सैम पित्रोदा का CJP को समर्थन, ऐसा क्या कहा कि फिर हुआ विवाद? इतनी चर्चा क्यों?

राजू झा

02 Sep 2026 (अपडेटेड: Sep 2 2026 9:56 AM)

इंडियन ओवरसीज कांग्रेस प्रमुख सैम पित्रोदा द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अभद्र भाषा के इस्तेमाल का बचाव करने और धर्म-संस्थाओं पर सवाल उठाने से नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है, जिसने आगामी राज्य विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा दी हैं.

सैम पित्रोदा
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इंडियन ओवरसीज कांग्रेस (IOC) के अध्यक्ष सैम पित्रोदा एक बार फिर अपने बयानों को लेकर विवादों के घेरे में आ गए हैं. शिकागो से दिए एक हालिया इंटरव्यू में पित्रोदा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों के दौरान इस्तेमाल की गई अभद्र भाषा को नजरअंदाज करने लायक बताया है. इसके अलावा उन्होंने देश में जारी धार्मिक बहसों, संस्थाओं की निष्पक्षता और राम-हनुमान के मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी है, जिससे एक बार फिर राजनीतिक पारे के चढ़ने के आसार हैं.

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PM मोदी के खिलाफ टिप्पणी पर क्या बोले पित्रोदा?

हाल ही में नई दिल्ली में 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) और युवाओं द्वारा किए गए प्रदर्शन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया गया था. इस पर सैम पित्रोदा ने युवा प्रदर्शनकारियों का बचाव करते हुए कहा कि इसे छात्रों और युवाओं की गहरी निराशा व हताशा के संदर्भ में देखा जाना चाहिए.

पित्रोदा ने कहा, "प्रधानमंत्री का पद विशेषाधिकार वाला है और मैं उनका अपमान नहीं करना चाहता. लेकिन अगर कोई ऐसी भाषा का इस्तेमाल करता है, तो वे सचमुच परेशान हैं [01:28]. लोग यह सब फैशन के लिए नहीं करते, बल्कि भविष्य न दिखने की हताशा में करते हैं. थोड़ी बहुत गाली-गलौज ठीक है, मुझे पसंद नहीं है, लेकिन ये हमारे बच्चे हैं."

सिर्फ राम और हनुमान पर अटकी बहस से देश का विकास नहीं

धर्म और मंदिरों को लेकर हो रही राजनीति पर सैम पित्रोदा ने कहा कि देश में लगातार धार्मिक मतभेदों को बढ़ावा दिया जा रहा है. असली मुद्दे जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और विज्ञान पीछे छूटते जा रहे हैं.

उन्होंने कहा कि लगातार राम और हनुमान जी का नाम लेकर तू-तू मैं-मैं में उलझे रहना युवा पीढ़ी को सही दिशा नहीं दे सकता. पित्रोदा के मुताबिक, जब तक असल मुद्दों पर बात नहीं होगी, तब तक देश का सही विकास मुमकिन नहीं है.

संवैधानिक संस्थाओं और नक्सलवाद पर टिप्पणी

स्वतंत्रता पर सवाल: सैम पित्रोदा ने दावा किया कि देश की न्यायपालिका, चुनाव आयोग और जांच एजेंसियां (ED) अब स्वतंत्र नहीं रह गई हैं.

  • 'दिमागी नक्सलवाद' पर बयान: प्रधानमंत्री मोदी के 'दिमागी नक्सल' वाले बयान पर उन्होंने कहा कि गरीबों, दलितों और अल्पसंख्यकों के हक की बात करना नक्सलवाद नहीं, बल्कि इंसानियत है.
  • संस्थाओं का निर्माण: उन्होंने कहा कि पिछले 70 वर्षों में बनी संस्थाओं के मुकाबले पिछले 14 सालों में कोई मजबूत नई संस्था नहीं बन सकी है.

सैम पित्रोदा का विवादों से पुराना नाता

यह पहला मौका नहीं है जब सैम पित्रोदा के बयानों से कांग्रेस की किरकिरी हुई हो. इससे पहले भी वे कई बार अपनी बयानबाजी को लेकर चौतरफा घिर चुके हैं:

  • विरासत कर (Inheritance Tax - 2024): चुनाव के दौरान अमेरिका के 'इन्हेरिंंटेंस टैक्स' का जिक्र कर पित्रोदा ने भारत में भी इस पर चर्चा की पैरवी की थी, जिस पर भारी सियासी बवाल हुआ था.
  • 1984 सिख विरोधी दंगे: 1984 के दंगों पर पूछे गए सवाल पर पित्रोदा का "हुआ तो हुआ" वाला बयान खासा विवादित रहा था.
  • पुलवामा हमला व एयरस्ट्राइक (2019): बालाकोट एयरस्ट्राइक पर सवाल उठाते हुए उन्होंने पूरे देश (पाकिस्तान) पर हमला करने की रणनीति को गलत बताया था.
  • चुनाव आयोग पर आरोप (2025): उन्होंने भारतीय चुनाव आयोग पर चुनावी हेरफेर (Manipulation) के आरोप लगाए थे.

आगामी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब विधानसभा चुनावों से ठीक पहले आया सैम पित्रोदा का यह बयान कांग्रेस के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है या नहीं, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा.

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