कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP ने 2 अक्टूबर को देशभर में नए आंदोलन का ऐलान किया, जिसकी शुरुआत इस बार मुंबई से होनी जा रही है. CJP यह आंदोलन मुख्य चुनाव आयुक्त(CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर कर रही है. इसी बीच पर्यावरणविद् और कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने हाल ही में दिल्ली आकर लद्दाख के हालात को लेकर गंभीर चिंता जताई है. उन्होंने बताया कि लद्दाख से जो संदेश वे देश तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें मीडिया में ब्लैकआउट किया जा रहा है. 24 सितंबर को शहीद दिवस के मौके पर संस्थाओं और माइक होने के बावजूद खबरें नहीं दिखाई गईं, जिसके चलते उन्हें खुद दिल्ली आना पड़ा ताकि देश को लद्दाख के जमीनी हालात से अवगत कराया जा सके. साथ ही उन्होंने 2 अक्टूबर को होने वाले आंदोलन और समर्थन पर भी बातें कही है. आइए विस्तार से जानते हैं पूरी कहानी.
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2 अक्टूबर के आंदोलन और समर्थन पर रुख
जब सोनम वांगचुक से यह पूछा गया कि क्या वे 2 अक्टूबर को सीसी और इलेक्शन कमीशन के मुद्दे पर होने वाले आंदोलन का समर्थन करेंगे, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका नैतिक समर्थन हमेशा ऐसी संस्थाओं और नेताओं के साथ है जो सही मुद्दे उठाते हैं. उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया को साफ करना और जवाबदेही लाना एक बेहद वाजिब मुद्दा है. हालांकि, हर आंदोलन में व्यक्तिगत स्तर पर जुड़ना उनके लिए संभव नहीं हो पाता है, लेकिन वे उम्मीद करते हैं कि जब आंदोलन की जड़ें कमजोर होती हैं तब समर्थन की जरूरत होती है और मजबूत होने पर वे खुद आगे बढ़ जाते हैं. उन्होंने उम्मीद जताई कि पूरा देश एक साफ-सुथरा लोकतंत्र बनाने के लिए ऐसी जवाबदेही मांगने की मुहिम से जुड़ेगा.
हादसों और आयोग की रिपोर्ट पर सवाल
सोनम वांगचुक ने लद्दाख में हुए हादसों का जिक्र करते हुए कहा कि उन घटनाओं को एक साल पूरा हो चुका है. उन्होंने खुद जोधपुर जेल में अपने बिताए गए पहले दिन को याद करते हुए सवाल उठाया कि उन हादसों की जांच के लिए जो इंक्वायरी कमीशन बिठाई गई थी, उसके नतीजों का क्या हुआ? उन्होंने उन अधिकारियों, राज्यपाल, उपराज्यपाल और गृहमंत्री से जवाब मांगा जिन्होंने ऐसे कदम उठाने के आदेश दिए थे. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अभी तक न तो शहीदों को उचित और इज्जतदार मुआवजा मिला है और न ही मामलों में कोई जवाबदेही तय हुई है, जबकि लोग अभी भी परेशानियों का सामना कर रहे हैं.
लोकतांत्रिक ढांचे और नीतियों पर अविश्वास
लद्दाख में हो रहे प्रशासनिक फैसलों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि एक तरफ जहां अच्छे नतीजे सामने आते हैं, वहीं दूसरी तरफ एलजी लद्दाख द्वारा ऐसे कदम उठाए जाते हैं जो स्थानीय भावनाओं के विपरीत होते हैं. लद्दाख में लोकतांत्रिक ढांचा आने से पहले ही जमीन, इंडस्ट्रियल पॉलिसी, टूरिज्म पॉलिसी और लोकल गवर्नेंस जैसे नीतिगत निर्णय लिए जा रहे हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर ये सारे फैसले अभी ही कर लिए जाएंगे, तो आने वाला लोकतांत्रिक ढांचा क्या करेगा? उन्होंने कहा कि अक्टूबर के पहले हफ्ते में दोबारा बातचीत होने की उम्मीद है और अगर जमीन पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो नागरिक के तौर पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का अगला फैसला लिया जाएगा.
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