धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर आया सोनम वांगचुक का रिएक्शन, बोले -'यह सिर्फ शुरुआत है, असली सुधार अभी बाकी है

न्यूज तक डेस्क

27 Jul 2026 (अपडेटेड: Jul 27 2026 4:21 PM)

Sonam Wangchuk News: अस्पताल से छुट्टी मिलते ही सोनम वांगचुक सबसे पहले राजघाट पहुंचे और महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी. उन्होंने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को केवल शुरुआत बताते हुए कहा कि असली बदलाव तब होगा, जब परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शी और स्थायी सुधार जमीन पर दिखाई देंगे.

सोनम वांगचुक ने महात्मा गांधी को दी श्रद्धांजलि
सोनम वांगचुक ने महात्मा गांधी को दी श्रद्धांजलि
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Sonam Wangchuk News: नीट पेपर लीक मुद्दे पर लगातार 26 दिनों तक अनशन करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को गुरुग्राम के अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया. अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद वे सीधे दिल्ली स्थित राजघाट पहुंचे और महात्मा गांधी को नमन किया. इस दौरान उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि वे लंबे आंदोलन के समापन के बाद सबसे पहले बापू के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट करना चाहते थे. इस दौरान सोनम वांगचुक ने कहा कि गांधी जी का दिखाया शांति और अहिंसा का रास्ता आज भी उतना ही प्रासंगिक और असरदार है, जितना सौ साल पहले हुआ करता था.

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सत्याग्रह की शक्ति और 100 साल पुरानी सीख पर दिया जोर

सोनम वांगचुक ने बताया कि कुछ लोगों का मानना था कि मौजूदा शासन में ऐसे अहिंसक तरीके काम नहीं करते. लेकिन उनका अनुभव यह बताता है कि सत्याग्रह का सीधा संदेश शासकों से ज्यादा आम जनता के दिलों तक पहुंचता है. जब जनता जागती है, तो कोई भी सरकार हो, उसे बात सुननी ही पड़ती है. उन्होंने कहा कि लद्दाख में 5-6 वर्षों तक इस तरीके का अभ्यास करने के बाद अब राष्ट्रीय स्तर पर भी उन्हें यही तसल्ली हुई है कि गांधी जी का यह सिद्धांत आज भी पूरी तरह सफल है. दूसरों को नुकसान पहुंचाए बिना खुद पीड़ा सहने का यह तरीका कठोर से कठोर दिल को भी पिघला सकता है.

युवा आयोजकों की सराहना और शांति बनाए रखने का आह्वान

आंदोलन की सफलता पर वांगचुक ने देश की युवा पीढ़ी, वरिष्ठ नागरिकों और मुख्य आयोजकों का आभार जताया. उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि लाठियां या पत्थर चलाने से नहीं, बल्कि शांतिपूर्ण अपील और खुद पर दर्द सहने से मिली है. हिंसक रास्तों या पत्थरबाजी से बात बिगड़ने का बड़ा खतरा रहता है, इसी डर से उन्हें अपना शांतिपूर्ण प्रदर्शन समय से पहले रोकना पड़ा था. उन्होंने देश और दुनिया की जनता से अपील की कि वे अपनी न्यायसंगत मांगों और फरियादों के समाधान के लिए हमेशा बापू के बताए शांतिपूर्ण मार्ग पर ही आगे बढ़ें.

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और संसद में बिल पर दी अपनी राय

आंदोलन के दौरान शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर बात करते हुए उन्होंने इसे महज एक शुरुआत बताया. उनका कहना था कि अगर इस्तीफे के बाद व्यवस्था के इलाज और सुधार की प्रक्रिया शुरू होती है, तभी इसका असली मतलब निकलेगा. उन्होंने उम्मीद जताई कि संसद में पेश किए जा रहे बिल और नीतिगत बदलावों पर सकारात्मक चर्चा होगी, जिससे देश के लिए एक बेहतर और पारदर्शी प्रणाली बन सकेगी. इसके अलावा, शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर किसी तरह की कार्रवाई न होने की उम्मीद जताते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर मंत्री और नेता जनता के सवालों के प्रति जवाबदेह होता है.

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