाली चाकणकर की वीडियो और तस्वीर सामने आने के बाद हुआ. एक तस्वीर में चाकणकर आरोपी ज्योतिष अशोक खरात के लिए छाता पकड़े हुए नजर आ रही हैं तो दूसरी में पाद्य पूजन यानी पैर पूजने की रस्म करते हुए. अब सवाल ये उठ रहे कि एक महिला आयोग की अध्यक्ष, जिसका काम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करना है, वो ऐसे व्यक्ति के साथ सार्वजनिक रूप से धार्मिक अनुष्ठानों में कैसे शामिल हो सकती हैं, जिस पर यौन शोषण के आरोप लग रहे हैं.

विपक्ष ने की कार्रवाई और इस्तीफे की मांग

सबसे तीखा बयान सपकाल का रहा, जिन्होंने अशोक खरात की तुलना आसाराम बापू से करते हुए कहा कि ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. कांग्रेस का कहना है कि रूपाली चाकणकर आरोपी अशोक के शिवनिका संस्थान की ट्रस्टी भी हैं. इस वक्त कांग्रेस और गुलाबी गैंग रूपाली के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं. शिवसेना यूबीटी की नेता सुषमा अंधारे ने भी आरोप लगाया कि रूपाली चाकणकर ने अपने रसूख का इस्तेमाल कर पहले भी इस तरह के आरोपों को दबाने की कोशिश की थी. अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा यही हो रही है कि जिस व्यक्ति के संबंध एक आरोपी बाबा से हों, उससे महिलाओं को न्याय दिलाने की उम्मीद नहीं की जा सकती. वहीं इन आरोपों के बीच रूपाली चाकणकर ने सफाई दी कि उनका शिवनिका ट्रस्ट से जुड़ाव केवल सामाजिक कार्यों के लिए था. रूपाली ने कहा है कि उन्हें अशोक खरात की निजी जिंदगी या उनके खिलाफ लगे आरोपों की कोई जानकारी नहीं थी. उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें पुलिस जांच पर पूरा भरोसा है और सच्चाई सामने आएगी.

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कैसे बनीं महिला आयोग की अध्यक्ष?

वैसे बता दें कि रूपाली चाकणकर का राजनीतिक सफर भी दिलचस्प रहा है. रूपाली ने रायत एजुकेशन संस्थान के साधना कॉलेज से पढ़ाई की और कॉम्पिटिटिव एग्जाम की तैयारी भी की लेकिन सफलता नहीं मिली. फिर राजनीति में उनकी एंट्री उनके ससुराल के जरिए हुई, उनकी सास रुक्मिणी चाकणकर एनसीपी की पार्षद थीं और यहीं से रूपाली की राजनीतिक यात्रा शुरू हुई. 2002 से उन्होंने महिला स्वयं सहायता समूहों के साथ काम किया और धीरे-धीरे संगठन में सक्रिय होती गईं. बाद में उन्हें खड़कवासला विधानसभा क्षेत्र का अध्यक्ष बनाया गया, जो उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ.

एनसीपी कनेक्शन और बड़े नेताओं से नजदीकियां

2019 के विधानसभा चुनावों से पहले जब एनसीपी की महिला प्रदेश अध्यक्ष चित्रा वाघ भाजपा में शामिल हो गईं, तब पार्टी को नए चेहरे की जरूरत थी. ऐसे समय में सुप्रिया सुले ने रूपाली चाकणकर को महिला प्रदेश अध्यक्ष के रूप में चुना. यह फैसला कई लोगों के लिए चौंकाने वाला था, क्योंकि चाकणकर तब तक राज्य स्तर की बड़ी नेता नहीं मानी जाती थीं लेकिन इस फैसले ने उनकी राजनीतिक पहचान को मजबूत किया. कुछ विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि रूपाली चाकणकर को महिला आयोग का अध्यक्ष उनके काबिलियत से ज्यादा खूबसूरती के आधार पर बनाया गया. राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा का विषय रहा है कि रूपाली चाकणकर के संबंध एनसीपी के दोनों धड़ों से अच्छे रहे हैं. अजित पवार के नेतृत्व वाले गुट के साथ भी उनके संबंध अच्छे बताए जाते हैं. यहां तक कि अजित पवार के निधन के बाद भी उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार के साथ रूपाली चाकणकर कई सार्वजनिक कार्यक्रमों से तस्वीरें सामने आई.

पहले भी विवादों में रही हैं रूपाली, उठ रहे सवाल

यह पहली बार नहीं है जब रूपाली चाकणकर विवादों में आई हैं. 2023 में उन्होंने एक बयान दिया था कि लड़कियां प्यार में पड़कर घर से भाग रही हैं, जिसका कारण मोबाइल फोन और माता-पिता से संवाद की कमी है. इस बयान की भी काफी आलोचना हुई थी. इस पूरे विवाद का सबसे अहम पहलू यह है कि रूपाली चाकणकर पर सीधे तौर पर कोई आपराधिक आरोप तो नहीं है लेकिन सवाल उनकी नैतिक जिम्मेदारी का जरूर उठ रहा है. क्या एक महिला आयोग की अध्यक्ष को ऐसे व्यक्ति से दूरी नहीं रखनी चाहिए थी, जो खुद को भगवान या भगवान का दूत बताकर लोगों पर प्रभाव डालता हो? अब एक तरफ उनका लंबा सामाजिक और राजनीतिक सफर है, जिसमें उन्होंने जमीनी स्तर से ऊपर तक का सफर तय किया. दूसरी तरफ मौजूदा विवाद है, जिसने उनकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

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