जंतर-मंतर पर हुए ऐतिहासिक छात्र आंदोलन का प्रमुख चेहरा और प्रसिद्ध आरटीआई एक्टिविस्ट व स्वतंत्र खोजी पत्रकार सौरव दास एक बार फिर सुर्खियों में हैं. सौरव दास के पुडुचेरी स्थित पारिवारिक घर पर स्थानीय पुलिस की टीम पहुंची और परिवार के लोगों से पूछताछ की. इस घटनाक्रम के बाद सौरव दास ने सत्ता में बैठे लोगों पर निशाना साधते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं और इसे अपने परिवार का मानसिक उत्पीड़न करार दिया है. विस्तार से जानिए मामले की पूरी कहानी.
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गृह मंत्री अमित शाह के दौरे से जोड़ा पुलिस की कार्रवाई का कनेक्शन
सौरव दास के अनुसार, बुधवार 12 अगस्त 2026 की शाम करीब 5:00 बजे पुडुचेरी स्थित उनके फैमिली होम पर अचानक पुलिस पहुंची. पुलिस ने घर में मौजूद उनके रिश्तेदारों और परिजनों को घेर लिया और उनसे कई तरह के सवाल-जवाब किए. सौरव दास ने इस पुलिसिया कार्रवाई का सीधा संबंध केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हालिया पुडुचेरी दौरे से जोड़ा है. उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस के आने से महज दो दिन पहले गृह मंत्री पुडुचेरी में थे, जहां उन्होंने राज्य के गृह मंत्री और उपराज्यपाल के साथ बैठक की थी. सौरव ने सवाल उठाया कि क्या उनके परिवार को डराने और दबाने की रणनीति उसी उच्चस्तरीय बैठक में तय की गई थी.
'डराकर चुप कराने की रणनीति काम नहीं करेगी'
सौरव दास ने पुलिसिया दस्तक पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यदि सत्ता का मकसद उन्हें डराकर चुप कराना है, तो यह तरीका कभी काम नहीं करेगा. उन्होंने साफ किया कि वह इन कार्रवाइयों से न तो डरने वाले हैं और न ही झुकने वाले हैं. सौरव के मुताबिक, ऐसी घटनाएं एक बेहतर और पारदर्शी व्यवस्था बनाने के उनके संकल्प को और मजबूत करती हैं. उन्होंने कहा कि वह एक ऐसी व्यवस्था चाहते हैं जहां पुलिस गुंडों जैसा व्यवहार करने के बजाय कानून के शासन का सख्ती से पालन करें. इससे पहले दिल्ली के जी-के (ग्रेटर कैलाश) स्थित उनके आवास पर भी कुछ यूट्यूबर घुस आए थे, जिसे लेकर सौरव ने अपनी प्राइवेसी के हनन का आरोप लगाया था.
खोजी पत्रकार से छात्र आंदोलन के सिपाही सालार बनने तक का सफर
सौरव दास पेशे से एक इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट और आरटीआई एक्टिविस्ट हैं. जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से लॉ की डिग्री हासिल की. वकालत के बजाय उन्होंने सिस्टम की कमियों को उजागर करने के लिए पत्रकारिता और आरटीआई का रास्ता चुना. गृह मंत्रालय से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक अनगिनत आरटीआई अर्जियां दाखिल कर उन्होंने सरकारी नीतियों की पोल खोली.
'द कारवां' मैगजीन में खोजी पत्रकार के रूप में काम करते हुए उन्होंने सत्ता, नौकरशाही और न्यायपालिका पर कई चर्चित ग्राउंड रिपोर्ट्स लिखीं. इससे पहले नवंबर 2025 में उन्होंने दिल्ली के प्रदूषण के खिलाफ इंडिया गेट पर एक बड़े नागरिक आंदोलन का नेतृत्व भी किया था. जंतर-मंतर पर हुए हालिया छात्र आंदोलन के दौरान उनकी सक्रियता और नेतृत्व के कारण शिक्षा व्यवस्था में सुधारों की मांग उठी और सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा.
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